ईरान की चेतावनी: हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों को निशाना, मिडिल ईस्ट में तनाव

ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी एयरबेस निशाना, CIA पूर्व अफसर ने हमले की संभावित तारीख बताई। वैश्विक सुरक्षा पर असर संभव।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में सैन्य तैयारी तेज की है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि हमला होने पर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। CIA पूर्व अफसर ने संभावित हमले की तारीख भी बताई।

World News: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य तैयारी तेज कर दी है, जबकि ईरान ने अपने संयुक्त राष्ट्र मिशन के जरिए चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका हमला करता है, तो तेहरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी एयरबेस को टारगेट बनाएगा। इस बीच, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने संभावित हमले की तारीख का भी संकेत दिया है।

ईरान-यूएस विवाद की जड़ अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियार और बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को लेकर है। अमेरिका का दावा है कि ईरान इन कार्यक्रमों का उपयोग क्षेत्रीय ताकत बढ़ाने और आतंकवादी समूहों जैसे हमास का समर्थन करने के लिए कर रहा है। वहीं, ईरान इसे अपना संप्रभु अधिकार बताता है और अमेरिकी दखलअंदाजी को खारिज करता है।

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में सैन्य तैयारी तेज की

यूएस ने हाल ही में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को ईरान के आसपास तैनात किया है। इन पर F-22 रैप्टर और F-35 जैसे 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स मौजूद हैं। इसके साथ ही C-17 ग्लोबमास्टर जैसे बड़े सैन्य मालवाहक विमान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी एयरबेस पर हथियार और आवश्यक सामग्री उतार रहे हैं। इस तरह की तैयारी से संकेत मिलता है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कतर के अल उदैद एयरबेस से सैनिकों और उपकरणों को ट्रांसफर किया जा रहा है। इसके अलावा, बहरीन, इराक, सीरिया, कुवैत, यूएई, जॉर्डन और सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर बदलाव और अतिरिक्त सैन्य बल तैनात किए गए हैं। यह स्थिति मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा रही है।

CIA के पूर्व अफसर जॉन किरियाकू का दावा

ईरान की चेतावनी: हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों को निशाना, मिडिल ईस्ट में तनाव

CIA के पूर्व अफसर जॉन किरियाकू ने न्यूयॉर्क के जूलियन डोरे पॉडकास्ट में दावा किया कि अमेरिका अगले हफ्ते की शुरुआत में ईरान पर सैन्य हमला करने के अंतिम फैसले पर पहुंचेगा। किरियाकू ने बताया कि उनके एक दोस्त, जो खुद पूर्व CIA अफसर हैं और व्हाइट हाउस में अधिकारियों से संपर्क रखते हैं, ने संकेत दिया कि फैसला सोमवार 23 फरवरी या मंगलवार 24 फरवरी को लिया जा सकता है।

किरियाकू ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक व्यापक प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। इस प्रस्ताव में बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को रोकना, यूरेनियम संवर्धन को बंद करना और हमास जैसे समूहों को समर्थन देने से रोकना शामिल है। हालांकि, यह डेडलाइन अमेरिकी सेना के हमले को टालने की गारंटी नहीं देती। उनका कहना है कि यह केवल रणनीतिक कदम है, और 10 दिन या दो सप्ताह बाद भी हमला हो सकता है।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने अमेरिका के संभावित हमले को लेकर अपने मिसाइल और सैन्य बलों की तैयारी तेज कर दी है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमला होता है, तो मिडिल ईस्ट में सभी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। ईरानी अधिकारी क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने और एयरक्राफ्ट कैरियर को ईरान से सुरक्षित दूरी पर रखने की रणनीति अपनाए हुए हैं।

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से यह भी कहा कि अगर किसी भी अमेरिकी ठिकाने पर हमला होता है, तो उसका जवाब तत्काल और निर्णायक होगा। इस चेतावनी ने मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव

इस बढ़ते तनाव का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक ही सीमित नहीं है। मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ईरानी जवाबी तैयारी के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल और व्यापारिक रूट्स पर अनिश्चितता पैदा होने की संभावना है।

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