Dollar vs Rupee: रुपया 6% टूट कर 90.70 पर, एशिया की सबसे कमजोर करेंसी; निवेशकों की बढ़ी चिंता

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹90.70 पर पहुंचा, इस साल 6% कमजोर हुआ। अमेरिका-भारत ट्रेड डील और विदेशी निवेश निकासी से मुद्रा पर दबाव बना।

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹90.70 पर रिकॉर्ड निचले स्तर पर, इस साल 6% कमजोर। अमेरिका-भारत ट्रेड डील में अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की निकासी मुद्रा पर दबाव बढ़ा रही है।

Dollar vs Rupee: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है। शुक्रवार को रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹90.709 पर कारोबार किया। यह पिछले सर्वकालिक निचले स्तर 90.4675 से भी नीचे है। कारोबारियों का कहना है कि अगर टैरिफ और अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों में अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहती है तो रुपया और कमजोर हो सकता है।

इस साल रुपये का प्रदर्शन एशिया की मुद्राओं में सबसे खराब रहा है। वर्ष की शुरुआत से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत टूट चुका है। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और भारत से अमेरिकी बाजार में निर्यात पर 50 प्रतिशत तक के ऊंचे शुल्क ने मुद्रा पर दबाव बढ़ाया है।

क्यों हो रहा है रुपया कमजोर

2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 18 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की है। यह भारत को उन देशों में शामिल करता है जहां पोर्टफोलियो निकासी सबसे अधिक रही है।

इसके अलावा नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में मजबूत डॉलर की मांग और आयातकों की हेजिंग गतिविधियों ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। एक्सपर्ट्स और बैंकरों के अनुसार अमेरिकी ट्रेड डील रुपये के लिए सबसे अहम कारक है। यदि अमेरिका के साथ यह डील सफल होती है तो रुपये को अपनी हालिया गिरावट से बाहर आने का अवसर मिलेगा।

रुपये में डिवैल्यूएशन के संकेत

मौजूदा स्थिति में रुपया डिवैल्यूएशन के दायरे में आ गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, व्यापारिक भागीदार देशों के साथ मुद्रास्फीति के अंतर को ध्यान में रखते हुए रुपये का व्यापार-भारित वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (REER) अक्टूबर तक 97.47 पर आ गया।

100 से नीचे का स्तर रुपये के डिवैल्यूएशन का संकेत माना जाता है। इससे साफ है कि वर्तमान मुद्रा की कमजोरी के पीछे न केवल विदेशी निवेशकों की निकासी बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं।

आरबीआई आवश्यक होने पर हस्तक्षेप कर सकता है ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके और बाजार में स्थिरता लाई जा सके।

ट्रेड डील को लेकर हाल की बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प से फोन पर बातचीत की। दोनों देशों के अधिकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत अमेरिका के 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क से राहत पाने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत और अमेरिका ने अपने अधिकांश लंबित मतभेद दूर कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक औपचारिक समझौता होने की संभावना है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है क्योंकि अमेरिका ने भारत सहित एशियाई देशों से आने वाले सामानों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ कोई तय समय-सीमा लेकर नहीं चल रहा है। यदि अमेरिका भारत के प्रस्ताव से संतुष्ट है, तो समझौते पर तुरंत हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

निवेशकों और निर्यातकों पर प्रभाव

रुपये की कमजोरी से न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भारत के शेयर बाजार का आकर्षण कम हुआ है। उच्च शुल्क और मुद्रा अस्थिरता के कारण निर्यातक भी प्रभावित हो रहे हैं।

विशेषकर उन कंपनियों को नुकसान हो सकता है जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करती हैं। निवेशक इस समय अमेरिकी ट्रेड डील और RBI की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं। यदि डील सफल होती है तो रुपये में सुधार और विदेशी निवेशकों की वापसी संभव है।

एशिया में रुपये का प्रदर्शन

2025 में एशिया की मुद्राओं में रुपये का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। डॉलर के मुकाबले 6 प्रतिशत की गिरावट ने इसे सबसे कमजोर करेंसी बना दिया। जापान, दक्षिण कोरिया और चीन की मुद्राओं के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार पीछे है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी ट्रेड डील में प्रगति होती है तो रुपये को मजबूती मिलने की संभावना है। वहीं, यदि शुल्क और अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधाएं बनी रहती हैं तो रुपया और गिर सकता है।

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