इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गुरुवार को गंभीर साइबर सुरक्षा चेतावनी जारी की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ऑटोनॉमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स द्वारा भारतीय कंपनियों के लाइव सिस्टम तक पहुंच बनाने और बिना अनुमति गोपनीय रिकॉर्ड पढ़ने के दावे सामने आए हैं।
टेक न्यूज़: भारत में साइबर सुरक्षा को लेकर एक नई चुनौती सामने आई है। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने ऑटोनॉमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स से जुड़े साइबर खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के अनुसार, रिसर्च और टेस्टिंग के दौरान कुछ AI एजेंट्स कथित तौर पर भारतीय संगठनों के लाइव कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच गए और संवेदनशील व्यावसायिक रिकॉर्ड तक अनधिकृत पहुंच हासिल कर ली। इन घटनाओं ने कंपनियों के डेटा, क्लाउड स्टोरेज और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
CERT-In ने अपनी एडवाइजरी में चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी अब हमलों को अंजाम देने के लिए ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ सकती है और कंपनियों के लिए समय रहते खतरे की पहचान करना अधिक मुश्किल हो सकता है।
CERT-In की एडवाइजरी में क्या कहा गया?
CERT-In की एडवाइजरी CIAD-2026-0049 का शीर्षक ‘AI Agents as Attack Vectors’ है। इसमें सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) से जुड़े बुनियादी ढांचे पर AI एजेंट्स के संभावित दुष्प्रभावों को रेखांकित किया गया है। एजेंसी के अनुसार, कुछ AI मॉडल रिसर्च और मूल्यांकन गतिविधियों के दौरान निर्धारित कार्यों की सीमा पार कर गए। इसके परिणामस्वरूप उन्हें ऐसे सिस्टम और डिजिटल संसाधनों तक पहुंच मिल गई, जिन्हें एक्सेस करने की अनुमति उनके पास नहीं थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, AI मॉडल प्रदाताओं ने इन घटनाओं की जानकारी स्वेच्छा से साझा की थी। प्रभावित संगठनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हालांकि, एडवाइजरी में संवेदनशील व्यावसायिक जानकारी और व्यक्तिगत डेटा तक संभावित अनधिकृत पहुंच को लेकर चिंता जताई गई है।
यह घटनाक्रम बताता है कि AI सिस्टम को केवल परीक्षण के उद्देश्य से इस्तेमाल करने पर भी पर्याप्त सुरक्षा नियंत्रण जरूरी हैं। यदि किसी मॉडल को जरूरत से ज्यादा अधिकार दिए जाते हैं, तो वह अनजाने में भी संवेदनशील संसाधनों तक पहुंच सकता है।
AI एजेंट्स को कैसे मिली संवेदनशील डेटा तक पहुंच?
CERT-In की चेतावनी के अनुसार, सिस्टम में मौजूद कुछ सुरक्षा कमजोरियां अनधिकृत पहुंच का कारण बन सकती हैं। इनमें सोर्स कोड, कोड रिपॉजिटरी, CI/CD पाइपलाइन से जुड़े वेरिएबल्स, कॉन्फिगरेशन फाइल्स और क्लाउड स्टोरेज में मौजूद कमजोर सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। कई बार कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर विकास और संचालन के लिए ऐसे डिजिटल क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करती हैं, जिनसे विभिन्न सिस्टम तक पहुंच मिलती है। यदि ये क्रेडेंशियल्स सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जाएं या सही तरीके से सुरक्षित न हों, तो हमलावर इनका दुरुपयोग कर सकते हैं।
AI एजेंट्स की खासियत यह है कि वे दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई चरणों में काम कर सकते हैं। यदि उनकी गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी न हो, तो वे उपलब्ध अनुमतियों का इस्तेमाल करके अपेक्षा से अधिक संसाधनों तक पहुंच सकते हैं।
साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ने का खतरा
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CERT-In ने यह भी चेतावनी दी है कि AI की मदद से साइबर हमलों के शुरुआती चरण और नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के बीच का समय काफी कम हो सकता है। जिन प्रक्रियाओं में पहले कई दिन लगते थे, उन्हें कुछ परिस्थितियों में घंटों के भीतर अंजाम दिया जा सकता है। एजेंसी के अनुसार, शुरुआती हमले के बाद सुरक्षा खामियों को दूर नहीं करने वाले संगठनों को दोबारा निशाना बनाए जाने का जोखिम भी रहता है। इससे हमलावर सिस्टम में अपनी पहुंच बढ़ा सकते हैं और अधिक संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।
एडवाइजरी में वित्तीय लाभ के उद्देश्य से किए जाने वाले साइबर अभियानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI आधारित ऑफेंसिव सिक्योरिटी टूल्स के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया गया है।
कंपनियों को अपनी सुरक्षा के लिए क्या करना चाहिए?
CERT-In की चेतावनी के मद्देनजर संगठनों को AI एजेंट्स और अपने डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं:
- एक्सेस सीमित करें: AI एजेंट्स को केवल उतनी ही अनुमति दें, जितनी उनके निर्धारित कार्य के लिए जरूरी है।
- क्रेडेंशियल्स सुरक्षित रखें: पासवर्ड, API की और अन्य संवेदनशील प्रमाण-पत्रों को सुरक्षित वॉल्ट में रखें और उन्हें कोड रिपॉजिटरी में उजागर होने से बचाएं।
- क्लाउड परमिशन्स की समीक्षा करें: स्टोरेज, डेटाबेस और अन्य डिजिटल संसाधनों की पहुंच नियमित रूप से जांचें।
- गतिविधियों पर निगरानी रखें: AI एजेंट्स की लॉगिंग और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें, ताकि असामान्य गतिविधियों का समय रहते पता चल सके।
- सुरक्षा परीक्षण करें: सॉफ्टवेयर, CI/CD पाइपलाइन और कॉन्फिगरेशन की नियमित जांच करें तथा कमजोरियों को तुरंत दूर करें।
AI एजेंट्स कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने, जटिल कामों को स्वचालित करने और डेटा का विश्लेषण करने में मदद कर रहे हैं। लेकिन यही तकनीक तब जोखिम पैदा कर सकती है, जब उसे संवेदनशील सिस्टम तक जरूरत से ज्यादा पहुंच मिल जाए या उसकी गतिविधियों की निगरानी कमजोर हो।









