चंद्र कुमार बोस बंगाल चुनाव से पहले ममता की पार्टी Trinamool Congress में शामिल हो गए। उन्होंने BJP पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप लगाया। वहीं Amit Shah आज राज्य में 3 जनसभाएं करेंगे।
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में एक अहम मोड़ आया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भतीजे और पूर्व भाजपा नेता चंद्र कुमार बोस ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब राज्य में चुनावी मुकाबला बेहद तीखा होता जा रहा है।
कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में चंद्र कुमार बोस ने राज्य मंत्री ब्रात्य बसु और TMC सांसद कीर्ति आजाद की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। यह राजनीतिक घटनाक्रम बंगाल चुनावी माहौल में प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ममता की पार्टी में शामिल होते ही भाजपा पर साधा निशाना
TMC में शामिल होने के बाद चंद्र कुमार बोस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा “बांटने वाली राजनीति” कर रही है और देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही है। उनके मुताबिक, भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और संविधान की रक्षा के लिए विभाजनकारी राजनीति का विरोध जरूरी है।
उन्होंने कहा कि:
धर्म और पहचान के आधार पर राजनीति खतरनाक है
देश को एकजुट रखने की जरूरत है
नेताजी की विरासत समावेशी राष्ट्रवाद की थी
राजनीतिक दलों को संविधान के मूल्यों का सम्मान करना चाहिए
चंद्र कुमार बोस का यह बयान चुनावी बहस को और तेज कर सकता है, खासकर ऐसे राज्य में जहां पहचान, संस्कृति और क्षेत्रीय गौरव लंबे समय से राजनीति का केंद्र रहे हैं।
भाजपा से TMC तक: चंद्र कुमार बोस की राजनीतिक यात्रा
चंद्र कुमार बोस ने 2016 में भाजपा जॉइन की थी। उस समय भाजपा पश्चिम बंगाल में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही थी और नेताजी परिवार से जुड़े चेहरे का शामिल होना उसके लिए बड़ा प्रतीकात्मक कदम था।
उनकी प्रमुख राजनीतिक पड़ाव
:
2016: भाजपा में शामिल हुए
2016: भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा, हार गए
2019: कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, हार
2023: भाजपा से इस्तीफा दिया
2026: TMC में शामिल हुए
चंद्र कुमार बोस ने पहले भी भाजपा की विचारधारा और कामकाज पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भाजपा में शामिल होना उनके जीवन की “ऐतिहासिक गलती” थी।
बंगाल चुनाव में नेताजी की विरासत क्यों अहम है?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद प्रभावशाली है।
इसका चुनावी महत्व:
बंगाली अस्मिता का मजबूत प्रतीक
राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत
शहरी और मध्यमवर्गीय मतदाताओं पर असर
ऐतिहासिक पहचान की राजनीति में प्रभाव
TMC लंबे समय से बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय गौरव को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाती रही है। ऐसे में चंद्र कुमार बोस का शामिल होना पार्टी के लिए एक बड़ा नैरेटिव सपोर्ट माना जा रहा है।
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बंगाल में BJP बनाम TMC: चुनावी लड़ाई और तेज
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा और TMC दोनों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है।
अमित शाह की रैलियां
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 13 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के:
मयूरेश्वर
दुबराजपुर
रानीगंज
में जनसभाएं करेंगे। इसके बाद दुर्गापुर में रोड शो होना है। भाजपा बंगाल में सरकार परिवर्तन के टारगेट के साथ आक्रामक अभियान चला रही है।
TMC का पलटवार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार भाजपा पर बाहरी हस्तक्षेप, ध्रुवीकरण और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगा रही हैं। TMC का फोकस:
महिला सुरक्षा
सामाजिक कल्याण योजनाएं
क्षेत्रीय पहचान
भाजपा के “बाहरी” नैरेटिव का जवाब
पर है।
अन्य दल भी चुनावी मैदान में सक्रिय
पश्चिम बंगाल चुनाव इस बार बहुकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ता दिख रहा है।
AIMIM की रणनीति
असदुद्दीन ओवैसी ने भी बंगाल में संगठन मजबूत करने और अल्पसंख्यक राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की बात कही है। हालांकि उनकी सहयोगी रणनीति में हालिया बदलाव हुए हैं।
विपक्ष के आरोप
भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और बेरोजगारी को चुनावी मुद्दा बनाया है।
इससे साफ है कि बंगाल चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि:
विचारधारा
पहचान
विकास
कानून व्यवस्था
जैसे मुद्दों का भी बड़ा परीक्षण है।
तमिलनाडु में भी BJP का चुनावी जोर
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तमिलनाडु में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ वर्चुअल संवाद करेंगे। यह संवाद चुनावी रणनीति को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के अभियान का हिस्सा है।
इससे स्पष्ट है कि भाजपा दक्षिण भारत और पूर्वी भारत दोनों में एक साथ आक्रामक चुनावी मोड में है।









