रोनाल्डो को पुर्तगाल का ट्रेनिंग कैंप छोड़ने के मामले में 30 दिन का प्रतिबंध और €255 का जुर्माना लगाया गया है। सजा 1 अक्टूबर से लागू मानी गई है, इसलिए वह नवंबर के अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए उपलब्ध रह सकते हैं।
स्पोर्ट्स न्यूज़: पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो को राष्ट्रीय टीम का ट्रेनिंग कैंप छोड़ने के मामले में 30 दिन के प्रतिबंध और 255 यूरो के जुर्माने का सामना करना पड़ा है। पुर्तगाली फुटबॉल फेडरेशन (FPF) की अनुशासन समिति ने यह फैसला लिया। भारतीय मुद्रा में जुर्माने की राशि करीब 27 हजार रुपये बैठती है।
41 वर्षीय रोनाल्डो ने 30 सितंबर को डेनमार्क के कोपेनहेगन में चल रहा राष्ट्रीय टीम का कैंप छोड़ दिया था। यह घटना कोच जॉर्ज जीसस के साथ उनके कथित विवाद के बाद हुई। रोनाल्डो को नॉर्वे के खिलाफ मुकाबले में मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला था, जिससे वह नाराज थे। इसके बाद उन्होंने डेनमार्क के खिलाफ मैच से पहले टीम का साथ छोड़ दिया।
फेडरेशन ने इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी। 19 अक्टूबर को घोषित फैसले में रोनाल्डो को नियमों के उल्लंघन का दोषी माना गया। हालांकि, प्रतिबंध की अवधि 1 अक्टूबर से गिने जाने के कारण वह इसका बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा कर चुके हैं। इसलिए यह सजा उन्हें नवंबर में पुर्तगाल के आगामी मुकाबलों से बाहर नहीं करती। स्रोत: AFP
कोच जॉर्ज जीसस से क्यों नाराज हुए रोनाल्डो?
विवाद की शुरुआत नॉर्वे के खिलाफ पुर्तगाल के मैच के दौरान हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, रोनाल्डो को उम्मीद थी कि उन्हें मुकाबले में खेलने का अवसर मिलेगा। उनका दावा था कि कोच जॉर्ज जीसस ने उन्हें लगभग 30 मिनट मैदान पर उतारने का भरोसा दिया था।
मैच के दौरान रोनाल्डो ने वॉर्म-अप भी किया, लेकिन अंततः उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। इस फैसले से वह निराश हो गए। उनका आरोप था कि कोच ने खेलने के समय को लेकर पहले किए गए वादे का पालन नहीं किया।
रोनाल्डो ने यह भी दावा किया कि कोच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, जॉर्ज जीसस ने पहले किसी निश्चित समय तक रोनाल्डो को खिलाने का समझौता होने से इनकार किया था।
इस विवाद के बाद रोनाल्डो ने डेनमार्क के खिलाफ मैच से पहले टीम का ट्रेनिंग कैंप छोड़ दिया। फेडरेशन ने इसे अनुशासन का उल्लंघन माना और मामले की जांच शुरू की। स्रोत: यूरोन्यूज
फेडरेशन ने किस आधार पर सजा दी?
