24 घंटे की बारिश ने छीनी किसानों की उम्मीद, कर्ज लेकर बोया गेहूं हुआ बर्बाद खेत में रोते-रोते बेहोश हुआ किसान

बिहार में 24 घंटे की बारिश से 30% गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान परेशान, एक किसान खेत में रोते-रोते बेहोश हुआ
24 घंटे की बारिश ने छीनी किसानों की उम्मीद, कर्ज लेकर बोया गेहूं हुआ बर्बाद खेत में रोते-रोते बेहोश हुआ किसान
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बिहार के कई जिलों में बीते 24 घंटे में हुई लगातार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल, जो कटाई के बिल्कुल करीब थी, अब पानी में डूबकर बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। शुरुआती आकलन में करीब 30 प्रतिशत फसल के नुकसान की बात सामने आ रही है, लेकिन गांव-गांव में हालात इससे भी ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं।

ग्राउंड पर हालात बेहद दर्दनाक हैं। कई जगहों पर खेतों में पानी भर गया है, जिससे गेहूं की बालियां जमीन पर गिरकर सड़ने लगी हैं। किसानों का कहना है कि अगर एक-दो दिन में पानी नहीं निकला, तो पूरी फसल खराब हो सकती है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर बीज, खाद और सिंचाई पर पैसा लगाया था, वे अब सबसे ज्यादा संकट में हैं।

एक किसान की कहानी इस त्रासदी की गंभीरता को साफ तौर पर बयां करती है। उसने बताया कि उसने उधार लेकर गेहूं की खेती की थी और इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन अचानक हुई बारिश ने सब कुछ खत्म कर दिया। खेत में खड़ी फसल को बर्बाद होता देखकर वह खुद को संभाल नहीं पाया और रोते-रोते बेहोश हो गया। आसपास के लोगों ने उसे संभाला, लेकिन उसकी हालत अब भी बेहद चिंताजनक बताई जा रही है।

किसानों का कहना है कि मौसम के इस बदले मिजाज ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है। पहले से ही बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच खेती करना मुश्किल हो गया था, और अब इस तरह की प्राकृतिक आपदा ने उनकी कमर तोड़ दी है। कई किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें।

ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की टीमों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है, लेकिन किसानों को डर है कि कागजी प्रक्रिया में देरी होगी और उन्हें समय पर मदद नहीं मिल पाएगी। उनका कहना है कि तुरंत राहत और मुआवजा जरूरी है, नहीं तो कई किसान आर्थिक संकट में और गहरे फंस जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिससे इस तरह की अनिश्चित बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है, जो पहले से ही जोखिम भरा क्षेत्र है।

इस समय बिहार के गांवों में निराशा और चिंता का माहौल है। खेतों में पानी भरा है, किसान आसमान की ओर देख रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम साफ हो जाए। लेकिन जो नुकसान हो चुका है, उसे वापस पाना अब संभव नहीं है।

यह ग्राउंड रिपोर्ट सिर्फ फसल के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि उन किसानों के टूटते सपनों की भी तस्वीर है, जिन्होंने अपनी पूरी पूंजी और मेहनत इस उम्मीद में लगाई थी कि इस बार उनकी जिंदगी कुछ बेहतर होगी। अब वे फिर से उसी अनिश्चितता और संघर्ष के दौर में खड़े हैं, जहां से निकलना आसान नहीं है।

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