झारखंड के दलमा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई को तेज करते हुए छह वांछित नक्सलियों के पोस्टर लगाए हैं। इनमें एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली असीम मंडल का नाम भी शामिल है। पुलिस और सुरक्षा बल लंबे समय से असीम मंडल की तलाश में जुटे हैं। अब दलमा के आसपास के ग्रामीण इलाकों में पोस्टर लगाकर लोगों से इन नक्सलियों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने की अपील की गई है।
दलमा का इलाका घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जंगल और दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर नक्सली गतिविधियों से जुड़े लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवाजाही कर सकते हैं। ऐसे में पुलिस ग्रामीणों के सहयोग से संदिग्ध गतिविधियों और वांछित नक्सलियों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
दलमा क्षेत्र में लगाए गए पोस्टरों में छह नक्सलियों के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की गई है। इनमें सबसे प्रमुख नाम असीम मंडल का बताया जा रहा है, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस के लिए उसकी गिरफ्तारी लंबे समय से प्राथमिकता में रही है। सुरक्षा एजेंसियां उसके संभावित ठिकानों और आवाजाही से जुड़े इनपुट जुटाने में लगी हुई हैं।
पोस्टर लगाने का उद्देश्य ग्रामीणों तक वांछित नक्सलियों की पहचान पहुंचाना और उनके बारे में सूचना प्राप्त करना है। पुलिस का मानना है कि जंगल और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को क्षेत्र में आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी हो सकती है। इसलिए ग्रामीणों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी वांछित नक्सली या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।
पुलिस की ओर से लोगों को यह भरोसा भी दिलाया जाता है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्थानीय लोगों का सहयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग जंगल के रास्तों और स्थानीय परिस्थितियों से बेहतर परिचित होते हैं।
दलमा क्षेत्र में पोस्टर लगाए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। पुलिस और सुरक्षा बल जंगल के आसपास आने-जाने वाले रास्तों पर नजर रख सकते हैं। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा सकता है।
असीम मंडल पर एक करोड़ रुपये का इनाम होने से यह स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियां उसे अत्यंत महत्वपूर्ण वांछित नक्सली मानती हैं। उसके खिलाफ दर्ज मामलों और कथित नक्सली गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में मौजूद हो सकती है। हालांकि उसके खिलाफ लगे आरोपों और मामलों की विस्तृत जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
पुलिस की कोशिश है कि पोस्टर के जरिए लोगों को यह जानकारी दी जाए कि किन लोगों की तलाश की जा रही है। ग्रामीण यदि किसी पोस्टर में दिखाई गई पहचान से मिलते-जुलते व्यक्ति को देखते हैं तो खुद उससे संपर्क करने के बजाय पुलिस को सूचना देने की अपील की गई है। इससे ग्रामीणों की सुरक्षा भी बनी रहेगी और पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
दलमा के जंगलों में नक्सल गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर अभियान चलाती रही हैं। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा बलों को अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। जंगल में तलाशी अभियान के दौरान स्थानीय रास्तों और संभावित ठिकानों की जानकारी महत्वपूर्ण होती है।
छह नक्सलियों के पोस्टर लगाए जाने के बाद पुलिस ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना तंत्र को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा सकते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग वांछित लोगों की पहचान से परिचित हो सकें।
पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जंगल के दुर्गम इलाकों में संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जाए। सुरक्षा बलों को कई बार लंबी दूरी तक पैदल गश्त करनी पड़ती है। मौसम और जंगल की भौगोलिक परिस्थितियां भी अभियान को प्रभावित कर सकती हैं।
ग्रामीणों से सूचना देने की अपील इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। पुलिस चाहती है कि यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से जंगल में आता-जाता दिखाई दे या किसी वांछित व्यक्ति के बारे में जानकारी मिले तो समय रहते इसकी सूचना दी जाए। ऐसी सूचनाएं सुरक्षा बलों के लिए अभियान की दिशा तय करने में मददगार हो सकती हैं।
असीम मंडल समेत अन्य वांछित नक्सलियों की तलाश में पुलिस तकनीकी और स्थानीय दोनों तरह के इनपुट का इस्तेमाल कर सकती है। मोबाइल नेटवर्क, संदिग्ध संपर्क और क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों से जुड़े इनपुट की जांच की जा सकती है। हालांकि अभियान से संबंधित कई जानकारियां सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की जाती हैं।
