ब्रिटेन में रक्षा खर्च पर बवाल, दो वरिष्ठ मंत्रियों के इस्तीफे से स्टार्मर सरकार घिरी

ब्रिटेन में रक्षा खर्च को लेकर विवाद गहरायाता जा रहा है, रक्षा सचिव जॉन हीली और सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स के इस्तीफे से स्टार्मर सरकार पर दबाव बढ़ गया।

ब्रिटेन में रक्षा निवेश योजना को लेकर राजनीतिक संकट गहरा गया है। रक्षा सचिव जॉन हीली और सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स के इस्तीफे से प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार पर दबाव बढ़ा है और रक्षा नीति पर नई बहस छिड़ गई है।

लंदन: ब्रिटेन की राजनीति में रक्षा खर्च को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार को मुश्किल स्थिति में ला खड़ा किया है। रक्षा निवेश योजना (Defence Investment Plan) को लेकर सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों के इस्तीफे ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों पर नई बहस छेड़ दी है।

सबसे पहले रक्षा सचिव जॉन हीली ने पद छोड़ दिया। इसके कुछ ही समय बाद सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स ने भी सरकार से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं का मानना है कि प्रस्तावित रक्षा निवेश योजना वर्तमान वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

इन इस्तीफों ने लेबर सरकार के भीतर बढ़ते मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है और विपक्ष ने इसे सरकार की रक्षा नीति की बड़ी विफलता बताया है।

क्या है विवाद की जड़?

विवाद का केंद्र ब्रिटेन की नई रक्षा निवेश योजना है, जिसका उद्देश्य अगले दशक के लिए देश की सैन्य क्षमता और रक्षा रणनीति को तय करना है।

सरकार का कहना है कि यह योजना रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने, सेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकों में निवेश के लिए तैयार की गई है। लेकिन इस्तीफा देने वाले नेताओं का तर्क है कि प्रस्तावित फंडिंग वर्तमान खतरों के मुकाबले बहुत कम है।

जॉन हीली ने अपने इस्तीफे में कहा कि प्रस्तावित निवेश "देश और राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों से काफी कम" है। वहीं अल कार्न्स ने योजना को "पर्याप्त रूप से परिवर्तनकारी नहीं" बताते हुए कहा कि यह भविष्य की चुनौतियों के बजाय अतीत के युद्धों की सोच पर आधारित दिखाई देती है।

अल कार्न्स का सरकार पर सीधा हमला

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में अल कार्न्स ने कहा कि ब्रिटेन ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की जरूरत है।

पूर्व मरीन अधिकारी रहे कार्न्स का कहना है कि रक्षा निवेश योजना में वह दूरदर्शिता दिखाई नहीं देती जो आधुनिक युद्ध और बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सरकार को रक्षा के लिए अधिक धन जुटाना होगा और यह निर्णय प्रधानमंत्री के स्तर पर लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार केवल मौजूदा संसाधनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है।

कार्न्स ने यह भी कहा कि ब्रिटेन को जनता के साथ ईमानदार बातचीत करनी होगी और उन्हें यह समझाना होगा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में सुरक्षा चुनौतियां पहले से कहीं अधिक गंभीर हो चुकी हैं।

यूक्रेन युद्ध से मिले सबक पर जोर

रक्षा निवेश योजना की आलोचना करते हुए अल कार्न्स ने कहा कि इसमें यूक्रेन युद्ध से मिले महत्वपूर्ण सबक पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किए गए हैं। उनका मानना है कि आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक सैन्य ताकत का मामला नहीं रह गया है। ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालित हथियार प्रणालियां भविष्य के युद्धों को परिभाषित करेंगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित योजना भविष्य की जरूरतों के बजाय पुराने सैन्य ढांचे पर अधिक आधारित दिखाई देती है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष ने दुनिया भर की सेनाओं को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।

नए रक्षा सचिव के सामने बड़ी चुनौती

जॉन हीली के इस्तीफे के बाद डैन जार्विस को नया रक्षा सचिव नियुक्त किया गया है। जार्विस पूर्व सैन्य अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें इराक तथा अफगानिस्तान में सेवा के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है। हालांकि नई जिम्मेदारी संभालते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रक्षा बजट और सैन्य निवेश को लेकर उठे विवाद को संभालने की होगी।

उन्हें न केवल सरकार के भीतर विश्वास बहाल करना होगा बल्कि सेना और रक्षा विशेषज्ञों को भी यह भरोसा दिलाना होगा कि ब्रिटेन भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार है।

विपक्ष का तीखा हमला

सरकार के भीतर हुए इन इस्तीफों के बाद विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री स्टार्मर की आलोचना तेज कर दी है। कंजर्वेटिव और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार के अपने वरिष्ठ मंत्री ही रक्षा नीति से संतुष्ट नहीं हैं, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

पूर्व सुरक्षा मंत्री टॉम टुगेन्धाट ने जॉन हीली के इस्तीफे को अत्यंत गंभीर बताया और कहा कि यह सरकार के भीतर गहरे मतभेदों का संकेत है। वहीं अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार रक्षा आवश्यकताओं की तुलना में अन्य खर्चों को प्राथमिकता दे रही है।

स्टार्मर का बचाव

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रक्षा योजना ब्रिटेन को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएगी और इसे दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है।

स्टार्मर ने यह भी स्पष्ट किया कि रक्षा खर्च बढ़ाना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह वित्तीय रूप से टिकाऊ भी होना चाहिए ताकि देश की आर्थिक स्थिरता प्रभावित न हो। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी और इसे नाटो सहयोगियों की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाया जाएगा।

वैश्विक सुरक्षा माहौल ने बढ़ाई चिंता

रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव, यूक्रेन युद्ध, साइबर हमलों के खतरे और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। ब्रिटेन भी इन चुनौतियों से अछूता नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में सैन्य आधुनिकीकरण और तकनीकी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इसी वजह से रक्षा निवेश योजना को लेकर उठे सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखते हैं।

आगे क्या होगा?

ब्रिटिश सरकार जल्द ही अपनी विस्तृत रक्षा निवेश योजना सार्वजनिक करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि आगामी नाटो शिखर सम्मेलन से पहले इस योजना की घोषणा की जा सकती है। इस योजना के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में कितना निवेश करने जा रही है और क्या यह आलोचकों की चिंताओं को दूर कर पाएगी। फिलहाल जॉन हीली और अल कार्न्स के इस्तीफों ने ब्रिटिश राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है और प्रधानमंत्री स्टार्मर की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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