बिहार की राजनीति में गरमाहट: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘बपौती’ बयान पर कांग्रेस का पलटवार

बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। Samrat Choudhary के ‘बपौती’ बयान पर Indian National Congress ने कड़ा पलटवार किया है। इस बयान के बाद राज्य की

बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, जहां नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में दिए गए उनके बयान “सत्ता किसी की बपौती नहीं है” पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपमान बताया है।

पटना: बिहार की राजनीति में शुक्रवार (24 अप्रैल) को हुए विधानसभा बहुमत परीक्षण के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने सदन में बहुमत हासिल करने के बाद अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता किसी की “बपौती” नहीं है। 

इसी बयान को लेकर शनिवार (25 अप्रैल) को कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि इस टिप्पणी के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar का अपमान किया गया है, क्योंकि वे पिछले 20 वर्षों में 10 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

विधानसभा में बहुमत और बयान के बाद विवाद

शुक्रवार (24 अप्रैल) को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा में बहुमत हासिल किया। अपने संबोधन में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। इसी दौरान उन्होंने कहा कि “सत्ता किसी की बपौती नहीं है”, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। कांग्रेस ने इस बयान को सीधे तौर पर नीतीश कुमार से जोड़ते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से सम्राट चौधरी लगातार नीतीश कुमार की तुलना में खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक कार्यकाल का अपमान हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में कई बार मुख्यमंत्री पद संभाला है। कांग्रेस का कहना है कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में एक अनुभवी और स्थापित नेता हैं, और उनके योगदान को इस तरह के बयानों से कमतर नहीं आंका जा सकता।

बिहार की राजनीति में गरमाहट: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘बपौती’ बयान पर कांग्रेस का पलटवार

“बपौती” बयान पर बढ़ा राजनीतिक टकराव

विवाद की जड़ सम्राट चौधरी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता किसी की निजी संपत्ति नहीं हो सकती। उनके इस बयान को विपक्ष ने नीतीश कुमार पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा है। कांग्रेस का आरोप है कि यह बयान राजनीतिक अहंकार को दर्शाता है और बिहार के वरिष्ठ नेतृत्व को कमजोर दिखाने का प्रयास है।

इस विवाद के बीच कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के प्रशासनिक बयानों पर भी सवाल उठाए हैं। राजेश राठौर ने कहा कि थानों और अंचलों की निगरानी मुख्यमंत्री आवास से करने की बात बताती है कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की स्थिति गंभीर है। उन्होंने दावा किया कि अगर अब निगरानी मुख्यमंत्री स्तर से करनी पड़ रही है, तो यह पिछली सरकारों के प्रशासनिक ढांचे पर भी सवाल खड़े करता है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने सम्राट चौधरी पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे “लालू की पाठशाला” से जुड़े रहे हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि कुछ लोग सत्ता को अपनी संपत्ति समझते हैं, जबकि यह 14 करोड़ बिहारियों के आशीर्वाद से प्राप्त जिम्मेदारी है।

Leave a comment