भारत के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल Central Reserve Police Force (CRPF) में बुधवार को आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद 46 प्रशिक्षु अधिकारियों को सहायक कमांडेंट (Assistant Commandant) के रूप में नियुक्त किया गया।
नई दिल्ली: Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) में बुधवार को पासिंग आउट परेड के बाद 46 प्रशिक्षु अधिकारियों को सहायक कमांडेंट के रूप में नियुक्त किया गया, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। यह परेड हरियाणा के कादरपुर (गुरुग्राम) स्थित सीआरपीएफ अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में आयोजित की गई।
इस मौके पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Bandi Sanjay Kumar ने परेड की सलामी ली और नव नियुक्त अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे देश के चुनौतीपूर्ण आंतरिक सुरक्षा क्षेत्रों में तैनात जवानों को मजबूत नेतृत्व प्रदान करें और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाएं।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने ली परेड की सलामी
यह भव्य समारोह हरियाणा के गुरुग्राम स्थित कादरपुर गांव में सीआरपीएफ अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Bandi Sanjay Kumar ने परेड की सलामी ली और नए अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने अधिकारियों से देश के चुनौतीपूर्ण आंतरिक सुरक्षा क्षेत्रों में कार्यरत जवानों का नेतृत्व दृढ़ता और ईमानदारी से करने का आह्वान किया।
सीआरपीएफ के “डायरेक्ट अपॉइंटेड गजेटेड ऑफिसर्स” (DAGO) के 56वें बैच के इन प्रशिक्षुओं ने 52 सप्ताह का गहन प्रशिक्षण पूरा किया। इस प्रशिक्षण में शामिल था:
- युद्धक रणनीतियां
- प्रशासनिक कौशल
- नेतृत्व क्षमता का विकास
- फील्ड ऑपरेशंस की तैयारी
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अब इन अधिकारियों को सहायक कमांडेंट का पहला रैंक प्रदान किया गया है।
देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभाशाली युवा
इस बैच में शामिल अधिकारी भारत के 14 राज्यों से आते हैं, जो देश की विविधता को दर्शाता है। शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो:
- 19 अधिकारी बीटेक डिग्री धारक हैं
- 11 ने पोस्टग्रेजुएशन किया है
- 16 स्नातक हैं
यह आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक सुरक्षा बलों में तकनीकी और उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
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‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित हुए खेसितो योखा
इस परेड में नागालैंड के कोहिमा से आने वाले Khesito Yokha को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु घोषित किया गया। उन्हें प्रतिष्ठित “स्वॉर्ड ऑफ ऑनर” और गृह मंत्री कप से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान कई अन्य पुरस्कार भी अपने नाम किए, जो उनकी उत्कृष्ट प्रदर्शन क्षमता को दर्शाता है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन नए सहायक कमांडेंट्स को जल्द ही देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से तीन प्रमुख ऑपरेशनल जोन शामिल हैं:
- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान
- पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी कार्य
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान
इन क्षेत्रों में नेतृत्व करना नए अधिकारियों के लिए बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती दोनों होगी।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
इस बैच में दो महिला अधिकारियों की मौजूदगी सुरक्षा बलों में लैंगिक समानता की दिशा में सकारात्मक संकेत है। हाल के वर्षों में भारतीय सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है, जो बदलते सामाजिक और संस्थागत दृष्टिकोण को दर्शाता है। लगभग 3.25 लाख कर्मियों के साथ सीआरपीएफ देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा बल है।
इसकी स्थापना 1939 में ब्रिटिश शासन के दौरान “क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस” के रूप में हुई थी, जिसे 1949 में वर्तमान नाम दिया गया। आज यह बल आतंकवाद विरोधी अभियानों, चुनावी सुरक्षा, दंगा नियंत्रण और नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने नए अधिकारियों से अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ करने की अपील की।