पुर्तगाली फुटबॉल फेडरेशन की अनुशासन समिति ने रोनाल्डो को नियमों के तहत दोषी ठहराया। रिपोर्टों के अनुसार, फेडरेशन के अनुशासन नियमों में राष्ट्रीय टीम के ट्रेनिंग कैंप या अन्य निर्धारित गतिविधियों को बिना उचित कारण छोड़ने पर एक से छह महीने तक का प्रतिबंध और जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
रोनाल्डो को 30 दिन का प्रतिबंध मिला, जो इस नियम के तहत न्यूनतम अवधि है। इसके अतिरिक्त, उन्हें 255 यूरो का आर्थिक दंड भी देना होगा। फैसले में रोनाल्डो के पिछले अनुशासन रिकॉर्ड, फुटबॉल में उनके योगदान और घटना के बाद उनके व्यवहार को ध्यान में रखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, फेडरेशन ने उनके सार्वजनिक माफीनामे और अपनी गलती स्वीकार करने को भी राहत देने वाले पहलुओं में शामिल किया।
रोनाल्डो ने पहले कहा था कि राष्ट्रीय टीम छोड़ने के उनके फैसले के परिणाम उन्हें स्वीकार हैं। उनका कहना था कि एक वरिष्ठ खिलाड़ी और टीम के कप्तान होने के कारण उन्हें अपने व्यवहार के लिए जवाबदेह होना चाहिए।
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रोनाल्डो ने समर्थकों और साथियों से मांगी माफी
घटना के बाद रोनाल्डो ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि टीम का कैंप छोड़ना उचित कदम नहीं था और इसके लिए उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
रोनाल्डो ने यह भी माना कि नॉर्वे के खिलाफ मैच के बाद समर्थकों का अभिवादन नहीं करना और टीम के साथियों को छोड़कर चले जाना गलत था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने का अवसर उनके लिए महत्वपूर्ण है और वह सजा स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
उनके इस रुख ने फेडरेशन के सामने अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू रखा। इसके बावजूद समिति ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ी की प्रतिष्ठा या उपलब्धियां उसे नियमों से ऊपर नहीं रखतीं। रोनाल्डो पुर्तगाल के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी हैं और उन्होंने राष्ट्रीय टीम के साथ कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके बावजूद, इस मामले में फेडरेशन ने टीम अनुशासन को प्राथमिकता दी।
नवंबर में पुर्तगाल के मैच खेल सकते हैं रोनाल्डो
30 दिन के प्रतिबंध की घोषणा के बाद यह सवाल उठा कि क्या रोनाल्डो पुर्तगाल के अगले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से बाहर रहेंगे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सजा 1 अक्टूबर से प्रभावी मानी गई है। इसका अर्थ है कि प्रतिबंध की अवधि का बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है।
पुर्तगाल को 14 नवंबर को डेनमार्क और 17 नवंबर को वेल्स के खिलाफ नेशंस लीग के मुकाबले खेलने हैं। मौजूदा जानकारी के अनुसार, रोनाल्डो इन मैचों के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि, टीम में उनका चयन कोच के फैसले और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
इसलिए 30 दिन के प्रतिबंध को नवंबर के मैचों से स्वतः बाहर किए जाने के रूप में समझना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से ट्रेनिंग कैंप छोड़ने के मामले में दी गई अनुशासनात्मक सजा है, जिसका अधिकांश हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है।
पुर्तगाल की टीम में रोनाल्डो की भूमिका पर नजर
इस विवाद ने पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम में रोनाल्डो की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। 41 वर्ष की उम्र में भी वह टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं, लेकिन कोच के साथ खेलने के समय को लेकर मतभेद ने उनके भविष्य की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
टीम के लिए यह जरूरी होगा कि अनुशासन बनाए रखते हुए खिलाड़ियों और कोच के बीच संवाद भी कायम रहे। रोनाल्डो की वापसी से टीम को अनुभव मिल सकता है, लेकिन अंतिम फैसला कोच और टीम प्रबंधन को करना होगा।
फिलहाल फेडरेशन की कार्रवाई से यह संदेश गया है कि राष्ट्रीय टीम के नियम सभी खिलाड़ियों पर लागू होते हैं। रोनाल्डो ने सजा स्वीकार करने की बात कही है और पुर्तगाल के लिए खेलने की अपनी इच्छा भी जताई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कोच जॉर्ज जीसस और रोनाल्डो के बीच मतभेद किस तरह सुलझते हैं और क्या स्टार फॉरवर्ड नवंबर के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में टीम की ओर से मैदान पर उतरते हैं।








