राचित्तौड़गढ़-उदयपुर हाईवे पर श्रद्धालुओं से भरी बस डिवाइडर से टकराकर पलट गई। हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई और करीब 30 लोग घायल हुए हैं। बस तेज रफ्तार में थी और कई यात्री छत पर बैठे थे।
चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़–उदयपुर नेशनल हाईवे पर मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जब श्रद्धालुओं से भरी एक प्राइवेट बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्री घायल हो गए हैं।
यह बस श्रद्धालुओं को चित्तौड़गढ़ से प्रसिद्ध कृष्ण धाम Shri Sanwaliya Seth Temple के दर्शन के लिए ले जा रही थी।
सुबह 5:30 बजे हुआ हादसा, हाईवे पर मची अफरा-तफरी
हादसा मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे भादसोड़ा थाना क्षेत्र के बागुंड के पास हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बस पहले सर्विस रोड पर चल रही थी, लेकिन अचानक चालक ने नियंत्रण खो दिया और वाहन मुख्य हाईवे की ओर बढ़ गया।
तेज रफ्तार के कारण बस ने डिवाइडर, बिजली के खंभे और सुरक्षा रेलिंग को तोड़ते हुए जोरदार टक्कर मारी और फिर पलट गई।
हादसे के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
छत पर बैठे यात्री सड़क पर गिरे, बड़ा हादसा टला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे और कई लोग छत पर बैठे हुए थे।
टक्कर के बाद छत पर बैठे करीब 20 से 25 यात्री सीधे सड़क पर गिर पड़े। सौभाग्य से उस समय पीछे से कोई तेज रफ्तार वाहन नहीं आ रहा था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद शुरू की।

एक श्रद्धालु की मौत, कई राज्यों के यात्री शामिल
इस हादसे में 32 वर्षीय रघुवीर मीणा (नपनिया, छबड़ा, बारां) की मौत हो गई।
बस में सवार यात्री राजस्थान के विभिन्न जिलों जैसे जयपुर, कोटा, बारां, सवाई माधोपुर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी थे।
श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के लिए चित्तौड़गढ़ पहुंचे थे और वहां से सांवलियाजी मंदिर के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे।
घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया
हादसे की सूचना मिलते ही भादसोड़ा पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा।
घायलों को बस से बाहर निकालकर नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और Sanwaliya Government Hospital में भर्ती कराया गया।
गंभीर रूप से घायल 4 से 5 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
यात्रियों का आरोप: बस तेज रफ्तार में चल रही थी
बस में सवार यात्रियों ने चालक पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का आरोप लगाया है।
एक यात्री के अनुसार, बस सर्विस रोड से अचानक मुख्य हाईवे की ओर मुड़ी और तभी वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि बस की रफ्तार नियंत्रित होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
पुलिस जांच में बड़ा खुलासा: बिना परमिट चल रही थी बस
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बस बिना वैध परमिट के संचालित हो रही थी।
सूत्रों के अनुसार, यह बस लंबे समय से चित्तौड़गढ़ और सांवलियाजी के बीच अवैध रूप से चल रही थी।
इसके अलावा, बस में क्षमता से अधिक सवारियां भरी गई थीं और कई यात्री खतरनाक तरीके से छत पर भी बैठे थे।
पुलिस ने बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हाईवे पर घंटों बाधित रहा यातायात
हादसे के बाद हाईवे पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
पुलिस ने क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त बस को सड़क से हटवाया और टूटे हुए बिजली के खंभे व रेलिंग को किनारे किया।
इसके बाद धीरे-धीरे यातायात को फिर से सामान्य किया गया।
प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
नायब तहसीलदार ने अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति की जानकारी ली और इलाज की व्यवस्था का निरीक्षण किया।
स्थानीय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
सड़क सुरक्षा और नियमों पर फिर सवाल
यह हादसा एक बार फिर भारत में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हादसों के पीछे मुख्य कारण हैं:
- ओवरलोडिंग (क्षमता से अधिक यात्री)
- छत पर यात्रा करने की खतरनाक प्रथा
- बिना परमिट और अवैध संचालन
- तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही
- कमजोर निगरानी व्यवस्था
श्रद्धालु यात्राओं में सुरक्षा की चुनौती
भारत में धार्मिक स्थलों की ओर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक होती है। ऐसे में निजी बसों द्वारा बिना उचित अनुमति और सुरक्षा मानकों के संचालन से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि तीर्थ यात्राओं के दौरान परिवहन सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है।










