दिल्ली के साकेत इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से हड़कंप मच गया। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू टीम ने अब तक 4-5 लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजा है और अभियान जारी है।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साउथ दिल्ली स्थित साकेत इलाके में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। यहां एक पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।
यह घटना उस समय हुई जब शाम के लगभग 7:45 बजे फायर कंट्रोल रूम को इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके बाद तुरंत चार दमकल गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया। कुछ ही देर में एनडीआरएफ की टीम भी राहत कार्य में शामिल हो गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, मलबे से कई लोगों को निकाला गया
अधिकारियों के अनुसार अब तक मलबे से तीन से पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इन सभी को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया है।
रेस्क्यू टीमों ने जेसीबी मशीनों और अन्य भारी उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है। राहत दल लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि मलबे में फंसे अन्य लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
व्यावसायिक इमारत में कई ऑफिस, हादसे के समय अधिकांश बंद थे
प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह पांच मंजिला इमारत एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स थी, जिसमें कई ऑफिस संचालित होते थे। हालांकि शनिवार का दिन होने के कारण अधिकांश कार्यालय शाम तक बंद हो चुके थे। कुछ ऑफिस शाम करीब 6 बजे तक ही खुले थे और उसके बाद इमारत में गतिविधि कम हो गई थी।
इमारत लगभग 500 वर्ग गज क्षेत्र में फैली हुई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार इमारत के ढहने के बाद आसपास के क्षेत्र में भी मलबा फैल गया, जिससे पास की एक अन्य बिल्डिंग और वहां स्थित कैंटीन को भी नुकसान पहुंचा।
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निर्माण कार्य के चलते ढांचे पर दबाव की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि इमारत की ऊपरी मंजिल पर निर्माण या मरम्मत का कार्य चल रहा था। माना जा रहा है कि इसी कारण संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे इमारत अचानक ढह गई। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही की जाएगी।
फायर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें शाम 7:45 बजे सूचना मिली थी और तुरंत रेस्क्यू टीम भेज दी गई थी। उन्होंने कहा कि अभी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है।
NDRF, पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त कार्रवाई
घटना के बाद दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें संयुक्त रूप से राहत कार्य में जुटी हुई हैं। इलाके को पूरी तरह से घेर लिया गया है ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।
जेसीबी मशीनों की मदद से बड़े-बड़े मलबे के टुकड़ों को हटाया जा रहा है, जबकि बचाव दल हाथों से भी मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। रात के समय दृश्यता कम होने के बावजूद ऑपरेशन लगातार जारी रखा गया है।
स्थानीय लोगों में दहशत, आसपास की इमारतों को खाली कराया गया
घटना के बाद साकेत और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमारत गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की कई इमारतें हिल गईं। सुरक्षा के मद्देनज़र प्रशासन ने पास की कुछ इमारतों को खाली भी कराया है।
लोगों को इलाके से दूर रहने की सलाह दी गई है ताकि बचाव कार्य सुचारू रूप से चल सके। प्रशासन ने यह भी कहा है कि किसी भी तरह की अफवाहों से बचा जाए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा किया जाए।
घायलों का अस्पताल में इलाज जारी, स्थिति पर नजर
अब तक रेस्क्यू किए गए सभी घायलों को दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। कुछ लोगों को हल्की चोटें आई हैं, जबकि कुछ को गंभीर चोटों के कारण विशेष निगरानी में रखा गया है।
अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ को भी तैनात किया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
जांच के आदेश, भवन सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद प्रशासन ने इमारत के गिरने के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक तौर पर निर्माण कार्य और संरचनात्मक कमजोरी को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की टीम विस्तृत जांच करेगी।
इस हादसे ने एक बार फिर से दिल्ली में भवन सुरक्षा मानकों और निर्माण नियमों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी और व्यावसायिक इमारतों की नियमित जांच न होने से ऐसे हादसे होने का खतरा बढ़ जाता है।
राहत कार्य जारी, अंतिम आंकड़ों का इंतजार
फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है और प्रशासन ने अभी तक किसी भी तरह के अंतिम आंकड़े जारी नहीं किए हैं। मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते ऑपरेशन को बेहद सावधानी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा है कि जब तक पूरा मलबा साफ नहीं हो जाता, तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की जा सकती। सभी एजेंसियां मिलकर लगातार काम कर रही हैं और जल्द से जल्द सभी फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।









