पीएम नरेंद्र मोदी ने देहरादून में रोड शो शुरू किया और जल्द दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। 213 किमी लंबे इस कॉरिडोर से सफर का समय 6 घंटे से घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगा।
देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देहरादून में भव्य रोड शो के साथ दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत की। आशारोड़ी से जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड तक सड़क किनारे बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। ढोल-ताशों, नारों और स्वागत बैनरों के बीच प्रधानमंत्री के काफिले का जोरदार स्वागत किया गया। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी स्क्रीन लगाई गईं, ताकि लोग रोड शो, उद्घाटन और मंदिर दर्शन का सीधा प्रसारण देख सकें।
प्रधानमंत्री सुबह देहरादून पहुंचे, जहां से वे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर भी गए और एक्सप्रेसवे के प्रमुख हिस्सों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने देहरादून लौटकर मां डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनके साथ Yogi Adityanath और Anandiben Patel भी मौजूद रहीं।
प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासन ने कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया। इस बीच, कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन की कोशिश की। पुलिस ने एहतियातन 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सके।
यह दौरा केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि उत्तर भारत की कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस परियोजना को क्षेत्रीय विकास और तेज संपर्क का बड़ा कदम बताया।

213 किमी लंबा एक्सप्रेसवे: दिल्ली से देहरादून अब ढाई घंटे
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 213 किलोमीटर लंबा, 6-लेन और एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जिसे करीब 12,000 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। यह परियोजना दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को सीधे जोड़ती है।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय मौजूदा 6 घंटे से घटकर लगभग 2.5 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को समय की बड़ी बचत होगी और सड़क यात्रा अधिक सुरक्षित व सुगम बनेगी।
यह कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और देहरादून तक जाता है। परियोजना में आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, सर्विस रोड, अंडरपास, इंटरचेंज और बस शेल्टर जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।
परियोजना के तहत कई फ्लाईओवर, अंडरपास और कनेक्टिंग रोड तैयार किए गए हैं, जिससे स्थानीय ट्रैफिक भी प्रभावित नहीं होगा। एक्सप्रेसवे पर डिजाइन स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जिससे यात्रा तेज और आरामदायक होगी।
सरकार का कहना है कि यह परियोजना दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के बीच बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में भी मदद करेगी।
पर्यटन, कारोबार और चारधाम यात्रा को मिलेगा बड़ा फायदा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो एशिया के सबसे लंबे ऐसे कॉरिडोर में शामिल है। यह हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र से गुजरता है और वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
इस परियोजना से उत्तराखंड के पर्यटन सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और चारधाम यात्रा के लिए आने वाले पर्यटकों को अब तेज और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे होटल, ट्रैवल एजेंसियों, टैक्सी ऑपरेटरों और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापारिक दृष्टि से भी यह एक्सप्रेसवे गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक क्लस्टर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के औद्योगिक शहरों—जैसे रुड़की, हरिद्वार, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर—से बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। माल ढुलाई तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और सप्लाई चेन अधिक मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से एफएमसीजी, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, कृषि उत्पाद और ई-कॉमर्स सेक्टर को भी सीधा फायदा होगा।
कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत के लिए तेज कनेक्टिविटी, पर्यटन, निवेश और आर्थिक विकास का नया अध्याय है। प्रधानमंत्री मोदी का यह उद्घाटन कार्यक्रम उसी बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया है।











