Defence Research and Development Organisation और Indian Navy ने युद्धपोतों के अंतरराष्ट्रीय स्तर के परीक्षण सफल किए और स्वदेशी बख्तरबंद प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती दी।
DRDO भारतीय युद्धपोत परीक्षण में Defence Research and Development Organisation और Indian Navy ने मिलकर फ्रंटलाइन युद्धपोतों के लिए उन्नत हाइड्रोडायनामिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। 25 अप्रैल 2026 को घोषित इस उपलब्धि में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रदर्शन की पुष्टि हुई। साथ ही महाराष्ट्र में अत्याधुनिक ‘क्रूलेस बुर्ज’ वाले स्वदेशी बख्तरबंद वाहनों का अनावरण किया गया, जो आधुनिक युद्धक्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को नई मजबूती देते हैं।
आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: DRDO और नौसेना की बड़ी उपलब्धि

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाई है, जहां DRDO और भारतीय नौसेना ने मिलकर फ्रंटलाइन युद्धपोतों के लिए उन्नत हाइड्रोडायनामिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। यह उपलब्धि देश की रक्षा तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
इस परियोजना में नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) और नौसेना के डिजाइन ब्यूरो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परीक्षणों के जरिए युद्धपोतों की कार्यक्षमता, गति और समुद्री परिस्थितियों में उनकी क्षमता का गहन मूल्यांकन किया गया।
इंटरनेशनल स्टैंडर्ड पर खरे उतरे भारतीय युद्धपोत
परीक्षण के दौरान जहाजों के डिजाइन और प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तुलना की गई। इसमें प्रतिरोध, प्रणोदन, गतिशीलता और समुद्री अनुकूलता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया, जिनमें भारतीय तकनीक ने उच्च स्तर की सटीकता और विश्वसनीयता दिखाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से भारत की नौसेना को और अधिक ताकत मिलेगी और स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। यह उपलब्धि “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी मजबूती देती है।
आधुनिक आर्मर्ड प्लेटफॉर्म का अनावरण
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में DRDO ने सेना के लिए दो अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहनों का अनावरण किया है, जिन्हें आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इन प्लेटफॉर्म्स में 30mm का ‘क्रूलेस बुर्ज’ और 7.62mm गन लगाई गई है, जिससे इनकी मारक क्षमता काफी बढ़ जाती है। ये वाहन टैंक रोधी मिसाइल दागने में भी सक्षम हैं, जो इन्हें युद्ध के मैदान में बेहद प्रभावी बनाते हैं।
इसके साथ ही इन वाहनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये उबड़-खाबड़ रास्तों और पानी से भरे इलाकों में भी आसानी से चल सकें। वर्तमान में इनमें करीब 65% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसे भविष्य में 90% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। STANAG 4 और 5 स्तर की सुरक्षा के साथ ये प्लेटफॉर्म सैनिकों को दुश्मन के हमलों और विस्फोटों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेंगे।








