Dollar vs Rupee: रुपया 90.40 के स्तर पर खुला, टैरिफ में कमी से विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ में कटौती के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 1.2% मजबूत हुआ। निवेशकों ने स्वागत किया, शेयर बाजार और निर्यात प्रभावित।

अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ में भारी कटौती कर 50% से घटाकर 18% कर दिया। इस फैसले से रुपया डॉलर के मुकाबले 1.2% मजबूत हुआ और निवेशकों तथा बाजार में सकारात्मक धारणा पैदा हुई।

Dollar vs Rupee: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए हाई टैरिफ में भारी कटौती करने के बाद भारतीय रुपया जोरदार तेजी के साथ उभरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान के बाद टैरिफ दर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। इस फैसले को निवेशक और बाजार व्यापक स्तर पर स्वागत कर रहे हैं। टैरिफ में कटौती से भारत को महत्वपूर्ण आर्थिक राहत मिली है और इसका असर रुपये और शेयर बाजार दोनों पर दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ मुद्रा को मजबूत करेगा, बल्कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाएगा। लंबे समय से चर्चा में रहे व्यापार मुद्दों पर स्पष्टता आने से भारतीय बाजार की धारणा मजबूत हुई है और एफआईआई निवेश की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

रुपया 1.2 प्रतिशत की छलांग

हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 3 फरवरी 2026 की सुबह भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 1.2 प्रतिशत मजबूत होकर 90.40 के स्तर पर खुला। यह पिछले बंद स्तर 91.49 की तुलना में 119 पैसे की मजबूती को दर्शाता है।

विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबारियों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ में कटौती ने वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत कर दी है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों के भारत में वापस आने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 90.30 पर खुला। डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दिखाता है, 0.20 प्रतिशत गिरकर 97.43 पर आ गया। वहीं, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

शेयर बाजार में सकारात्मक प्रभाव

टैरिफ कटौती का असर शेयर बाजार पर भी नजर आया। बाजार में सुधार और सकारात्मक धारणा के चलते प्रमुख इंडेक्स में उछाल देखने को मिला। हालांकि, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,832.46 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ में कटौती ने भारतीय निर्यातकों के लिए माहौल आसान कर दिया है। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी पकड़ मजबूत होगी।

अमेरिका-भारत ट्रेड डील और टैरिफ का इतिहास

भारत पर अमेरिकी टैरिफ का इतिहास काफी लंबा और जटिल रहा है। पहले 25 प्रतिशत का बेस टैरिफ लगाया गया था। इसके अलावा रूस से कच्चे तेल की खरीद के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ भी लागू किया गया था। इस तरह कुल मिलाकर भारत पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क बोझ आ गया था।

टैरिफ के चलते भारतीय निर्यातकों को वित्तीय रूप से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हुई। लंबे समय तक कई दौर की बातचीत और व्यापार समझौते की चर्चा चली, लेकिन ठोस नतीजे नहीं निकल पाए। अब टैरिफ में कटौती से निर्यातकों को राहत मिलने की संभावना है।

निवेशकों की प्रतिक्रिया

निवेशक और व्यापारियों ने अमेरिकी फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि टैरिफ में कटौती से निर्यात बढ़ने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा का दबाव भी कम होगा। निर्यातक अब अपने प्रोडक्ट्स को वैश्विक बाजार में बेहतर दरों पर बेच सकते हैं।

विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार, रुपये की मजबूती से आयातक भी लाभान्वित होंगे। डॉलर की तुलना में रुपया मजबूत होने से भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लाभ मिलेगा और आर्थिक स्थिति स्थिर बनी रहेगी।

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