BPSC टीचर पर होटल में दुष्कर्म और वीडियो बनाने का आरोप ब्लैकमेल कर दूसरी छात्राओं को बुलाने की बात; हेडमास्टर गिरफ्तार

बक्सर के सरकारी स्कूल के दो शिक्षकों पर नाबालिग छात्राओं के यौन शोषण, वीडियो बनाने और ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोप हैं। हेडमास्टर गिरफ्तार हैं।
BPSC टीचर पर होटल में दुष्कर्म और वीडियो बनाने का आरोप ब्लैकमेल कर दूसरी छात्राओं को बुलाने की बात; हेडमास्टर गिरफ्तार
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बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड से सामने आया सरकारी स्कूल का मामला शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय के दो शिक्षकों पर नाबालिग छात्राओं के यौन शोषण, आपत्तिजनक वीडियो बनाने, उसे प्रसारित करने और कथित तौर पर ब्लैकमेल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं दोनों आरोपी शिक्षकों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम छापेमारी कर रही है।

पीड़िता की ओर से पुलिस को दिए गए बयान में आरोप लगाया गया है कि उसे पहले एक शिक्षक ने अपने प्रभाव में लिया और बाद में कथित तौर पर होटल में बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोप है कि इसी दौरान उसका वीडियो भी बनाया गया। इसके बाद वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसे दोबारा मिलने के लिए दबाव में रखा गया। शिकायत के मुताबिक, आरोपी शिक्षक कथित तौर पर उससे दूसरी लड़कियों को भी बुलाने के लिए कहता था। हालांकि इन आरोपों की पूरी सच्चाई पुलिस की जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

मामला कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र का है। इसी इलाके के नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय में वीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। सामने आई शिकायतों के बाद दोनों पर छात्राओं के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार और आपत्तिजनक वीडियो से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए। शिक्षा विभाग ने प्राथमिक जांच के बाद दोनों को निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

मामले ने तब तूल पकड़ा, जब एक आपत्तिजनक वीडियो स्थानीय स्तर पर वायरल होने की बात सामने आई। इसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और 29 अगस्त को बड़ी संख्या में लोग स्कूल पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोपित शिक्षकों को पकड़कर उनसे पूछताछ की। इसी दौरान एक शिक्षक के मोबाइल फोन की जांच किए जाने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि मोबाइल में छात्राओं से जुड़े अन्य आपत्तिजनक वीडियो भी मिले। इसके बाद मामला शिक्षा विभाग और पुलिस तक पहुंचा।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि छात्राओं को डराने के लिए वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया जाता था। आरोप है कि पहले एक लड़की को कथित तौर पर अपने जाल में फंसाया गया और फिर उससे दूसरी छात्राओं को बुलाने के लिए कहा गया। कुछ रिपोर्टों में गिफ्ट, मोबाइल फोन और दूसरी चीजों का लालच देने के आरोप भी सामने आए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कितनी छात्राएं इस पूरे मामले से प्रभावित हुईं और आरोपों में बताए गए लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी।

पीड़िता के बयान में होटल का भी जिक्र सामने आया है। पुलिस ने उसकी जानकारी के आधार पर डुमरांव के कई होटलों में जांच और छापेमारी की। जांच का उद्देश्य उस कमरे या स्थान की पहचान करना है, जहां कथित घटना हुई थी। पुलिस मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ-साथ होटल के रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज जैसे डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों को भी खंगाल रही है।

इस मामले में विद्यालय के प्रधानाध्यापक की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। आरोप है कि घटना की जानकारी सामने आने के बाद मामले को दबाने या आरोपित शिक्षकों को बचाने की कोशिश की गई। पुलिस ने इसी सिलसिले में प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी को गिरफ्तार किया है। शिक्षा विभाग ने उनके खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस गिरफ्तारी ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि इमाम अली अंसारी का नाम वर्ष 2026 के राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों की सूची में शामिल था। घटना के बाद उन्हें पुरस्कार से वंचित करने की अनुशंसा की गई है। शिक्षा विभाग की ओर से उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

शिक्षा विभाग ने दोनों आरोपी शिक्षकों को पहले ही निलंबित कर दिया था। निलंबन के दौरान वीरेंद्र प्रसाद का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, राजपुर और अरविंद कुमार का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, चक्की निर्धारित किया गया है। विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर आगे सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दोनों आरोपी शिक्षकों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू करने और उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की बात कही गई है, ताकि जांच पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि वायरल वीडियो वास्तव में किसका है, उसे किसने बनाया और किसने आगे प्रसारित किया। यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विद्यालय के प्रधानाध्यापक की ओर से दिए गए एक प्रतिवेदन में दावा किया गया था कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली लड़की उस विद्यालय की छात्रा नहीं है। पुलिस इस दावे और पीड़िता की शिकायत समेत सभी उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर रही है।

मामले में कुछ लोगों की ओर से बड़ी संख्या में छात्राओं के शोषण के दावे भी किए गए हैं। राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने 12 छात्राओं के साथ शोषण का दावा करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक इतनी छात्राओं के प्रभावित होने की अंतिम पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निश्चित संख्या को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

बक्सर एसपी शुभम आर्य के स्तर से भी मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी शिक्षकों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। जांच में स्कूल पहुंचकर ग्रामीणों से जानकारी लेने के साथ-साथ वायरल सामग्री और घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों को भी देखा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा, शिक्षकों की जिम्मेदारी और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक शिक्षक और छात्र के बीच विश्वास का रिश्ता बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे में यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल व्यक्तिगत अपराध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संस्थागत स्तर पर जवाबदेही का भी बड़ा प्रश्न बनेगा।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। दोनों शिक्षकों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है, जबकि प्रधानाध्यापक की गिरफ्तारी हो चुकी है। शिक्षा विभाग ने निलंबन और विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। अब जांच में मोबाइल और वीडियो से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, पीड़ित पक्ष के बयान, होटल से मिलने वाले रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि कथित घटनाएं कब, कहां और किस तरह हुईं तथा इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

नोट: नाबालिग पीड़िताओं की पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी यहां जानबूझकर शामिल नहीं की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

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