दक्षिण-पश्चिम मानसून जल्द केरल में करेगा दस्तक, आंध्र प्रदेश में 5 दिनों तक बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण -पश्चिम मानसून 24 घंटे में केरल पहुंचेगा। आंध्र प्रदेश में अगले 5 दिनों तक बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई जा रही है।

मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 24 घंटों में केरल पहुंच सकता है। इसके असर से आंध्र प्रदेश में अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है।

तिरवंतपुरम: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जानकारी दी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 24 घंटों के भीतर केरल में दस्तक दे सकता है। इसके साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा। मानसून के आगे बढ़ने के साथ ही यह धीरे-धीरे दक्षिण और पश्चिम भारत के अन्य राज्यों को भी प्रभावित करेगा।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के आगमन के बाद अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां शुरू हो जाएंगी।

केरल से होगी मानसून की शुरुआत, कई क्षेत्रों में फैलेगा प्रभाव

आईएमडी के अनुसार, गुरुवार तक दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल के साथ-साथ दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ हिस्सों, लक्षद्वीप द्वीप समूह और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह मानसून के सामान्य पैटर्न के अनुसार है, जहां हर साल सबसे पहले केरल में बारिश की शुरुआत होती है और फिर यह पूरे देश में धीरे-धीरे फैलता है।

आंध्र प्रदेश में पांच दिनों तक बारिश का अनुमान

मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के लिए अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इसके साथ ही कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाओं की भी संभावना है।

विशेष रूप से तटीय और आंतरिक जिलों में मौसम अधिक सक्रिय रहने की उम्मीद है। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बने सर्कुलेशन से बदला मौसम पैटर्न

मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने एक सतही चक्रवाती परिसंचरण (surface circulation) के कारण देश के कई हिस्सों में मौसम प्रभावित हो रहा है।

इसके प्रभाव से एक ट्रफ लाइन मध्य प्रदेश से होते हुए विदर्भ, तेलंगाना और रायलसीमा से गुजरती हुई उत्तर तमिलनाडु तक फैली हुई है। यह सिस्टम नमी को बढ़ाकर कई राज्यों में बारिश और गरज-चमक वाली गतिविधियों को सक्रिय कर रहा है।

आंध्र प्रदेश के कई जिलों में पहले से ही सक्रिय बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव देखा गया है। कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश और आंधी-तूफान जैसी स्थिति दर्ज की गई है।

विशेष रूप से पार्वतीपुरम मान्यम और अल्लूरी सीताराम राजू जिलों में कई स्थानों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई है। इससे स्थानीय लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून जल्द केरल में करेगा दस्तक, आंध्र प्रदेश में 5 दिनों तक बारिश की संभावना

तापमान में उतार-चढ़ाव, कावली में दर्ज हुआ 42 डिग्री सेल्सियस

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में आंध्र प्रदेश के कावली क्षेत्र में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो क्षेत्र में भीषण गर्मी की स्थिति को दर्शाता है।

हालांकि, बारिश की गतिविधियां बढ़ने के साथ ही आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। इससे गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

विशाखापट्टनम के भीमिली में 2 सेमी बारिश दर्ज

इसी अवधि में विशाखापट्टनम जिले के भीमिली क्षेत्र में लगभग 2 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह बारिश मानसून के आगमन से पहले मौसम में हो रहे बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह शुरुआती बारिश मानसून के सक्रिय होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।

गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिससे पेड़ों और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचने की संभावना है।

लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों में जाने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

मानसून की शुरुआत से कृषि और जल संसाधनों को राहत की उम्मीद

दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत को कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मानसून की बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आती है और जल संसाधनों जैसे तालाब, नदियों और जलाशयों में जल स्तर बढ़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है, तो यह देश के कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत होगा।

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