धीरेंद्र शास्त्री ने हाल ही में भूतों पर पीएचडी करने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही विदेश की किसी यूनिवर्सिटी में आवेदन कर सकते हैं। दुनिया के कई विश्वविद्यालय पैरानॉर्मल स्टडीज और भूत विद्या पर कोर्स चला रहे हैं, जिनमें एडिनबरा यूनिवर्सिटी और BHU शामिल हैं। अभी उन्होंने किसी संस्थान में दाखिला नहीं लिया है।
भूतों पर पीएचडी: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वे आगे भूतों पर पीएचडी करने की योजना बना रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने यह खुलासा किया कि वे लगातार अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही विदेश की किसी यूनिवर्सिटी में आवेदन करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने भूतों पर शोध को दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि कई संस्थान दुनिया भर में पैरानॉर्मल रिसर्च पढ़ाते हैं। फिलहाल वे किसी कॉलेज में दाखिला नहीं ले रहे हैं, लेकिन सही समय पर आगे बढ़ने का इरादा रखते हैं।
भूतों पर पीएचडी का इरादा क्यों
धीरेंद्र शास्त्री ने बातचीत में कहा कि वे भूतों पर शोध करना चाहते हैं और इस विषय पर आगे की पढ़ाई के लिए विदेशी विश्वविद्यालय में आवेदन करने का मन बना चुके हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका सबजेक्ट थोड़ा खतरनाक है, लेकिन इस क्षेत्र में शोध करने वाले लोग पहले भी रहे हैं।
उनका कहना है कि अलौकिक घटनाओं पर दुनिया में लंबे समय से गंभीर अध्ययन होते आए हैं। इसलिए वे भी इस दिशा में अकादमिक रिसर्च को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
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कौन-कौन से विश्वविद्यालय पढ़ाते हैं ‘भूत विद्या’
एडिनबरा विश्वविद्यालय पिछले कई दशकों से भूतों और अलौकिक घटनाओं पर अध्ययन संचालित कर रहा है। यहां इस विषय पर रिसर्च को वैज्ञानिक तरीके से समझाया जाता है।
इसके अलावा थॉमस फ्रांसिस यूनिवर्सिटी में भी पैरानॉर्मल स्टडीज से जुड़े कोर्स उपलब्ध हैं। भारत में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) भी आयुर्वेद के अंतर्गत ‘भूत विद्या’ पर सर्टिफिकेट कोर्स चलाता है, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और अदृश्य आशंकाओं से जुड़े मामलों का अध्ययन करना है।
अब तक नहीं लिया किसी कॉलेज में एडमिशन
धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया कि उन्होंने अभी किसी कॉलेज में दाखिला नहीं लिया है। फिलहाल यह सिर्फ उनकी अध्ययन इच्छा है, जिसे वे आने वाले समय में औपचारिक रूप देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि सही समय आने पर वे विदेश की यूनिवर्सिटी में आवेदन करेंगे और शोध का विषय तय करेंगे। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर हल्की-फुल्की चर्चा भी शुरू हो गई है।









