धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे पर पहला बयान, बोले- जेन-जी को भटकाने की कोशिश हुई

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे पर पहली बार बयान दिया। उन्होंने जेन-जी की आकांक्षाओं, युवाओं के विरोध और PM मोदी से बातचीत को लेकर बात की।

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के बाद पहली बार बयान दिया। उन्होंने कहा कि जेन-जी देश की युवा ताकत है और उसकी आकांक्षाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रधान ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा के बाद उन्होंने पद छोड़ा।

नई दिल्ली: भारत के पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी यानी जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रधान ने दावा किया कि कुछ लोगों ने युवाओं को भटकाने की कोशिश की, लेकिन नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और सवालों को समझना जरूरी है। भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में शनिवार को छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के युवाओं का भविष्य है। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करने के बाद ही शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

जेन-जी को लेकर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेन-जी देश के ही बच्चे हैं और उनकी चिंताओं को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के विरोध को केवल विरोध के तौर पर देखने के बजाय उनके विचारों और आकांक्षाओं को समझना चाहिए। पूर्व शिक्षा मंत्री के मुताबिक, भारत में हर साल बड़ी संख्या में बच्चे जन्म लेते हैं और आने वाले वर्षों में यही युवा देश के विकास की दिशा तय करेंगे। 

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के सपने बड़े हैं और वह भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधान ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री का पद भी छोटा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए पद कभी प्राथमिकता नहीं रहा और वह देश के हित में किसी भी जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद दिया इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों पर चर्चा की और उनकी मांगों को स्वीकार करने के लिए प्रधानमंत्री की मंजूरी मांगी। प्रधान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने युवाओं से बातचीत के लिए सहमति जताई। इसके बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर देश में युवाओं के बीच लगातार बहस होती रही है।

भुवनेश्वर कार्यक्रम में BJD कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी

प्रधान के संबोधन के दौरान बीजू जनता दल यानी BJD के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। इसके जवाब में पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह इस प्रदर्शन से परेशान नहीं हैं। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में विरोध का सामना करना उनके लिए नई बात नहीं है। उन्होंने ओडिशा के लोगों के सम्मान और राज्य के गौरव का भी उल्लेख किया। प्रधान ने कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में ओडिशा के करोड़ों लोगों के भरोसे को बनाए रखने की कोशिश की है और आगे भी ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे राज्य के सम्मान को नुकसान पहुंचे।

युवाओं के विरोध को समझना जरूरी: प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेन-जी के विरोध को लेकर उन्हें कोई व्यक्तिगत परेशानी नहीं है। उनके मुताबिक, नई पीढ़ी सवाल पूछती है और अपनी बात रखने का अधिकार रखती है। ऐसे में सरकार और समाज की जिम्मेदारी है कि वह युवाओं की बात सुने और उनकी समस्याओं को समझे। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलावों में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार, आज की जेन-जी भी अपने समय में बदलाव की वाहक बन सकती है।

2014 के बाद चार पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र सरकार में अब तक चार पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। इनमें स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल निशंक और धर्मेंद्र प्रधान शामिल हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारियों में फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू हुई है।

कभी खुद पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन से जुड़ा एक पुराना प्रसंग भी इस मुद्दे को अलग संदर्भ देता है। उनके सहयोगी रहे प्रशांत राउत के अनुसार, 1997 में ओडिशा में कथित पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन में प्रधान भी शामिल हुए थे।

उस समय करीब 1,500 छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था और प्रधान को भी चोटें आई थीं। बताया गया है कि इस दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी और फ्रैक्चर भी हुआ था। इस पुराने घटनाक्रम का जिक्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब तीन दशक बाद शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर युवाओं के आंदोलन के बीच प्रधान खुद केंद्र में रहे।

शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यकाल के बाद नई राजनीतिक भूमिका

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ जब देश में युवाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे थे। उनके ताजा बयान से संकेत मिलता है कि वह अपने इस्तीफे को केवल राजनीतिक बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी की चिंताओं से जुड़े फैसले के तौर पर देखते हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाएं किसी भी प्रशासनिक पद से बड़ी हैं। उनके मुताबिक, भारत की युवा आबादी देश को आगे ले जाने की क्षमता रखती है और उसे सही दिशा, अवसर और संवाद की जरूरत है।

जेन-जी और शिक्षा व्यवस्था पर आगे भी जारी रहेगी बहस

धर्मेंद्र प्रधान का बयान भारत में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवा आंदोलनों को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आया है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पेपर लीक और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही जैसे मुद्दे छात्रों के लिए लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

प्रधान के अनुसार, युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। उनका मानना है कि नई पीढ़ी के सवालों को समझना देश के भविष्य के लिए जरूरी है।उनका बयान यह भी दिखाता है कि भारत में युवा आंदोलन अब केवल परीक्षा या शिक्षा से जुड़े तत्काल मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शासन, जवाबदेही और भविष्य के अवसरों जैसे व्यापक विषयों से भी जुड़े हुए हैं।

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