CJP कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड दी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें भी दी हैं।
नई दिल्ली: CJP कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था और शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट में वर्चुअली पेश किया गया। अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया।
स्वतंत्र की गिरफ्तारी से एक दिन पहले CJP के नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की गई थी। पुलिस ने कथित तौर पर 72 घंटे के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
इसी बीच शनिवार को स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ कार्यकर्ता भी पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। पुलिस ने इस दौरान नीशू आजाद और उनके पिता के खिलाफ भी लिखित शिकायत प्राप्त की है। ऐसे में यह मामला अब दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों के बीच आगे बढ़ रहा है।
23 जून को जंतर-मंतर पर हुई थी घटना
यह मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस प्रदर्शन के दौरान CJP कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता संजय कुमार घायल हुए थे।
घटना के बाद संजय ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। नीशू आजाद का आरोप है कि उनके पिता के सिर पर हमला किया गया और घटना के बाद लंबे समय तक पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घटना के बाद संजय कुमार को मंच पर बुलाकर उनसे बातचीत भी की थी। इसके बाद मामला संगठन के समर्थकों के बीच प्रमुख मुद्दा बन गया।
CJP ने गिरफ्तारी की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
4 सितंबर को CJP नेताओं और समर्थकों ने संजय कुमार और नीशू आजाद के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान नीशू आजाद की ओर से वकील ऋषव रंजन ने पुलिस से मामले में हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून यानी SC/ST Act की संबंधित धाराएं जोड़ने की मांग की।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ीं। इसी घटनाक्रम के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई।
पुलिस ने बाद में उन्हें गिरफ्तार किया और शनिवार को अदालत के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने जांच के लिए एक दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की।
स्वतंत्र भारद्वाज ने क्या दावा किया?
मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने एक वायरल पॉडकास्ट में कथित तौर पर दावा किया था कि उन्होंने संजय कुमार के सिर पर हमला किया था और इस दौरान उन्हें 60 टांके लगे थे। उन्होंने यह भी कहा था कि इस घटना के बाद उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा।
हालांकि, बाद में भारद्वाज ने अपने पहले के बयान से अलग रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि घटना हमला नहीं बल्कि सेल्फ-डिफेंस में की गई कार्रवाई थी।
भारद्वाज के मुताबिक, उन्हें करीब 10 से 15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया करनी पड़ी। उनका दावा था कि यदि उन्होंने बचाव में कार्रवाई नहीं की होती तो भीड़ उन्हें नुकसान पहुंचा सकती थी।
इन दावों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।
दिल्ली पुलिस ने चोट को लेकर क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने संजय कुमार की चोट को लेकर अलग जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक, 23 जून की घटना में संजय के सिर पर एक कड़े या ब्रेसलेट जैसी वस्तु लगने से चोट आई थी।
पुलिस ने बताया कि संजय को चिकित्सा जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) ले जाया गया था। वहां तैयार किए गए मेडिको-लीगल केस यानी MLC में चोट को साधारण बताया गया था।
पुलिस ने खोपड़ी फटने या फ्रैक्चर से संबंधित दावे को भी गलत बताया है। हालांकि, पीड़ित पक्ष ने घटना को गंभीर बताते हुए पुलिस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।
इस तरह चोट की प्रकृति और घटना की परिस्थितियों को लेकर पीड़ित पक्ष, आरोपी और पुलिस के बयानों में अंतर दिखाई देता है।
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पहले पूछताछ के बाद छोड़ा गया था
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को पहले पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था।
बाद में मामले में कार्रवाई और धाराओं को लेकर विवाद बढ़ा। CJP की ओर से गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया गया। इसके बाद पुलिस ने स्वतंत्र को दोबारा हिरासत में लिया और अब उन्हें गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया गया है।
पुलिस रिमांड मिलने के बाद जांच एजेंसी के पास आरोपी से घटना की परिस्थितियों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर पूछताछ करने का अवसर होगा।
5 सितंबर को स्वतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद शनिवार को उनके समर्थन में हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर पहुंचे।
यह प्रदर्शन दक्ष चौधरी की ओर से बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र के पक्ष में नारे लगाए और मामले में कार्रवाई पर सवाल उठाए।
पुलिस ने इस दौरान नीशू आजाद और उनके पिता के खिलाफ भी लिखित शिकायत प्राप्त की है। इसका मतलब है कि अब मामले में दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
किस शिकायत पर क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी, यह पुलिस की जांच और संबंधित आरोपों की कानूनी समीक्षा पर निर्भर करेगा।
पिछले दो दिनों में तेजी से बदला घटनाक्रम
इस मामले में 4 और 5 सितंबर को घटनाक्रम तेजी से बदला। 4 सितंबर को CJP समर्थकों ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद स्वतंत्र को हिरासत में लिया गया।
5 सितंबर को स्वतंत्र को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड मिली। इसी दिन उनके समर्थन में दूसरे समूह ने भी पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया और नीशू आजाद तथा उनके पिता के खिलाफ शिकायत दी।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि मामला अब केवल एक कथित मारपीट की घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दोनों पक्षों के समर्थकों के सार्वजनिक प्रदर्शन और अलग-अलग शिकायतों के कारण इसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी बढ़ रहा है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
पुलिस जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर होंगे। यह पता लगाना होगा कि 23 जून को जंतर-मंतर पर वास्तव में क्या हुआ, विवाद किस वजह से शुरू हुआ और संजय कुमार को चोट किस तरह लगी।
इसके साथ ही पुलिस को दोनों पक्षों के बयानों, मेडिकल रिकॉर्ड, मौके से जुड़े साक्ष्यों और उपलब्ध अन्य सामग्री की जांच करनी होगी। आरोपी की ओर से किए गए सेल्फ-डिफेंस के दावे की भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
दूसरी ओर, पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की कानूनी स्थिति भी जांच के बाद स्पष्ट होगी।
अदालत की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
स्वतंत्र भारद्वाज को फिलहाल एक दिन की पुलिस रिमांड मिली है। इसके बाद पुलिस को जांच की प्रगति के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
मामले में आरोप लगना और किसी व्यक्ति का दोषी साबित होना दो अलग-अलग कानूनी चरण हैं। अंतिम जिम्मेदारी अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
फिलहाल दिल्ली पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। स्वतंत्र की गिरफ्तारी और पुलिस रिमांड के बाद यह मामला अगले चरण में पहुंच गया है, जबकि दोनों पक्षों की शिकायतों से जुड़े घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है।










