मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से विरोध और इस्तीफे की मांग के बीच उनके कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और आधार पर ही पद से हटाया जा सकता है।
नई दिल्ली: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। विशेष रूप से SIR (Special Intensive Revision) के मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार उनके खिलाफ आवाज उठा रहा है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष की ओर से संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल कब तक है और वह कब रिटायर होंगे?
जनवरी 2029 तक है ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ज्ञानेश कुमार का मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर कार्यकाल जनवरी 2029 तक है। यदि वह इससे पहले स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देते हैं या संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें पद से नहीं हटाया जाता, तो वह जनवरी 2029 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह चुनाव आयुक्त के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने जनवरी 2024 में सिविल सेवा से सेवानिवृत्ति ली थी और इसके बाद उन्हें चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई थी जब देश में आम चुनाव की तैयारियां चल रही थीं। फरवरी 2025 में उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया और तब से वह भारतीय चुनाव आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं।
कितने चुनावों की जिम्मेदारी संभालेंगे?
मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें देश के बड़े राज्यों के चुनाव भी शामिल हैं। उनके कार्यकाल में 2027 के राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भी होगी। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
इसके अलावा 2028 और 2029 में भी कई राज्यों में चुनाव प्रस्तावित हैं। इस वजह से उनके कार्यकाल के अंतिम वर्षों में चुनाव आयोग के सामने काफी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रहेंगी।]

2027 में इन राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव
साल 2027 में कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इनमें उत्तर प्रदेश का चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह देश का सबसे अधिक विधानसभा सीटों वाला राज्य है। चुनाव आयोग को इन चुनावों के दौरान मतदाता सूची, मतदान व्यवस्था और सुरक्षा सहित कई स्तरों पर तैयारियां करनी होंगी।
2028 में इन राज्यों में चुनाव
साल 2028 में भी कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रस्तावित चुनावों में मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, कर्नाटक, मिजोरम और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इन राज्यों के चुनावों के अलावा चुनाव आयोग को उपचुनाव और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी।
2029 में इन राज्यों में चुनाव
साल 2029 में भी कई राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र शामिल हैं। हालांकि ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल जनवरी 2029 तक बताया जा रहा है, इसलिए 2029 में होने वाले सभी विधानसभा चुनाव उनकी जिम्मेदारी के तहत आएंगे या नहीं, यह चुनावों की वास्तविक समय-सारणी और उनके कार्यकाल की स्थिति पर निर्भर करेगा।











