इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो और पूर्व चीनी राजदूत ने जेल की सजा से मांगी राहत

इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो और पूर्व चीनी राजदूत कै रुनगुओ ने 76 मिलियन डॉलर की रिश्वत मामले में मिली पांच साल की सजा के खिलाफ राहत मांगी है।

इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो और पूर्व चीनी राजदूत कै रुनगुओ ने 76 मिलियन डॉलर की रिश्वत मामले में मिली पांच साल की सजा के खिलाफ शीर्ष अदालत से राहत मांगी है। मामला कोका कोडो सिंक्लेयर जलविद्युत परियोजना से जुड़ा है।

क्विटो: इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो और चीन के पूर्व राजदूत कै रुनगुओ ने 76 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत योजना से जुड़े मामले में मिली पांच साल की सजा से बचने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है। दोनों ने गुरुवार को अदालत से अपनी सजा में राहत देने की मांग की। यह मामला इक्वाडोर की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना कोका कोडो सिंक्लेयर के लिए हुए ठेकों और उनसे जुड़े कथित रिश्वत भुगतान से संबंधित है। परियोजना का निर्माण चीन की सरकारी कंपनी सिनोहाइड्रो ने किया था।

पूर्व राष्ट्रपति पर पद के दुरुपयोग का आरोप

इक्वाडोर की नेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की तीन सदस्यीय पीठ ने मोरेनो को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराया। न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से माना कि मोरेनो ने 2007 से 2013 के बीच उपराष्ट्रपति रहते हुए कोका कोडो सिंक्लेयर परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था कराने में मदद करने के लिए अपने पद का इस्तेमाल किया।

मोरेनो ने 2017 में इक्वाडोर के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, परियोजना से जुड़े ठेकों और वित्तपोषण की प्रक्रिया में उनके प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, दोषसिद्धि के बावजूद मोरेनो को हिरासत में नहीं लिया गया है और वह इक्वाडोर में ही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगर उनकी दोषसिद्धि बरकरार रहती है, तो पैराप्लेजिक होने के कारण उन्हें जेल भेजने के बजाय घर में ही सजा काटने की अनुमति मिल सकती है।

अदालत उनकी याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई करेगी। यदि उनकी मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो जेल की सजा निलंबित हो सकती है और उसकी जगह नियमित रूप से रिपोर्ट करने जैसी शर्तें लागू की जा सकती हैं।

मोरेनो ने रिश्वत लेने से किया इनकार

फैसला सुनाए जाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मोरेनो ने कहा कि उन्हें सिनोहाइड्रो से एक भी पैसा नहीं मिला। उन्होंने मामले में खुद को आरोपी मानने पर भी सवाल उठाया।

मोरेनो ने इस मामले को पूर्व राष्ट्रपति राफेल कोरिया से जुड़े राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में भी बताया है। कोरिया ने उन्हें अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में दोनों के राजनीतिक संबंध खराब हो गए। मोरेनो के दक्षिणपंथ की ओर बढ़ने और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच की अनुमति देने के बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़े।

कोरिया को 2020 में अनुपस्थिति में दोषी ठहराया गया था और वह बेल्जियम में रहते हैं।

कोका कोडो सिंक्लेयर परियोजना का विवाद

मामले के केंद्र में मौजूद कोका कोडो सिंक्लेयर इक्वाडोर में अब तक निर्मित सबसे महंगी जलविद्युत परियोजना है। यह परियोजना अमेजन बेसिन में राजधानी क्विटो से करीब 100 किलोमीटर पूर्व स्थित है।

सिनोहाइड्रो ने 2009 में इस परियोजना के लिए 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर का अनुबंध हासिल किया था। अगले वर्ष चीन के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ने करीब 1.68 अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया। इस वित्तीय व्यवस्था की शर्तों में चीनी कंपनी द्वारा परियोजना का निर्माण करना शामिल था।

यह समझौता चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की शुरुआत से चार साल पहले हुआ था। बाद में इसे बेल्ट एंड रोड के तहत निवेश रणनीति के हिस्से के तौर पर पेश किया गया। यह परियोजना दक्षिण अमेरिका में इस मॉडल के लिए एक तरह का उदाहरण भी बनी।

बांध की क्षमता और तकनीकी खामियों पर सवाल

कोका कोडो सिंक्लेयर परियोजना बाद में चीन समर्थित बुनियादी ढांचा निवेश मॉडल से जुड़े जोखिमों के उदाहरण के तौर पर भी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, बांध अपनी पूरी 1,500 मेगावाट क्षमता पर कभी संचालित नहीं हो सका।

