बिहार विधानसभा में शिक्षा बजट पर तीखी बहस: मैथिली ठाकुर के बयान से गरमाई सियासत

बिहार विधानसभा में शिक्षा बजट को लेकर जोरदार हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। इस बीच मैथिली ठाकुर के बयान ने सियासी माहौल को और गर्मा दिया। जानिए क्या था बयान

भारत के पूर्वी राज्य बिहार की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। बिहार विधानसभा में शिक्षा बजट पर बहस के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने तीखे और रूपकात्मक भाषण से सदन का माहौल गरमा दिया। 

पटना: बिहार विधानसभा में शिक्षा बजट पर चर्चा के दौरान मैथिली ठाकुर ने अपने प्रभावशाली भाषण से सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ से की और कहा कि जब वह सदन में खड़ी हैं तो यह श्लोक उनके मन में गूंज रहा है। मैथिली ठाकुर ने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब महिलाएं घर से बाहर निकलने में भी असुरक्षित महसूस करती थीं, लेकिन आज परिस्थितियां बदली हैं। 

उन्होंने दावा किया कि अब महिलाएं दरभंगा से पटना तक सुरक्षित सफर कर रही हैं। उनके इस बयान पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिससे कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया।

संस्कृत श्लोक से की शुरुआत

मैथिली ठाकुर ने अपने भाषण की शुरुआत संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक “तमसो मा ज्योतिर्गमय” से की, जिसका अर्थ है—अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। उन्होंने इसे बिहार के बदलाव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। ठाकुर ने कहा कि एक समय ऐसा था जब महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना भी असुरक्षित माना जाता था, जबकि आज महिलाएं राज्य के विभिन्न हिस्सों जैसे दरभंगा से पटना तक अपेक्षाकृत सुरक्षित यात्रा कर रही हैं। उनके इस बयान पर विपक्षी सदस्यों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिससे सदन में शोर-शराबा और विरोध दर्ज हुआ।

अपने संबोधन में भाजपा विधायक ने पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल को ‘जंगलराज’ की संज्ञा देते हुए आरोप लगाया कि उस समय शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित थी। उन्होंने कहा कि कई सरकारी स्कूलों की हालत जर्जर थी और बजट आवंटन के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार दिखाई नहीं देता था। उनके अनुसार, गरीब परिवारों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सीमित थी। हालांकि विपक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए खारिज किया और वर्तमान सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए।

बिहार विधानसभा में शिक्षा बजट पर तीखी बहस: मैथिली ठाकुर के बयान से गरमाई सियासत

लालू और तेजस्वी पर पौराणिक संदर्भ

भाषण के दौरान सबसे विवादित हिस्सा वह था, जब मैथिली ठाकुर ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की तुलना महाभारत के पात्र ‘धृतराष्ट्र’ से की। उन्होंने कहा कि उस दौर के नेतृत्व को राज्य की व्यापक चिंता नहीं थी। इसी क्रम में उन्होंने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को ‘दुर्योधन’ कहकर संबोधित किया।

इन टिप्पणियों के बाद राजद विधायकों ने जोरदार विरोध किया और सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप कर व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।

नीतीश कुमार के नेतृत्व का उल्लेख

मैथिली ठाकुर ने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।  विशेष रूप से ‘मुख्यमंत्री साइकिल योजना’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना ने ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की छात्राओं को स्कूल पहुंचने में बड़ी मदद की है। उनके अनुसार, इस पहल ने न केवल छात्राओं की स्कूल उपस्थिति बढ़ाई, बल्कि सामाजिक मानसिकता में भी सकारात्मक बदलाव लाया।

बिहार विधानसभा में शिक्षा बजट पर बहस केवल वित्तीय प्रावधानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह राज्य की राजनीतिक दिशा और विकास मॉडल पर व्यापक विमर्श में बदल गई। भाजपा ने इसे ‘विकास बनाम अतीत’ की बहस के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि विपक्ष ने सरकार के दावों की जांच और जमीनी सच्चाई पर सवाल उठाए।

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