झारखंड के चतरा जिले में बारिश के बीच नदी पार करना एक ग्रामीण के लिए जानलेवा साबित हुआ। मयूरहंड प्रखंड के करकरा गांव निवासी 45 वर्षीय राजकुमार भुइयां मवेशी चराने के लिए नदी के दूसरी ओर गए थे। इसी दौरान नदी के तेज बहाव की चपेट में आने के बाद उनके बह जाने की आशंका जताई गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन तत्काल कोई सुराग नहीं मिल सका। करीब 16 घंटे तक चले खोज अभियान के बाद बुधवार सुबह राजकुमार का शव बरामद किया गया। शव मिलने की खबर के बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में भी मातम का माहौल बन गया।
बताया गया कि राजकुमार भुइयां रोजमर्रा की तरह अपने मवेशियों को चराने के लिए निकले थे। ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर मवेशियों को चराने के लिए नदी, नाला या खेतों के आसपास जाते हैं। बारिश के मौसम में यही रास्ते कई बार बेहद खतरनाक हो जाते हैं। लगातार बारिश के कारण नदी में पानी का बहाव तेज हो जाने से सामान्य दिनों में आसानी से पार किए जाने वाले रास्ते भी जोखिम भरे हो जाते हैं। इसी तरह की परिस्थिति में राजकुमार नदी पार करने के दौरान तेज धार में फंस गए और उनके बह जाने की आशंका जताई गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार और स्थानीय ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। आसपास के लोगों ने अपने स्तर पर नदी और उसके आसपास के इलाके में राजकुमार की तलाश शुरू की। पानी का बहाव तेज होने के कारण खोज अभियान आसान नहीं था। नदी के किनारे और आसपास के संभावित स्थानों पर लोगों ने काफी देर तक तलाश की, लेकिन अंधेरा होने तक राजकुमार का पता नहीं चल सका।
रातभर परिवार के लोग उनके सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए रहे। ग्रामीण भी लगातार जानकारी जुटाते रहे। नदी में तेज बहाव के कारण किसी व्यक्ति के बहने के बाद उसकी तलाश करना बेहद मुश्किल हो जाता है। पानी का बहाव शव या व्यक्ति को घटनास्थल से काफी दूर तक ले जा सकता है। यही वजह रही कि राजकुमार की तलाश में काफी समय लगा।
करीब 16 घंटे बाद बुधवार सुबह राजकुमार का शव बरामद किया गया। शव मिलने की सूचना गांव और परिवार तक पहुंची तो वहां शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों के लिए भी यह घटना बेहद दुखद रही, क्योंकि राजकुमार अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहे थे और मवेशी चराने के लिए निकले थे।
मानसून के दौरान चतरा समेत झारखंड के ग्रामीण इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की समस्या सामने आती रहती है। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में थोड़ी देर की तेज बारिश भी जलधाराओं के बहाव को काफी बढ़ा सकती है। कई छोटे नदी-नाले सामान्य दिनों में कम पानी वाले दिखाई देते हैं, लेकिन बारिश के बाद उनका स्वरूप बदल जाता है। पानी की गति इतनी तेज हो सकती है कि पैदल नदी पार करने की कोशिश बेहद खतरनाक साबित हो।
राजकुमार के साथ हुई घटना भी इसी खतरे की ओर इशारा करती है। ग्रामीणों के लिए नदी या नाला पार करना कई बार रोजमर्रा की मजबूरी होती है। मवेशियों को चराने, खेतों तक पहुंचने या दूसरे गांवों में आने-जाने के लिए लोगों को ऐसे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है। बारिश के दौरान जब जलस्तर बढ़ता है तो यही रास्ते हादसे का कारण बन सकते हैं।
घटना के बाद ग्रामीणों में नदी पार करने को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में नदी के जलस्तर और बहाव का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ऊपर के इलाकों में बारिश होने के बाद नीचे के हिस्से में अचानक पानी बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में नदी के किनारे मौजूद लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
राजकुमार के शव की बरामदगी के बाद परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस दुखद घटना से उबरने की है। अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में भी लोग परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। इस तरह की घटनाएं ग्रामीण इलाकों में मानसून के दौरान सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
बारिश के मौसम में प्रशासन की ओर से आमतौर पर लोगों को उफनती नदियों और जलधाराओं से दूर रहने की सलाह दी जाती है। खासकर जब नदी का पानी पुल या निर्धारित रास्ते के ऊपर से बह रहा हो, तब उसे पैदल या किसी वाहन से पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पानी की गहराई कम दिखाई देने के बावजूद बहाव की ताकत बेहद ज्यादा हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेज बहाव वाली नदी में कुछ ही सेकंड में व्यक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कई जगह पक्के पुल या सुरक्षित आवागमन के साधन उपलब्ध नहीं हैं, वहां जोखिम और बढ़ जाता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रास्तों की व्यवस्था और बारिश के दौरान संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
चतरा की यह घटना केवल एक परिवार के लिए दुखद हादसा नहीं है, बल्कि बारिश के मौसम में ग्रामीण इलाकों में मौजूद जलस्रोतों के बढ़ते खतरे की भी याद दिलाती है। नदी, नाला और छोटी जलधाराएं सामान्य मौसम में भले ही शांत नजर आएं, लेकिन लगातार बारिश के बाद इनके आसपास जाना जोखिम भरा हो सकता है। मवेशी चराने या दूसरे जरूरी काम के लिए नदी पार करने वाले ग्रामीणों को भी जलस्तर और बहाव की स्थिति देखकर ही आगे बढ़ना चाहिए।
राजकुमार भुइयां की तलाश करीब 16 घंटे तक चलने के बाद उनके शव की बरामदगी हुई। घटना से परिवार और गांव में शोक का माहौल है। बारिश के इस मौसम में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ग्रामीणों में जागरूकता, संवेदनशील नदी क्षेत्रों की पहचान और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था बेहद जरूरी है।