परियोजना में शुरुआत से ही खामियां मौजूद होने की बात सामने आई। इक्वाडोर की एक संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 तक इसमें 17,499 दरारें दर्ज की गई थीं।

इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो और पूर्व चीनी राजदूत ने जेल की सजा से मांगी राहत

इसके बावजूद यह बांध इक्वाडोर की बिजली व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। देश को अपनी कुल बिजली जरूरतों के करीब एक चौथाई के लिए इसी बांध पर निर्भर बताया गया है। 2024 में सूखे के दौरान बांध का कमजोर उत्पादन देश में बिजली संकट बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। उस दौरान कई जगहों पर प्रतिदिन 14 घंटे तक बिजली कटौती हुई थी।

पूर्व चीनी राजदूत कै रुनगुओ की भूमिका

कै रुनगुओ ने 2007 से 2011 तक इक्वाडोर में चीन के राजदूत के रूप में काम किया था। सिनोहाइड्रो द्वारा परियोजना का ठेका हासिल करने के कुछ समय बाद इक्वाडोर के तत्कालीन राष्ट्रपति राफेल कोरिया ने उन्हें सम्मानित भी किया था।

राजदूत पद छोड़ने के कुछ ही महीनों बाद कै सिनोहाइड्रो से जुड़ गए। वर्ष 2013 में वह उस कंपनी के कानूनी प्रतिनिधि बने, जिसके साथ उन्होंने राजनयिक के रूप में काम किया था।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि कै ने सरकारी पद पर रहते हुए मोरेनो से मुलाकात की, परियोजना के वित्तपोषण को आगे बढ़ाने में मदद की और बाद में कथित भुगतान की व्यवस्था कराने में भूमिका निभाई।

कै रुनगुओ को भी पांच साल की सजा सुनाई गई है। सिनोहाइड्रो के पूर्व प्रतिनिधि यांग हुइजू और सोंग डोंगशेंग तथा मोरेनो के मित्र कोंटो पातिनो को भी पांच-पांच साल की सजा मिली।

कै को करीब 2016 के बाद से इक्वाडोर में सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।

21 में से 20 आरोपियों को दोषी ठहराया गया

मामले में कुल 21 आरोपियों में से 20 को दोषी ठहराया गया। दोषी ठहराए गए लोगों में मोरेनो की पत्नी, बेटी, दो भाई और एक भाभी भी शामिल हैं। उन्हें मामले में सहयोगी के रूप में सजा सुनाई गई।

मामले में सार्वजनिक पद संभाल चुके लोगों, जिनमें मोरेनो भी शामिल हैं, को जीवनभर सार्वजनिक सेवा से प्रतिबंधित किया गया। अदालत द्वारा निर्धारित कुल मुआवजे की राशि 163 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक बताई गई है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, कथित रिश्वत भुगतान 2009 से 2018 के बीच किए गए और इनकी कुल राशि करीब 76 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। यह परियोजना के अनुबंध मूल्य का लगभग 4 प्रतिशत था।

भुगतान का कथित तरीका

अभियोजन पक्ष के अनुसार, कथित भुगतान का अधिकांश हिस्सा मोरेनो के मित्र कोंटो पातिनो से जुड़ी एक कंपनी और पनामा में मौजूद खातों के जरिए भेजा गया। इन भुगतानों को कथित तौर पर कंसल्टेंसी फीस के रूप में दिखाया गया था।

मोरेनो ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें सिनोहाइड्रो से कोई पैसा नहीं मिला।

अब इस मामले में इक्वाडोर की सर्वोच्च अदालत की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। 7 सितंबर को होने वाली सुनवाई में मोरेनो की सजा को लेकर उनकी मांग पर विचार किया जाएगा। वहीं, मामले में पूर्व चीनी राजदूत कै रुनगुओ की ओर से भी जेल की सजा से राहत की मांग की गई है।

यह मामला इक्वाडोर में चीन समर्थित बड़े बुनियादी ढांचा निवेश, सरकारी ठेकों, कथित भ्रष्टाचार और परियोजना की तकनीकी कमियों को लेकर लंबे समय से उठते सवालों को एक साथ सामने लाता है। हालांकि, अदालत में लंबित अपीलों और दलीलों के अंतिम परिणाम के बाद ही दोनों आरोपियों की सजा की स्थिति स्पष्ट होगी।

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