दिल्ली PG हादसा: 5 मंजिला इमारत ढही, 6 की मौत; मलबे में अब भी लोगों की तलाश

नई दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला PG इमारत गिरने से अबतक 6 लोगों की मौत हुई। 12 लोगों को बचाया गया, 5 गंभीर घायल हैं। NDRF मलबे में तलाश कर रही है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई और 12 लोगों को बचाया गया। पांच गंभीर घायलों का एम्स में इलाज जारी है। NDRF रेस्क्यू डॉग और कैमरों से मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही है।

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। पांच गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया है। राहत और बचाव अभियान अभी जारी है और मलबे में कई अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

रेस्क्यू टीम मलबे में दबे लोगों का पता लगाने के लिए स्निफर डॉग और कैमरों की मदद ले रही है। हादसे के बाद से लगातार मलबा हटाने का काम चल रहा है। रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा और सोमवार सुबह भी बचाव दल घटनास्थल पर मौजूद रहा।

सत्य निकेतन में दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा

यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन में हुआ। यह इलाका छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है, जहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज स्थित हैं।

हादसे के समय इमारत में कई लोग मौजूद थे। इमारत के गिरते ही पूरा ढांचा मलबे में तब्दील हो गया और वहां मौजूद लोगों के दबे होने की सूचना मिली। शुरुआत में स्थानीय लोगों और प्रशासन की टीम ने हाथों से मलबा हटाकर बचाव कार्य शुरू किया। इसके बाद मौके पर भारी मशीनें पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन तेज किया गया।

बेसमेंट में सात दिन से चल रही थी तोड़फोड़

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में पिछले सात दिनों से तोड़फोड़ का काम चल रहा था। उनका कहना है कि बेसमेंट पहले से कमजोर था और वहां पानी भी भरा हुआ था। इसी दौरान खुदाई का काम किए जाने पर एक पिलर खिसक गया, जिसके बाद पूरी इमारत ढह गई।

हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।

इमारत करीब 40 साल पुरानी बताई गई है। दिल्ली नगर निगम (MCD) के रिकॉर्ड के मुताबिक, हादसे से पहले इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था।

दूसरी इमारत में दरारें, गिरने का खतरा

गिरी हुई इमारत के ठीक पास स्थित एक दूसरी बिल्डिंग को भी खाली करा लिया गया है। इस इमारत में दरारें दिखाई देने के बाद वहां रहने वाले लोगों को बाहर निकाल दिया गया।

रेस्क्यू टीम के मुताबिक, मलबा हटाने के दौरान आसपास की इमारत को भी नुकसान पहुंचने और उसके गिरने का खतरा है। एहतियात के तौर पर उसे सपोर्ट देने वाले पिलर लगाए जा रहे हैं, ताकि बचाव अभियान के दौरान स्थिति और गंभीर न हो।

मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

पुलिस ने इमारत के मालिक आनंद बंसल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आनंद बंसल गुरुग्राम में रहता है। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।

हादसे के बाद इमारत के निर्माण, बेसमेंट में चल रहे काम और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इमारत में तोड़फोड़ या खुदाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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अवैध निर्माण पर कार्रवाई की तैयारी

दिल्ली की मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि चार मंजिल से ज्यादा वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है और कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त किया जाएगा।

वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासनिक स्तर पर हादसे के कारणों और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

MCD के 6 सितंबर के एक आदेश में सत्य निकेतन में बनी सभी जर्जर और खतरनाक इमारतों को गिराने का नोटिस लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

NDRF की टीम स्निफर डॉग से कर रही तलाश

बचाव अभियान में NDRF की टीम भी शामिल है। स्निफर डॉग की मदद से मलबे के भीतर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। इसके अलावा कैमरों और अन्य रेस्क्यू उपकरणों की सहायता से मलबे के अंदर की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे को सावधानी से हटाना है, क्योंकि आसपास की इमारतों में भी दरारें दिखाई दी हैं। बचावकर्मी इस बात का विशेष ध्यान रख रहे हैं कि मलबा हटाते समय आसपास के ढांचे को नुकसान न पहुंचे।

NSUI अध्यक्ष ने उठाए सिस्टम पर सवाल

NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने रेस्क्यू में देरी को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को समय पर रेस्क्यू नहीं किया जा सका और इसे सिस्टम की बड़ी नाकामी बताया।

जाखड़ ने दावा किया कि राजधानी में आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त योजना, जरूरी उपकरण और सही टीम की कमी दिखाई दी। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय नेताओं की जवाबदेही तय करने की मांग की।

उन्होंने सभी निजी PG इमारतों की जांच और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाकर सरकारी हॉस्टल बनाने की मांग भी की। साथ ही मृतकों के परिवारों को मुआवजा, घायल छात्रों के बेहतर इलाज और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

तीन साल में दिल्ली में भवन गिरने की 1,133 घटनाएं

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2025 तक दिल्ली में इमारत गिरने की 1,133 घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में 98 लोगों की मौत हुई है। सत्य निकेतन की घटना ने राजधानी में पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सत्य निकेतन जैसे छात्र इलाकों में बड़ी संख्या में PG और हॉस्टल संचालित होते हैं। ऐसे में भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा, बेसमेंट में होने वाले निर्माण या तोड़फोड़ के काम और आपातकालीन निकासी व्यवस्था की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

फिलहाल प्रशासन और रेस्क्यू एजेंसियों का मुख्य फोकस मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे के कारणों और जिम्मेदार लोगों को लेकर अंतिम स्थिति मजिस्ट्रेट जांच और पुलिस जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

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