BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। अजित पवार गुट समेत महाविकास आघाड़ी को झटका लगा, जबकि 20 से ज्यादा स्थानीय नेता भाजपा में शामिल होकर सियासी समीकरण बदल गए।
Mumbai: महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और अन्य नगर निगम चुनावों से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी बिगुल बजते ही दल बदल की राजनीति ने रफ्तार पकड़ ली है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा राजनीतिक फायदा मिला है, जबकि महाविकास आघाड़ी (MVA) और खास तौर पर अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को करारा झटका लगा है। चुनाव से पहले 20 से ज्यादा नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिससे राज्य की नगर निगम राजनीति में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
नगर निगम चुनावों की घोषणा से बढ़ी सियासी गर्मी
महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने हाल ही में राज्य की 29 नगर निगमों के चुनावों की घोषणा कर दी है। इसमें मुंबई की बीएमसी के साथ पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) भी शामिल हैं। चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। ऐसे समय में भाजपा में बड़े पैमाने पर नेताओं का शामिल होना इस बात का संकेत है कि आने वाले चुनाव बेहद दिलचस्प और निर्णायक होने वाले हैं।
भाजपा में शामिल हुए 20 से ज्यादा नेता
बीएमसी और पीसीएमसी चुनाव से पहले शनिवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में करीब 20 पूर्व नगरसेवक और पदाधिकारी भाजपा में शामिल हुए। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इन नेताओं में बड़ी संख्या महायुति की सहयोगी पार्टी अजित पवार गुट की एनसीपी से जुड़ी थी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह कदम भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और चुनावी मजबूती की दिशा में एक बड़ा संदेश देता है।
अजित पवार गुट को सबसे बड़ा झटका
इस दल-बदल से सबसे ज्यादा नुकसान अजित पवार गुट की एनसीपी को होता दिख रहा है। भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में अजित पवार गुट के 12 प्रमुख नेता शामिल हैं। इनमें पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष उषा वाघेरे और प्रशांत शितोले, पूर्व उपमहापौर प्रभाकर वाघेरे, पूर्व महापौर राजू मिसाल, पूर्व विपक्ष नेता विनोद नाडे, समीर मसुलकर और नवनाथ जगताप जैसे नाम शामिल हैं। इन नेताओं का जाना एनसीपी के लिए नगर निगम चुनाव से ठीक पहले बड़ा झटका माना जा रहा है।
आदर्श आचार संहिता के बीच हुआ बड़ा घटनाक्रम

खास बात यह है कि यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब आदर्श आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर नेताओं का भाजपा में शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है। इसे भाजपा की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और स्थानीय स्तर पर बढ़ते जनाधार के तौर पर देखा जा रहा है।
मुंबई कार्यक्रम से दिया गया सियासी संदेश
मुंबई में हुए इस कार्यक्रम का नेतृत्व बोसरी से भाजपा विधायक महेश लांडगे और चिंचवड़ से विधायक शंकर जगताप ने किया। मंच से भाजपा नेताओं ने साफ संकेत दिया कि पार्टी नगर निगम चुनावों को लेकर पूरी तरह तैयार है और विपक्षी दलों की कमजोरी का फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।
भाजपा की विकास राजनीति पर बढ़ता भरोसा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक महेश लांडगे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के नेतृत्व में लोगों का भरोसा भाजपा की विकास राजनीति पर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम चुनावों में भाजपा निर्णायक जीत दर्ज करेगी और स्थानीय स्तर पर मजबूत सरकार बनाएगी।
पिंपरी-चिंचवड़ को लेकर भाजपा का विजन
विधायक शंकर जगताप ने पिंपरी-चिंचवड़ को महाराष्ट्र का प्रमुख औद्योगिक और आईटी हब बताया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विकास हुआ है। नए नेताओं के भाजपा में शामिल होने से शहर के विकास की रफ्तार और तेज होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले चुनावों में भाजपा को जनता का मजबूत समर्थन मिलेगा।
बीएमसी चुनाव क्यों हैं अहम
बीएमसी चुनाव सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें पूरे महाराष्ट्र की राजनीति का सेमीफाइनल माना जाता है। देश की सबसे अमीर नगर पालिका होने के कारण बीएमसी पर कब्जा राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होता है। ऐसे में चुनाव से पहले नेताओं का भाजपा में शामिल होना पार्टी को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाता है।
महाविकास आघाड़ी की बढ़ी मुश्किलें
एक तरफ जहां भाजपा मजबूत होती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और एनसीपी के भीतर पहले से ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब अजित पवार गुट से नेताओं का भाजपा में जाना विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय स्तर पर बदलते समीकरण
नगर निगम चुनावों में स्थानीय नेताओं की भूमिका बेहद अहम होती है। वार्ड स्तर पर पकड़ रखने वाले नेताओं का दल बदलना सीधे तौर पर वोट बैंक को प्रभावित करता है। भाजपा में शामिल हुए अधिकतर नेता ऐसे हैं, जिनकी स्थानीय राजनीति में अच्छी पकड़ मानी जाती है। इससे भाजपा को ग्राउंड लेवल पर फायदा मिलने की संभावना बढ़ गई है।











