कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सरकार की प्रस्तावित योजना सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों के सामने रखने की मांग की है।
Delimitation 2026: लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और सरकार की प्रस्तावित योजना को सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों के सामने रखने की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील और लंबे समय तक प्रभाव डालने वाले फैसले पर व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी है। पार्टी ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने और 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 फीसदी आरक्षण देने की मांग दोहराई है।
खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में परिसीमन की संभावित योजना पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, केंद्र सरकार को अपने प्रस्ताव सभी राजनीतिक दलों और संबंधित राज्य सरकारों के सामने रखने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों और राज्यों को प्रस्तावों का अध्ययन करने और अपनी राय रखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस का मानना है कि परिसीमन केवल लोकसभा सीटों की संख्या बदलने का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन पर भी पड़ सकता है।
543 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का क्या रुख?
कांग्रेस ने लोकसभा में मौजूदा 543 निर्वाचित सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक स्थिर रखने का प्रस्ताव रखा है। पार्टी चाहती है कि राज्यों के बीच मौजूदा लोकसभा सीटों के वितरण को भी इसी अवधि के लिए बरकरार रखा जाए। कांग्रेस का तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और विकास के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें परिसीमन के कारण राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए। पार्टी इस मुद्दे पर जल्दबाजी के बजाय सभी पक्षों के बीच चर्चा और सहमति की मांग कर रही है।
परिसीमन के साथ कांग्रेस ने महिला आरक्षण को भी अपने प्रमुख एजेंडे में रखा है। खरगे ने मांग की है कि महिलाओं के लिए लोकसभा में एक-तिहाई सीटों का आरक्षण 2029 के आम चुनाव से लागू किया जाए। कांग्रेस लंबे समय से मांग करती रही है कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण को जल्द से जल्द प्रभावी बनाया जाए। पार्टी का कहना है कि इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस कार्यसमिति ने भी इस महीने परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित इन मांगों को दोहराया था।
खरगे पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा
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मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे नए पत्र में यह भी याद दिलाया कि उन्होंने 16 जुलाई को परिसीमन को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। उस समय भी उन्होंने राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने की बात कही थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने अप्रैल में हुई राजनीतिक घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार पर महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों पर जल्दबाजी करने का आरोप लगाया। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में अंतिम प्रस्ताव और व्यापक प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक स्थिति अलग-अलग चरणों में स्पष्ट होनी बाकी है।
भारत में लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना है। लेकिन इस प्रक्रिया का राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि दक्षिणी राज्यों समेत कई राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सावधानी बरतने की मांग करते रहे हैं। कांग्रेस का प्रस्ताव मौजूदा सीटों की संख्या को 25 वर्षों तक स्थिर रखने पर केंद्रित है। पार्टी चाहती है कि परिसीमन से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित न हो।
महिला आरक्षण विधेयक का क्या हुआ?
महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधान को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 17 अप्रैल को लोकसभा में परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें 298 ने विधेयक के पक्ष और 230 ने विरोध में वोट दिया।कांग्रेस के मुताबिक, प्रस्ताव को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं हो सका। इसके बाद भी पार्टी ने परिसीमन के साथ महिला आरक्षण को लेकर अपना दबाव बनाए रखा है।