दलमा के आसपास के गांवों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ने से सुरक्षा को लेकर भी निगरानी मजबूत हो सकती है। पुलिस ग्रामीणों से संपर्क कर उनकी समस्याओं और क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों के बारे में जानकारी ले सकती है। ग्रामीणों का भरोसा बनाए रखना ऐसे अभियानों में महत्वपूर्ण माना जाता है।
सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य केवल वांछित नक्सलियों को पकड़ना नहीं बल्कि क्षेत्र में सामान्य माहौल और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना भी है। जंगल क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए अभियान के दौरान भी सावधानी बरतनी पड़ती है।
पोस्टर में छह नक्सलियों की जानकारी दिए जाने से स्थानीय लोगों को उनकी पहचान के बारे में जानकारी मिल सकती है। यदि इनमें से कोई व्यक्ति किसी गांव या आसपास के क्षेत्र में देखा जाता है तो पुलिस को तत्काल सूचना मिल सकती है। इस तरह स्थानीय सूचना तंत्र सुरक्षा अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
पुलिस की ओर से ग्रामीणों को यह भी सलाह दी जा सकती है कि किसी संदिग्ध व्यक्ति को देखकर स्वयं कार्रवाई करने की कोशिश न करें। हथियारबंद या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों से दूरी बनाए रखना और पुलिस को जानकारी देना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
दलमा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ने के साथ जंगल में तलाशी और गश्त भी तेज की जा सकती है। संदिग्ध स्थानों की जांच के अलावा संभावित आवागमन वाले रास्तों पर भी निगरानी रखी जा सकती है।
एक करोड़ रुपये के इनाम वाले असीम मंडल की तलाश को लेकर सुरक्षा एजेंसियों पर विशेष ध्यान है। उसकी गिरफ्तारी से नक्सल नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण इनपुट मिलने की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि उसके संपर्क किन लोगों से हैं और वर्तमान में वह कहां सक्रिय है।
पुलिस अब पोस्टर के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक जानकारी पहुंचाने की कोशिश कर रही है। ग्रामीणों से मिली छोटी से छोटी सूचना भी किसी बड़े अभियान की शुरुआत कर सकती है। इसलिए पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देने की अपील की है।
सुरक्षा एजेंसियां यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगी कि सूचना देने वाले ग्रामीणों की पहचान सार्वजनिक न हो। नक्सल प्रभावित या संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी होता है। सूचना तंत्र तभी प्रभावी हो सकता है जब लोगों को पुलिस पर भरोसा हो।
दलमा में लगाए गए पोस्टरों के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से आगे भी अभियान चलाए जाने की संभावना है। वांछित नक्सलियों की गिरफ्तारी के लिए जंगल और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा सकता है।
हालांकि पोस्टर लगाए जाने का मतलब यह नहीं है कि सभी वांछित नक्सली इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। यह पुलिस की ओर से उनकी पहचान सार्वजनिक करने और लोगों से जानकारी जुटाने की एक रणनीति है। किसी व्यक्ति की मौजूदगी की पुष्टि केवल पुलिस जांच के बाद ही की जा सकती है।
ग्रामीणों के लिए यह भी जरूरी है कि वे सोशल मीडिया या अफवाहों पर भरोसा न करें। किसी संदिग्ध व्यक्ति के बारे में जानकारी होने पर सीधे स्थानीय पुलिस या संबंधित सुरक्षा एजेंसी को सूचना देना बेहतर है। गलत सूचना से अनावश्यक डर और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
दलमा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख सकते हैं। जंगलों में गश्त और संभावित मार्गों की निगरानी के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में सूचना तंत्र को सक्रिय रखना अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है।
फिलहाल छह वांछित नक्सलियों के पोस्टर लगाए जाने और एक करोड़ रुपये के इनामी असीम मंडल की तलाश तेज किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की अपील के बाद अब स्थानीय लोगों से मिलने वाली सूचनाओं पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहेगी।
कुल मिलाकर दलमा क्षेत्र में पुलिस ने छह वांछित नक्सलियों के पोस्टर लगाए हैं, जिनमें एक करोड़ रुपये के इनामी असीम मंडल का नाम भी शामिल है। सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं और ग्रामीणों से संदिग्ध गतिविधियों या वांछित नक्सलियों के बारे में जानकारी देने की अपील की गई है। पुलिस का कहना है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। अब सुरक्षा बलों की निगरानी, ग्रामीणों से मिलने वाले इनपुट और संभावित तलाशी अभियानों के आधार पर इस कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।









