CJP का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, 5 सितंबर को दिल्ली में फिर मार्च

कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया है। CJP 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने की तैयारी में है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर छात्रों से जुड़े वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। CJP के मुताबिक चार में से तीन मांगें लंबित हैं। पार्टी 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालेगी।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार पर छात्रों से जुड़ी अपनी मांगों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं करने का आरोप लगाया है। संगठन ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सरकार अधूरे आश्वासन देकर मामले से बच नहीं सकती। CJP के मुताबिक, आंदोलन के दौरान सरकार के सामने रखी गई चार प्रमुख मांगों में से तीन अभी भी लंबित हैं।

संगठन ने कहा है कि लंबित मांगों को लेकर वह 5 सितंबर को दिल्ली में फिर मार्च निकालेगा। यह मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाने की योजना है। CJP ने समर्थकों और आम लोगों से मार्च में शामिल होने की अपील भी की है।

तीन मांगों को लेकर सरकार पर दबाव

CJP के अनुसार, सरकार के सामने रखी गई चार मांगों में से तीन पर अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन की प्रमुख मांगों में उन छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है, जिन्होंने कथित तौर पर NEET परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या की थी।

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और उनके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं करने की मांग भी की गई है। तीसरी लंबित मांग RAF यानी रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों से माफी मांगने की है।

CJP का कहना है कि सरकार की ओर से पहले इन मुद्दों पर आश्वासन दिया गया था, लेकिन संगठन के मुताबिक जमीनी स्तर पर अब तक सभी वादे लागू नहीं हुए हैं। इसी कारण उसने दोबारा आंदोलन का रास्ता चुना है।

5 सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च

CJP के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 5 सितंबर का मार्च इंडिया गेट से शुरू होगा और नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक पहुंचेगा। संगठन के मुताबिक, मार्च में उन छात्रों के परिवार भी शामिल होंगे, जिन्होंने NEET पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी।

पार्टी ने कहा है कि इस मार्च का उद्देश्य सरकार का ध्यान लंबित मांगों की ओर दोबारा आकर्षित करना है। CJP का दावा है कि आंदोलन खत्म करते समय सरकार की ओर से जिन मुद्दों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, उनमें से कई अब भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

24 अगस्त को CJP की वर्किंग कमेटी की वर्चुअल बैठक में दोबारा आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया गया था। संगठन ने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।

CJP ने सरकार को संदेश देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के धैर्य को उनकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।

20 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था आंदोलन

CJP ने NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी मांगों को लेकर 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मामलों में न्याय की मांग उठाई थी।

आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने छात्रों और उनके परिवारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। संगठन का कहना था कि परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर मेहनत करने वाले छात्रों पर पड़ता है।

लगभग एक महीने से अधिक समय तक चले प्रदर्शन के बाद 25 जुलाई को CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी। संगठन के अनुसार, यह फैसला सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद लिया गया था।

25 जुलाई को सरकार के प्रतिनिधियों से हुई थी मुलाकात

CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। संगठन के मुताबिक, इस बैठक में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच उनकी मांगों को लेकर सहमति बनी थी।

CJP ने उस समय सरकार के आश्वासन को देखते हुए अपना आंदोलन स्थगित किया था। हालांकि, अब संगठन का आरोप है कि तय किए गए मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

इसी वजह से पार्टी ने दोबारा सड़क पर उतरने का फैसला किया है। 5 सितंबर का मार्च इस आंदोलन का अगला चरण होगा।

CJP का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, 5 सितंबर को दिल्ली में फिर मार्च

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुआ था विवाद

CJP ने इससे पहले 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। संगठन के अनुसार, इस मार्च की पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया।

इस दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद हुआ था। CJP ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और लाठीचार्ज किया गया। संगठन ने इस कार्रवाई को लेकर भी जवाबदेही की मांग उठाई थी।

पुलिस कार्रवाई का मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी गठित करने का फैसला हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने बनाई पांच सदस्यीय जांच कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त को संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी के सदस्यों के नाम घोषित किए थे।

इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी गई है। कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा और दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शलिंदर कौर को भी शामिल किया गया है।

इसके अलावा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक डॉ. एलआर बिश्नोई भी जांच पैनल का हिस्सा हैं।

कमेटी का गठन प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र समीक्षा के लिए किया गया है। जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्ष इस पूरे विवाद में आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पुलिस कार्रवाई और लंबित मामलों पर CJP की नजर

CJP का कहना है कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को केवल आश्वासन के स्तर पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। संगठन चाहता है कि जिन लोगों के खिलाफ आंदोलन के दौरान मामले दर्ज किए गए हैं, उनके मामलों पर सरकार स्पष्ट निर्णय ले।

FIR वापस लेने की मांग के साथ संगठन पुलिस और RAF की कार्रवाई के लिए माफी की मांग भी कर रहा है। CJP का तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और उनके परिवारों के साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए।

हालांकि, पुलिस और प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों तथा CJP के दावों के बीच कई मुद्दों पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।

5 सितंबर का मार्च क्यों अहम है?

CJP का नया मार्च ऐसे समय हो रहा है जब संगठन सरकार पर अपने पहले के आश्वासन पूरे करने का दबाव बढ़ाना चाहता है। इससे छात्र आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक विवाद के फिर तेज होने की संभावना है।

मार्च में छात्रों के परिवारों की भागीदारी इसे भावनात्मक और सामाजिक मुद्दे का रूप दे सकती है। वहीं दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च का प्रस्ताव पुलिस कार्रवाई और FIR से जुड़े सवालों को भी केंद्र में रखेगा।

CJP ने साफ किया है कि वह अपनी लंबित मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। संगठन का कहना है कि सरकार को दिए गए आश्वासनों को लागू करना होगा और छात्रों से जुड़े मामलों में ठोस कार्रवाई करनी होगी।

फिलहाल 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च पर सभी की नजर रहेगी। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था, मार्च की अनुमति और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। CJP के आंदोलन की अगली रणनीति सरकार की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट की जांच प्रक्रिया के आगे बढ़ने पर भी निर्भर कर सकती है।

 

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