करीब 30 साल से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय दिव्या दत्ता ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुकी हैं। हाल ही में फिल्म 'चिड़िया' में उनकी भूमिका को खूब सराहा गया।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: बॉलीवुड और ओटीटी की चर्चित अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने अपने करीब तीन दशक लंबे करियर में अलग-अलग तरह के किरदारों से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिव्या दत्ता इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘लास्ट मैन इन टावर’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में वह मनोज बाजपेयी के साथ नजर आ रही हैं और उनका किरदार एक ऐसी महिला का है, जो अपनी जिंदगी और निजी खुशियों को लेकर एक अहम मोड़ पर पहुंचती है।
दिव्या दत्ता ने हाल ही में एक बातचीत में अपनी दिवंगत मां के साथ अपने रिश्ते, महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और निजी खुशियों की जरूरत, सोशल मीडिया ट्रोलिंग तथा मनोज बाजपेयी के साथ काम करने के अनुभव पर खुलकर बात की।
आज भी मां से करती हैं बातचीत
दिव्या दत्ता के जीवन में उनकी मां की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। मां के निधन के बाद अभिनेत्री ने लंबे समय तक उन्हें याद किया, लेकिन आज भी वह महसूस करती हैं कि उनकी मां किसी न किसी रूप में उनके साथ हैं। दिव्या के मुताबिक, मां के साथ रिश्ता ऐसा होता है जिसमें भावनाओं को शब्दों में समझाने की जरूरत नहीं पड़ती। मुश्किल परिस्थितियों में उन्हें आज भी अपनी मां से एक तरह की आंतरिक ताकत मिलने का एहसास होता है। उनका कहना है कि जिंदगी में जब कई सवाल और उलझनें सामने आती हैं, तो उन्हें कभी-कभी भीतर से ही अपने सवालों के जवाब मिलने लगते हैं।
अभिनेत्री का मानना है कि जिन लोगों से हमारा जन्म और जीवन का गहरा रिश्ता जुड़ा होता है, वे उनके जाने के बाद भी हमारी जिंदगी का हिस्सा बने रहते हैं। उन्होंने अपनी मां की मौजूदगी को मुश्किल समय में संभालने वाली ताकत से जोड़ते हुए कहा कि जिंदगी के झटकों के बीच उनका प्रभाव उन्हें स्थिर रहने में मदद करता है।
महिलाओं को अपने सपनों के लिए समय निकालना चाहिए

‘लास्ट मैन इन टावर’ में दिव्या दत्ता का किरदार महिलाओं की निजी इच्छाओं और जिंदगी में उनकी प्राथमिकताओं से जुड़े सवाल उठाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि महिलाओं को दूसरों की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ खुद के लिए भी समय निकालना चाहिए। दिव्या के मुताबिक, महिलाओं की परवरिश और सामाजिक conditioning अक्सर उन्हें दूसरों की जरूरतों को अपनी जरूरतों से पहले रखने के लिए प्रेरित करती है। घर, परिवार और काम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में कई महिलाएं यह भूल जाती हैं कि उन्हें खुद क्या पसंद है और उनके अपने सपने क्या हैं।
उन्होंने महिलाओं की उस मानसिकता का उदाहरण दिया, जिसमें वे अपने पुराने शौक या पसंद को यह कहकर छोड़ देती हैं कि अब ऐसा करने की उम्र या परिस्थिति नहीं रही। दिव्या का मानना है कि अपने आसपास की दुनिया को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले खुद को खुश और संतुलित रखना जरूरी है।उनके अनुसार, खुशी हमेशा किसी बड़ी उपलब्धि से नहीं आती। कभी-कभी अपने लिए थोड़ा समय निकालना, किसी पुराने शौक को दोबारा अपनाना या बिना किसी अपराधबोध के अपनी पसंद का काम करना भी जरूरी होता है।
सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर क्या बोलीं दिव्या?
सोशल मीडिया के प्रभाव पर बात करते हुए दिव्या दत्ता ने माना कि इसके फायदे और नुकसान दोनों हैं। सोशल मीडिया ने कलाकारों को अपने काम को सीधे दर्शकों तक पहुंचाने का मौका दिया है। किसी नए प्रोजेक्ट या उपलब्धि की जानकारी अब बहुत तेजी से दुनिया भर में पहुंच सकती है। हालांकि, ऑनलाइन ट्रोलिंग भी सोशल मीडिया का एक हिस्सा बन चुकी है।
दिव्या ने कहा कि नफरत फैलाने वाले या गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर ट्रोल करने वाले लोगों को हर बार जवाब देना जरूरी नहीं है। उनके मुताबिक, कलाकार के लिए यह तय करना महत्वपूर्ण है कि किस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देनी है और किसे नजरअंदाज करना है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियां करने वाले लोगों की संख्या सीमित हो सकती है, जबकि बड़ी संख्या में दर्शक कलाकारों के काम की सराहना करते हैं। इसलिए अपना ध्यान नकारात्मकता के बजाय रचनात्मक काम पर बनाए रखना ज्यादा जरूरी है।
मनोज बाजपेयी के साथ पहली बार मिला खास अनुभव
दिव्या दत्ता ने मनोज बाजपेयी के साथ पहले भी कई फिल्मों में काम किया है। इनमें ‘वीर जारा’, ‘स्पेशल 26’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘ट्रैफिक’ जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि, उनके मुताबिक इन फिल्मों में दोनों कलाकारों के बीच ज्यादा साझा दृश्य नहीं थे। ‘लास्ट मैन इन टावर’ में पहली बार उन्हें मनोज बाजपेयी के साथ ऐसे दृश्यों में काम करने का मौका मिला, जहां दोनों कलाकारों के अभिनय का सीधा तालमेल देखने को मिलता है। दिव्या ने मनोज के अभिनय की तारीफ करते हुए उनके साथ काम करने के अनुभव को बेहद खास बताया।










