दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण की मांग, किरेन रिजिजू से मिला जमीयत का प्रतिनिधिमंडल

Delhi Race Course Mosque News: दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण की मांग को लेकर जमीयत का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मिला।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की।

नई दिल्ली: रेस कोर्स मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान के संरक्षण का मुद्दा केंद्र सरकार के सामने उठाया गया है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर इन धार्मिक और ऐतिहासिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन ने इस संबंध में मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मंगाने और किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले संपत्तियों की कानूनी स्थिति की जांच कराने का अनुरोध किया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने किया। ज्ञापन संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की ओर से प्रस्तुत किया गया। इसमें मस्जिद और कब्रिस्तान के धार्मिक, ऐतिहासिक तथा कानूनी महत्व का उल्लेख करते हुए इनके संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की गई।

सरकारी रिकॉर्ड में मस्जिद के उल्लेख का हवाला

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अनुसार, सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित रेस कोर्स मस्जिद से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज सरकारी अभिलेखों में मौजूद हैं। संगठन ने अपने ज्ञापन में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की विरासत सूची, दिल्ली गजट 1977 और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की संशोधित सूची का हवाला दिया।

ज्ञापन में दावा किया गया कि NDMC की हेरिटेज सूची में मस्जिद का उल्लेख क्रम संख्या 22 पर है, जबकि दिल्ली गजट में इसे क्रम संख्या 18 पर दर्ज किया गया है। संगठन ने मंत्रालय की सूची में भी संबंधित संपत्ति की पहचान दर्ज होने की बात कही है। जमीयत ने इन दस्तावेजों के आधार पर मांग की कि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की पूरी तरह जांच की जाए और मस्जिद तथा कब्रिस्तान की कानूनी स्थिति स्पष्ट की जाए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक अभिलेखों की जांच इस मामले की स्थिति समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

नमाजियों की आवाजाही और बुनियादी सुविधाओं पर चिंता

दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण की मांग, किरेन रिजिजू से मिला जमीयत का प्रतिनिधिमंडल

प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद की मौजूदा स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। संगठन के ज्ञापन के मुताबिक, वहां नमाजियों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाई गई हैं और पानी तथा बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। जमीयत ने यह आशंका भी व्यक्त की कि संबंधित संपत्तियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई हो सकती है।

संगठन ने सरकार से अनुरोध किया कि मामले की जांच पूरी होने तक ऐसा कोई कदम न उठाया जाए, जिससे मस्जिद या कब्रिस्तान को नुकसान पहुंचे और जिसकी भरपाई संभव न हो। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किसी भी निर्णय से पहले लागू कानूनों, संबंधित दस्तावेजों और न्यायिक आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

जमीयत ने नमाजियों की आवाजाही और पानी-बिजली जैसी सुविधाओं को बहाल करने की मांग भी रखी। हालांकि, इन प्रतिबंधों और सुविधाओं से जुड़ी परिस्थितियों पर संबंधित सरकारी विभागों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

किरेन रिजिजू ने दिया हरसंभव प्रयास का आश्वासन

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करने का आग्रह किया। संगठन ने विशेष रूप से दिल्ली वक्फ बोर्ड और NDMC से तथ्यात्मक जानकारी लेने की मांग की, ताकि संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड और कानूनी स्थिति का आकलन किया जा सके।

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मंत्री ने उसकी मांगों और चिंताओं को सुनने के बाद मामले में अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी औपचारिक सरकारी आदेश, जांच की समयसीमा या संपत्तियों के संबंध में अंतिम निर्णय का उल्लेख नहीं है। जमीयत ने कहा कि वह मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण के लिए उपलब्ध कानूनी और अन्य वैध विकल्पों का इस्तेमाल करेगी। संगठन का जोर है कि इन संपत्तियों के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए उनका संरक्षण किया जाना चाहिए।

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