पांच राज्यों में चुनाव तारीखों के ऐलान के साथ आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब सरकारें केवल प्रशासनिक और जनहित कार्य कर सकती हैं, नई योजनाओं, वित्तीय लाभ या प्रचार में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।
Election 2026: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इन प्रदेशों में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो गई है। जब किसी राज्य में चुनाव की तारीख घोषित होती है, तो राज्य सरकार के कामकाज पर चुनाव आयोग द्वारा नियंत्रण लागू हो जाता है। इसका उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।
आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार किसी नई योजना, वित्तीय लाभ या उद्घाटन की घोषणा नहीं कर सकती। इसके अलावा अधिकारियों को कोई नया निर्देश नहीं दे सकती। राज्य के अधिकारी चुनाव आयोग के अधीन कार्य करते हैं और सभी फैसलों में आयोग की अनुमति अनिवार्य हो जाती है।
सरकारें अब क्या कर सकती हैं
आचार संहिता लागू होने के बाद भी सरकार अपने नियमित प्रशासनिक कार्य कर सकती है। प्रशासनिक कामकाज जैसे कार्यालय संचालन, बजट का नियमित खर्च और जनहित से जुड़े रोज़मर्रा के निर्णय जारी रह सकते हैं।
प्राकृतिक आपदाओं या गंभीर परिस्थितियों में राहत कार्य करना भी जारी रह सकता है। जैसे बाढ़, भूकंप या किसी अन्य आपदा में प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता या राहत सामग्री देना। लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
कानून और व्यवस्था बनाए रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है। पुलिस और सुरक्षा बलों के माध्यम से सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इसके साथ ही प्रशासनिक निर्णय ऐसे होने चाहिए जो चुनाव के निष्पक्षता पर असर न डालें।

सरकार चुनाव से जुड़े किसी भी प्रचार या लाभकारी गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
सरकारें क्या नहीं कर सकती हैं
आचार संहिता लागू होने के बाद राज्य सरकार किसी नई योजना, वित्तीय लाभ या उद्घाटन की घोषणा नहीं कर सकती। अगर कोई योजना पहले से चल रही है, तो उसके प्रचार-प्रसार में भी सावधानी बरती जाती है ताकि किसी दल को राजनीतिक लाभ न मिले।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति पर सीधा नियंत्रण चुनाव आयोग के पास चला जाता है। अधिकारियों के ट्रांसफर या नई तैनाती के लिए आयोग की अनुमति लेना अनिवार्य है। ऐसे कदम उठाना जो चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकें, पूरी तरह निषिद्ध है।
सरकारी विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर भी रोक लग जाती है। चुनाव प्रचार के लिए सरकारी वाहनों, विमानों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी पार्टी अपने सरकारी पदों या संसाधनों का लाभ चुनाव में न उठा सके।
चुनाव में निष्पक्षता सुनिश्चित करना
आदर्श आचार संहिता का मुख्य उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष बनाना है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई पार्टी या उम्मीदवार अपने पद या सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करके चुनाव में लाभ न ले।
चुनाव आयोग की निगरानी में सरकार और अधिकारी केवल प्रशासनिक और जनहित कार्य कर सकते हैं। किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हस्तक्षेप करना प्रतिबंधित है। यह प्रक्रिया मतदाताओं को निष्पक्ष विकल्प चुनने का अवसर देती है।










