पश्चिम बंगाल चुनाव खत्म होने के बाद I-PAC के संस्थापक निदेशक को जमानत मिलने पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने ED की कार्रवाई और जमानत की टाइमिंग को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण का मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद I-PAC के संस्थापक निदेशक को जमानत मिलने से नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर निशाना साधा है।
पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जमानत चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद मिली और ED ने इसका विरोध नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
मामला राजनीतिक रणनीतिकार कंपनी I-PAC से जुड़ा है, जो लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनावी अभियानों और रणनीतियों पर काम करती रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में I-PAC के संस्थापक और निदेशक को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद कंपनी के कार्यालयों में पूछताछ और जांच की कार्रवाई भी हुई थी।
हालांकि बुधवार को पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान समाप्त होने के अगले ही दिन दिल्ली की Patiala House Court ने आरोपी को नियमित जमानत दे दी।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि ED ने अदालत में जमानत का विरोध नहीं किया।
सौरभ भारद्वाज ने क्या आरोप लगाए?
सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही जमानत मिलना संदेह पैदा करता है।
उन्होंने दावा किया कि
- I-PAC पश्चिम बंगाल चुनाव में Trinamool Congress (TMC) के लिए रणनीतिक काम कर रही थी
- कंपनी के पास चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों का विस्तृत डेटा था

चुनाव से ठीक पहले ED की कार्रवाई हुई
कर्मचारियों पर दबाव बना, जिससे कई लोगों को छुट्टी पर भेजना पड़ा
सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा नहीं देखा कि ED के किसी मामले में इतनी आसानी से निचली अदालत से जमानत मिल जाए।
ED और केंद्र सरकार पर विपक्ष का हमला
AAP नेता ने अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार और भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। भारद्वाज ने चुनाव आयोग, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उनका आरोप था कि विपक्षी दलों को कमजोर करने और चुनावी रणनीति प्रभावित करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
I-PAC क्या है और इसकी भूमिका क्यों अहम मानी जाती है?
I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी भारत की प्रमुख राजनीतिक रणनीति और चुनाव प्रबंधन कंपनियों में से एक मानी जाती है।
यह संस्था—
- चुनावी डेटा विश्लेषण
- मतदाता रणनीति
- प्रचार अभियान
- सोशल मीडिया मैनेजमेंट
- जमीनी सर्वेक्षण
- जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
कई राजनीतिक दलों ने अलग-अलग समय पर I-PAC की सेवाएं ली हैं। पश्चिम बंगाल चुनावों में भी इसकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
पश्चिम बंगाल चुनाव और राजनीतिक तनाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पहले से ही राजनीतिक तनाव, सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता को लेकर चर्चा में रहा है।
चुनाव के दौरान—
- केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती
- चुनावी हिंसा के आरोप
- विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बयानबाजी
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
- लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रहे।
- अब I-PAC मामले में जमानत मिलने के बाद यह विवाद और गहरा गया है।
- राजनीतिक रणनीति और डेटा का बढ़ता महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चुनावों में डेटा और रणनीति कंपनियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है।
ऐसी संस्थाएं—
- मतदाताओं के व्यवहार का अध्ययन करती हैं
- चुनावी रुझानों का विश्लेषण करती हैं
- बूथ स्तर तक रणनीति तैयार करती हैं
- डिजिटल प्रचार अभियान चलाती हैं
इसी वजह से चुनावी रणनीति से जुड़ी कंपनियां अब राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम बन चुकी हैं।
विपक्ष क्यों उठा रहा है सवाल?
विपक्षी दलों का कहना है कि यदि किसी मामले में पर्याप्त सबूत थे, तो चुनाव खत्म होते ही अचानक जमानत का विरोध न करना सवाल पैदा करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और एजेंसियों की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है।
हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत द्वारा जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और हर मामले में जांच एजेंसी का विरोध करना जरूरी नहीं होता।
भाजपा समर्थकों को भी संबोधित किया
अपने बयान में सौरभ भारद्वाज ने भाजपा और RSS समर्थकों से भी सवाल पूछे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन संस्थाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता उससे भी ज्यादा जरूरी है।
उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।











