दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनील गावस्कर के पर्सनैलिटी राइट्स मामले में गूगल, मेटा और एक्स को आदेश दिया कि बिना अनुमति उपयोग किए गए कंटेंट एक हफ्ते में हटाएं। कोर्ट ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाई।
New Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर के पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) मामले में गूगल, मेटा और एक्स को आदेश दिया है कि वे उनकी अनुमति के बिना उपयोग किए गए कंटेंट को हटाएं। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि गावस्कर से मिलने वाले आपत्तिजनक URL को प्राप्त कर एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई पूरी की जाए। यह आदेश गावस्कर की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने इंटरनेट पर अपनी तस्वीर और नाम का गलत इस्तेमाल रोकने की मांग की थी।
क्या है गावस्कर की याचिका
सुनील गावस्कर ने कोर्ट में कहा कि उनकी तस्वीरों और नाम का गलत उपयोग कई वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है। इनका उपयोग फर्जी विज्ञापन, भ्रामक प्रमोशन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा रहा था। याचिका में उन्होंने पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन पर रोक लगाने और प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार बनाने की मांग की।
कोर्ट का आदेश
जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने निर्देश दिया कि गावस्कर 48 घंटे के भीतर आपत्तिजनक URL संबंधित प्लेटफॉर्म को दें। कंपनियों को इस शिकायत पर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि कंपनियां शिकायत मिलने के बाद इसे औपचारिक कंप्लेंट के रूप में देखें और एक हफ्ते में नतीजा गावस्कर को सूचित करें।
पर्सनैलिटी राइट्स का महत्व
पर्सनैलिटी राइट्स वह अधिकार हैं, जिनके तहत किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उनकी तस्वीर, नाम या पहचान का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। गावस्कर का मामला इस अधिकार की रक्षा से जुड़ा है। कोर्ट का आदेश इस बात को स्पष्ट करता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सेलिब्रिटी और आम उपयोगकर्ताओं की पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्ती
इस आदेश से गूगल, मेटा और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को यह संदेश गया कि उन्हें शिकायत मिलने पर तुरंत और गंभीर कार्रवाई करनी होगी। कोई भी फर्जी विज्ञापन, भ्रामक सूचना या अवैध प्रमोशन जारी रहने की अनुमति नहीं होगी। कंपनियों को अपनी जवाबदेही बढ़ानी होगी और शिकायतों का निपटारा समय पर करना होगा।









