दिल्ली में ₹83.23 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा, 6 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने ₹83.23 करोड़ के मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। छह आरोपी गिरफ्तार हुए और 109 चेकबुक व 12 मोबाइल बरामद हुए।

दिल्ली पुलिस ने ₹83.23 करोड़ से जुड़े मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 89 साइबर ठगी शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस ने 109 चेकबुक, 12 मोबाइल फोन और दस्तावेज बरामद किए हैं।

नई दिल्ली:  दिल्ली की द्वारका जिला पुलिस ने करीब ₹83.23 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े मल्टी-स्टेट नेटवर्क का खुलासा किया है। स्पेशल स्टाफ की कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क से देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 89 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी मिली हैं। जांच के दौरान पुलिस ने 109 चेकबुक, 12 मोबाइल फोन और बैंक खातों, फर्मों तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब आरोपियों के डिजिटल रिकॉर्ड और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन की जांच कर रही है, ताकि कथित ठगी की रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाया जा सके।

संदिग्ध बैंक खाते से शुरू हुई जांच

पुलिस के अनुसार, यह मामला एफआईआर नंबर 101/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2)/61(2)/3(5) और थाना द्वारका नॉर्थ में दर्ज किया गया था।

साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों का विश्लेषण करते समय जांच अधिकारियों को द्वारका सेक्टर-23ए स्थित यस बैंक के एक संदिग्ध खाते की जानकारी मिली। पुलिस जांच में सामने आया कि इस खाते में तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में हुई कथित साइबर ठगी से जुड़ी रकम पहुंची थी।

इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े लेनदेन, लाभार्थियों और रकम भेजने वाले पक्षों की जानकारी का विस्तृत विश्लेषण किया। इसी प्रक्रिया में कथित तौर पर कई बैंक खातों और फर्मों के बीच वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क सामने आया।

नौकरी का झांसा देकर खुलवाए जाते थे म्यूल अकाउंट

पुलिस की जांच में आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोग अलग-अलग नामों से बैंक खाते और फर्म स्थापित करते थे। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। रकम को कई स्तरों पर घुमाने के बाद कथित तौर पर नकद निकासी की जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, कुछ म्यूल बैंक खाते ऐसे लोगों के नाम पर खुलवाए गए थे, जिन्हें नौकरी या वेतन खाता उपलब्ध कराने का झांसा दिया गया था। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को आगे भेजने के लिए किया जाता था।

जांच में यस बैंक, फेडरल बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत कई बैंकों में खोले गए खातों और उनसे जुड़ी फर्मों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।

चेतन सहरावत को मुख्य हैंडलर बताया

पुलिस ने चेतन सहरावत को कथित सिंडिकेट का मुख्य हैंडलर बताया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अन्य आरोपी उसके निर्देश पर काम करते थे।

बैंक खातों के विस्तृत विश्लेषण के दौरान पुलिस को कई ऐसे खाते मिले, जिनमें समान भेजने वाले और लाभार्थी दिखाई दिए। इससे पुलिस को संदेह हुआ कि रकम को एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया जा रहा था।

पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत ₹1,14,84,394 की रकम होल्ड कराई है।

कई कंपनियों और लेनदेन की जांच

जांच के दौरान चेतन सहरावत और गौरव कादियान के बीच वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आई। इसके अलावा माही इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड से करीब ₹94,000 के लेनदेन का भी पता चला।

कंपनी की ओर से पुलिस को उसके एसबीआई खाते से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसमें सिसुपाल एंटरप्राइजेज और प्लेंटिवा ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जमा की गई नकदी तथा आगे के लाभार्थियों से संबंधित विवरण शामिल हैं।

पुलिस इन कंपनियों, बैंक खातों और लाभार्थियों के बीच हुए लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।

यूएसडीटी और बाइनेंस से जुड़े लेनदेन की जांच

पूछताछ के दौरान पुलिस के मुताबिक, चेतन सहरावत ने कथित तौर पर यूएसडीटी (USDT) और बाइनेंस (Binance) से जुड़े लेनदेन में शामिल होने की बात बताई है।

हालांकि, पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान चेतन ने अपना मोबाइल फोन उपलब्ध नहीं कराया। अब जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों और कथित क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि साइबर ठगी की रकम का इस्तेमाल और हस्तांतरण किस तरह किया गया।

यह जांच कथित नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कड़ियों का पता लगाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विदेश भागने की कोशिश में दो आरोपी पकड़े गए

पुलिस के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्य आरोपी चेतन सहरावत भारत से बाहर चला गया। वह पहले थाईलैंड गया और वहां से दुबई पहुंचा। उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया था।

इसके बाद उसे आईजीआई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।

दूसरे आरोपी तरुण के बारे में पुलिस ने बताया कि वह भी दुबई भागने की कोशिश कर रहा था। LOC जारी होने के बाद उसे मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया।

छापेमारी में 109 चेकबुक और 12 मोबाइल बरामद

आरोपियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12 मोबाइल फोन और 109 चेकबुक बरामद कीं। इसके अलावा बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज, फर्म पंजीकरण के कागजात, पैन और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज, कैश डिपॉजिट स्लिप और अन्य सामग्री भी जब्त की गई।

जांच के दौरान पुलिस को द ओलिम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े दस्तावेज भी मिले। पुलिस के अनुसार, यह कंपनी उसी पते पर पंजीकृत थी और शक्ति गुर्जर तथा धर्मेंद्र कुमार इसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे।

ये छह आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें चेतन सहरावत को मुख्य हैंडलर बताया गया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शक्ति गुर्जर, धर्मेंद्र कुमार, तरुण, दीपक और गौरव कादियान के रूप में हुई है।

पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका, उनके बैंक खातों, फर्मों और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।

साइबर ठगी की रकम का पूरा नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

द्वारका जिला पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके साथ ही कथित क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का लक्ष्य ठगी की रकम के पूरे प्रवाह, उससे जुड़े बैंक खातों और कथित लाभार्थियों की पहचान करना है। जांच एजेंसी ने आगे और गिरफ्तारियां तथा बरामदगी होने की संभावना जताई है।

यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधों में कथित तौर पर म्यूल अकाउंट, फर्जी फर्म, बैंकिंग नेटवर्क और डिजिटल वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। पुलिस की आगे की जांच से इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय कड़ियों के सामने आने की उम्मीद है।

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