दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘चलो यमुना अभियान’ के तहत आईटीओ स्थित हाथी घाट पर सफाई अभियान में श्रमदान किया। उन्होंने लोगों से पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य कचरा नदी में न डालने की अपील की।
नई दिल्ली: दिल्ली में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ‘चलो यमुना अभियान’ के तहत सफाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईटीओ स्थित हाथी घाट पर पहुंचकर स्वच्छता अभियान में श्रमदान किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों, युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर घाट की सफाई में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने लोगों से यमुना के घाटों और नदी के किनारों को साफ रखने तथा कचरा नदी में नहीं डालने की अपील की।
इस अभियान में दिल्ली विधानसभा के मुख्य सचेतक एवं विधायक अभय वर्मा सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल घाटों से कचरा हटाना नहीं, बल्कि नागरिकों में ऐसी आदतें विकसित करना भी था, जिनसे नदी में प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके।
दिल्ली के 70 यमुना घाटों पर चला स्वच्छता अभियान
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली के 70 यमुना घाटों पर हजारों लोगों ने एक साथ सफाई अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने इसे जनभागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए कहा कि नदी को स्वच्छ बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
उनके अनुसार, यमुना के प्रति श्रद्धा को सेवा और जिम्मेदारी में बदलना समय की आवश्यकता है। नदी की सफाई केवल सरकारी विभागों या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। स्थानीय निवासियों, धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
अभियान के दौरान लोगों को नदी के किनारे साफ रखने, पूजा से जुड़ी सामग्री का उचित निपटान करने और प्लास्टिक कचरे को जलस्रोतों तक पहुंचने से रोकने के प्रति जागरूक किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के प्रयासों को नियमित गतिविधि बनाना जरूरी है, ताकि सफाई का प्रभाव लंबे समय तक कायम रह सके।
मुख्यमंत्री ने की प्लास्टिक और पूजा सामग्री नदी में नहीं डालने की अपील
रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे यमुना के घाटों और किनारों पर प्लास्टिक, पूजा सामग्री तथा अन्य प्रकार का कचरा न छोड़ें। उन्होंने लोगों से दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करने और नदी की सुरक्षा में भागीदार बनने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने ‘यमुना प्रहरी’ बनने का संदेश देते हुए कहा कि स्वच्छता को केवल किसी विशेष अभियान या आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना आवश्यक है।
उन्होंने धार्मिक आस्था से जुड़े कचरे के उचित प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया। उनके मुताबिक, लोग पूजा के बाद भगवानों के वस्त्र, खंडित मूर्तियां और अन्य पूजन अवशेष नदी में प्रवाहित करने के लिए घाटों पर छोड़ देते हैं। इससे नदी और उसके आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ सकता है।
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए ऐसी सामग्री के निपटान के लिए स्वच्छ और उचित विकल्प अपनाएं। इससे आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
स्वच्छता को जीवनशैली बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता केवल सफाई अभियान चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का तरीका होना चाहिए। जब तक लोग अपने दैनिक व्यवहार में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक नदियों और सार्वजनिक स्थानों को लंबे समय तक साफ रखना मुश्किल होगा।
हाथी घाट पर सफाई के दौरान धार्मिक वस्त्र, खंडित मूर्तियां और पूजन सामग्री जैसे अवशेष दिखाई देने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री का अनुचित निपटान यमुना की स्वच्छता के लिए चुनौती पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह समझने की जरूरत है कि नदी में डाला गया कचरा केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहता। वह पानी की गुणवत्ता, नदी के किनारों और आसपास के पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए कचरे को उचित स्थान पर डालना और धार्मिक अवशेषों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अपनाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यमुना के प्रदूषण के कई कारण हैं और सरकार उन पर काम कर रही है। उन्होंने विभिन्न संस्थाओं से भी इस दिशा में सहयोग करने का आह्वान किया।
यमुना प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार और संस्थाओं की भूमिका
यमुना की सफाई दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती है। नदी में प्रदूषण को कम करने के लिए केवल घाटों की सफाई पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए कचरा प्रबंधन, सीवेज के उचित उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण और लोगों की भागीदारी जैसे कई पहलुओं पर लगातार काम करने की जरूरत होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदूषण से जुड़े विभिन्न कारणों पर कार्रवाई कर रही है और संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नियमों के उल्लंघन और नदी को दूषित करने वाली गतिविधियों से निपटने के लिए सख्ती बरती जा रही है।
हालांकि, अभियान के दौरान सफाई में मिली भागीदारी को दीर्घकालिक परिणामों में बदलने के लिए नियमित निगरानी और प्रभावी कचरा प्रबंधन व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। नदी में जाने वाले प्रदूषकों को स्रोत पर रोकना और नागरिकों को वैकल्पिक निपटान सुविधाएं उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
इस संदर्भ में सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और नागरिक समूहों के बीच समन्वय अहम भूमिका निभा सकता है।
युवाओं और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण
हाथी घाट पर आयोजित कार्यक्रम में युवाओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी ने सामुदायिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया। नदी की सफाई जैसे अभियानों में स्थानीय लोगों की सहभागिता से न केवल कचरा हटाने में मदद मिलती है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है।
युवा वर्ग जागरूकता अभियान, स्वच्छता गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी तरह, धार्मिक संस्थाएं लोगों को पूजा सामग्री के उचित निपटान के बारे में जागरूक कर सकती हैं।
यदि घाटों पर कचरा एकत्र करने की नियमित व्यवस्था हो और नागरिकों को उसका सही उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए, तो नदी में कचरा जाने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
‘यमुना प्रहरी’ बनकर नदी को स्वच्छ रखने का संदेश
रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे यमुना की स्वच्छता को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी समझें। उन्होंने कहा कि नदी को साफ रखने का संकल्प केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए लोगों को अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा और दूसरों को भी प्रेरित करना होगा।
‘चलो यमुना अभियान’ के तहत 70 घाटों पर आयोजित सफाई गतिविधियों ने नदी संरक्षण के लिए जनभागीदारी का संदेश दिया। हालांकि, यमुना को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऐसे अभियानों के साथ प्रदूषण के मूल कारणों पर लगातार कार्रवाई करना भी जरूरी है।
नदी की सफाई, अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक जागरूकता के संयुक्त प्रयास ही लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकते हैं। मुख्यमंत्री की अपील का मुख्य संदेश यही रहा कि यमुना के प्रति श्रद्धा को उसकी स्वच्छता और संरक्षण की जिम्मेदारी के रूप में अपनाया जाए।










