ईरान का बड़ा फैसला, EU देशों की नौसेना और वायु सेना को ‘आतंकी संगठन’ घोषित

ईरान ने EU देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकी संगठन घोषित किया। 2019 में IRGC पर EU कार्रवाई के जवाब में लिया गया फैसला, मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव।

ईरान ने EU सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकी संगठन घोषित किया है। तेहरान ने इसे 2019 में IRGC पर EU की कार्रवाई का जवाब बताया। इस फैसले से पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।

World News: मध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। ईरान ने यूरोपीय संघ यानी EU के सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को ‘आतंकी संगठन’ घोषित कर दिया है। तेहरान का कहना है कि यह कदम 2019 में की गई कार्रवाई का जवाब है, जब EU ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकवादी संगठन की सूची में डाला था।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर अपने फैसले की वजह भी स्पष्ट की है। इस कदम से पश्चिमी देशों और ईरान के बीच पहले से चल रहा तनाव और बढ़ सकता है।

2019 की कार्रवाई का जवाब

ईरान ने साफ कहा है कि उसका यह फैसला 2019 की उस कार्रवाई के जवाब में है, जब यूरोपीय संघ ने IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। ईरान का आरोप है कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ था। तेहरान का मानना है कि उस समय EU ने बिना वैध आधार के एक संप्रभु देश की सैन्य इकाई को आतंकी सूची में डाल दिया।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि EU का फैसला संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों के विपरीत था। इसी के आधार पर अब ईरान ने पारस्परिक कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।

कानून का हवाला देकर लिया निर्णय

ईरान ने अपने फैसले के समर्थन में देश के कानून का हवाला दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2019 में अमेरिका द्वारा IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने के बाद एक पारस्परिक कार्रवाई संबंधी कानून पारित किया गया था। उसी कानून के अनुच्छेद 7 के तहत यह कदम उठाया गया है।

इस प्रावधान में कहा गया है कि जो भी देश अमेरिका के फैसले का अनुसरण करेगा या उसका समर्थन करेगा, उसके खिलाफ समान कार्रवाई की जाएगी। ईरान का कहना है कि यूरोपीय संघ ने अमेरिका के निर्णय का समर्थन किया, इसलिए अब जवाबी कदम जरूरी था।

IRGC को ISIS और अल कायदा की श्रेणी में रखा गया

ईरान का बड़ा फैसला, EU देशों की नौसेना और वायु सेना को ‘आतंकी संगठन’ घोषित

यूरोपीय संघ द्वारा IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने के बाद उसे इस्लामिक स्टेट और अल कायदा जैसे संगठनों की श्रेणी में रखा गया था। इस निर्णय ने ईरान को कड़ा संदेश दिया था। तेहरान ने इसे अपनी सैन्य और राजनीतिक संप्रभुता पर हमला माना।

ईरान का कहना है कि उसकी सैन्य इकाई की तुलना आतंकवादी संगठनों से करना न केवल अपमानजनक है बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए भी नुकसानदेह है। अब EU देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकी संगठन घोषित कर ईरान ने उसी तरह की सख्त प्रतिक्रिया दी है।

IRGC की भूमिका

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की स्थापना 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद हुई थी। इसका उद्देश्य शिया धार्मिक व्यवस्था की रक्षा करना था। समय के साथ IRGC ने ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सैन्य ढांचे में मजबूत पकड़ बना ली।

यह संगठन देश के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों की निगरानी भी करता है। IRGC को ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाइयों में गिना जाता है। इसी वजह से जब इसे आतंकी संगठन घोषित किया गया तो तेहरान ने इसे राष्ट्रीय सम्मान का मुद्दा बनाया।

अमेरिका और इजरायल का दबाव

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान को अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम बंद करना चाहिए। पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने कई बार चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने समझौते का रास्ता नहीं अपनाया तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

ट्रंप की चेतावनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान 10 से 15 दिनों के भीतर परमाणु समझौते पर अमेरिका के साथ सहमति बनाए, अन्यथा उसे दुर्भाग्यपूर्ण परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

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