उत्तराखंड के प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियों ने फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। साढ़े तीन महीने के इंतजार के बाद पार्क का बिजरानी जोन पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। लंबे समय से जंगल सफारी का इंतजार कर रहे सैलानियों के लिए यह खास मौका रहा। जोन खुलने पर पर्यटकों को मिठाई खिलाकर सफारी के लिए रवाना किया गया। जंगल के प्राकृतिक वातावरण, वन्यजीवों और रोमांचक सफर की उम्मीद लेकर पहुंचे पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
कॉर्बेट पार्क उत्तराखंड के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को घने जंगल, प्राकृतिक जलस्रोत, वन्यजीवों के आवास और विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देखने का अवसर मिलता है। बिजरानी जोन भी सफारी के लिए लोकप्रिय क्षेत्रों में गिना जाता है। इसके खुलने से पर्यटकों को एक बार फिर इस क्षेत्र में जंगल घूमने का अवसर मिलने लगा है।
इस बार बिजरानी जोन को मानसून के दौरान 30 जून से बंद किया गया था। बरसात के मौसम में जंगल के कच्चे रास्तों पर सफर मुश्किल हो जाता है और कई स्थानों पर बारिश के कारण सड़कें प्रभावित हो सकती हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए सफारी पर रोक लगाई जाती है। मानसून के बाद रास्तों की स्थिति और जरूरी तैयारियों का आकलन करके पर्यटन जोन को दोबारा खोला जाता है।
बिजरानी जोन का उद्घाटन गुरुवार सुबह करीब छह बजे आमडंडा गेट पर किया गया। स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने हरी झंडी दिखाकर पर्यटकों की जिप्सियों को रवाना किया। इस दौरान सैलानियों का मुंह मीठा भी कराया गया। लंबे अंतराल के बाद सफारी शुरू होने से पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में भी उत्साह दिखाई दिया।जोन में सफारी की व्यवस्था सुबह और शाम की दो पालियों में की जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रत्येक पाली में 30 जिप्सियों को प्रवेश की अनुमति है, यानी सामान्य व्यवस्था के तहत एक दिन में 60 जिप्सियों से सफारी कराई जा सकती है। जोन खुलने के पहले दिन दोनों पालियों की बुकिंग पूरी होने की खबर भी सामने आई। इससे पर्यटकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बिजरानी के साथ रामनगर वन प्रभाग का सीतावनी पर्यटन जोन भी पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। इन दोनों क्षेत्रों में सफारी शुरू होने से रामनगर आने वाले पर्यटकों के पास जंगल घूमने के और विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। हालांकि, रामनगर वन प्रभाग के भंडारपानी और कालाढूंगी जोन में सफारी शुरू करने के लिए पर्यटकों को अभी इंतजार करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भंडारपानी में बारिश के कारण कच्चे रास्ते पर कीचड़ है, जबकि कालाढूंगी जोन में दाबका नदी का जलस्तर बढ़ने से सफारी फिलहाल बंद रखी गई है।
कॉर्बेट के कुछ पर्यटन जोन ऐसे भी हैं, जहां सालभर डे सफारी की सुविधा उपलब्ध रहती है। इनमें ढेला और झिरना शामिल हैं, हालांकि मौसम और रास्तों की सुरक्षा के आधार पर संचालन प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, बिजरानी जैसे जोन मानसून के दौरान निर्धारित अवधि के लिए बंद रहते हैं। पर्यटकों को सफारी पर जाने से पहले संबंधित जोन की उपलब्धता और बुकिंग की जानकारी लेना जरूरी है।
बिजरानी जोन के दोबारा खुलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलने की उम्मीद है। रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में जंगल सफारी से जिप्सी चालक, वाहन मालिक, गाइड, होटल-रिसॉर्ट संचालक और स्थानीय दुकानदारों की आजीविका जुड़ी हुई है। मानसून के दौरान कुछ पर्यटन गतिविधियां सीमित होने से इन लोगों के काम पर असर पड़ता है। सफारी फिर शुरू होने के बाद पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से कारोबार को गति मिल सकती है। स्थानीय पर्यटन से जुड़े लोगों को उम्मीद रहती है कि छुट्टियों और सप्ताहांत में आने वाले सैलानियों से उनकी आमदनी बेहतर होगी।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की पहचान बाघों के साथ-साथ हाथियों, हिरणों, तेंदुओं और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए भी है। जंगल सफारी में वन्यजीवों को देखना पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव हो सकता है, लेकिन किसी भी वन्यजीव के दिखने की गारंटी नहीं होती। जंगल में वन्यजीवों की गतिविधियां प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। इसलिए सफारी के दौरान गाइड और वन विभाग के कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना, निर्धारित रास्ते पर रहना और जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।
कुल मिलाकर, साढ़े तीन महीने बाद बिजरानी जोन का खुलना कॉर्बेट क्षेत्र में पर्यटन सीजन की शुरुआत का महत्वपूर्ण संकेत है। सीतावनी जोन भी खुल चुका है, जबकि भंडारपानी और कालाढूंगी में रास्तों और नदी की स्थिति के कारण फिलहाल सफारी शुरू नहीं हुई है। अब पर्यटकों की नजर आने वाले दिनों में सफारी की उपलब्धता और जंगल में वन्यजीवों के रोमांचक दीदार पर रहेगी।









