मुंबई बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को देश की सबसे अमीर महानगरपालिका माना जाता है, इसलिए इसके मेयर पद को लेकर सियासी हलचल होना स्वाभाविक है। इस बार मुकाबला सीधे तौर पर महायुति और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के बीच है।
मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मानी जाने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त हलचल है। आमतौर पर बहुमत रखने वाली पार्टी का मेयर बनना तय माना जाता है, लेकिन इस बार आरक्षण लॉटरी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। भले ही संख्याबल में महायुति आगे हो, लेकिन उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के लिए उम्मीद की एक मजबूत किरण अब भी बनी हुई है।
खुद उद्धव ठाकरे का यह बयान कि “भगवान की मर्जी होगी तो हमारी पार्टी का मेयर बनेगा” सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बयान के पीछे की पूरी रणनीति अब सामने आ रही है।
BMC में संख्याबल का मौजूदा गणित
बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 114 है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन (महायुति) के पास फिलहाल 118 पार्षद हैं।वहीं शिवसेना (यूबीटी) और मनसे मिलकर सिर्फ 71 पार्षदों तक ही पहुंच पाए हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो तस्वीर महायुति के पक्ष में साफ नजर आती है। लेकिन बीएमसी मेयर चुनाव सिर्फ संख्या के खेल से तय नहीं होता।
आरक्षण लॉटरी: जहां से शुरू होता है असली खेल

बीएमसी में मेयर पद का चुनाव आरक्षण रोटेशन सिस्टम के तहत होता है। 22 जनवरी को मेयर पद के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जानी है, जो पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा तय करेगी। पिछली बार मेयर पद ओपन कैटेगरी में था। नियमों के मुताबिक इस बार ओपन कैटेगरी नहीं होगी। इस बार लॉटरी तीन विकल्पों में से किसी एक पर टिकेगी:
- SC (अनुसूचित जाति)
- OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग)
- ST (अनुसूचित जनजाति)
- SC और OBC: महायुति की मजबूत पकड़
अगर मेयर पद का आरक्षण SC या OBC कैटेगरी में जाता है, तो महायुति के लिए रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। बीजेपी और शिंदे शिवसेना के पास इन दोनों वर्गों में पर्याप्त पार्षद हैं। ऐसे में वे आसानी से अपना उम्मीदवार उतारकर बहुमत के दम पर मेयर पद पर कब्जा जमा सकते हैं। यही वजह है कि फिलहाल महायुति खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है और किसी बड़े उलटफेर की आशंका से इनकार कर रही है।
ST कैटेगरी: उद्धव ठाकरे के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी वजह
पूरे चुनाव का सबसे बड़ा सस्पेंस ST कैटेगरी को लेकर है। मुंबई में ST वर्ग की सिर्फ दो सीटें हैं और खास बात यह है कि दोनों सीटों पर शिवसेना (यूबीटी) के पार्षद ही जीतकर आए हैं।
- वार्ड 53: जितेंद्र वलवी
- वार्ड 121: प्रियदर्शनी ठाकरे
महायुति के पास ST कैटेगरी में एक भी पार्षद नहीं है। अगर लॉटरी ST महिला या ST पुरुष कैटेगरी पर जाती है, तो मेयर पद के लिए सिर्फ उद्धव ठाकरे की पार्टी के उम्मीदवार ही पात्र होंगे। ऐसी स्थिति में बहुमत होने के बावजूद महायुति के हाथ बंध जाएंगे।













