कुवैत एयरपोर्ट पर कथित ईरानी ड्रोन हमले के बाद खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने ईरान की कड़ी आलोचना की है। हमले में एक भारतीय की मौत और कई घायल हुए। ट्रम्प ने कहा कि ईरान पर कार्रवाई का फैसला उनका था, जिससे तनाव बढ़ गया है।
ईरान/अमेरिका वॉर: पश्चिम एशिया एक बार फिर गंभीर भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में पहुंच गया है, जहां खाड़ी देशों और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हाल ही में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इन्हें “कायराना कार्रवाई” बताया है। GCC ने कहा है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्र की स्थिरता, सुरक्षा और संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा हैं।
Gulf Cooperation Council में शामिल देश—कुवैत, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात—ने एकजुट होकर ईरान की भूमिका पर चिंता जताई है।
कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, एक भारतीय नागरिक की मौत
रिपोर्टों के अनुसार, कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इस हमले में एयरपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचा और कई यात्री घायल हुए।
हादसे में एक भारतीय नागरिक की मौत की भी पुष्टि हुई है, जबकि 60 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। सुरक्षा कारणों से उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात प्रभावित हुआ।
कुवैत प्रशासन ने हमले का वीडियो जारी कर दावा किया है कि हमले का उद्देश्य नागरिक और रणनीतिक ढांचे को नुकसान पहुंचाना था। हालांकि ईरान की ओर से इस हमले की जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
Kuwait ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा उल्लंघन बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
ईरान का बयान: जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
Iran ने कड़े शब्दों में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी भी खाड़ी देश की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए किया गया, तो वह जवाबी हमला करेगा।
ईरान का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। तेहरान ने खाड़ी देशों पर आरोप लगाया है कि वे पश्चिमी देशों और इजराइल को सैन्य सहयोग दे रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है।
इस बयान के बाद खाड़ी देशों और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
खाड़ी देशों की कड़ी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव
खाड़ी सहयोग परिषद ने संयुक्त बयान जारी करते हुए ईरान पर अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। परिषद के महासचिव ने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्र में शांति प्रयासों को कमजोर करते हैं।
खाड़ी देश लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग कर रहे हैं कि ईरान पर दबाव बनाया जाए ताकि ऐसे हमलों को रोका जा सके।
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ट्रम्प का बयान: ईरान पर कार्रवाई मेरा निर्णय था
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई का निर्णय पूरी तरह उनका अपना था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी ने प्रभावित नहीं किया।
ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने उन पर कोई दबाव नहीं बनाया। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है।
इजराइल-लेबनान संघर्ष और हिजबुल्लाह की भूमिका
इस पूरे क्षेत्रीय संकट के बीच Israel और Lebanon के बीच भी तनाव बढ़ता जा रहा है।
लेबनान स्थित सशस्त्र संगठन Hezbollah ने कई हमलों का दावा किया है, जबकि इजराइल ने जवाबी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा हालात बिगड़ते जा रहे हैं और कई क्षेत्रों में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं।
सीजफायर और तेल बाजार पर असर
अमेरिका की मध्यस्थता से इजराइल और लेबनान के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनी है। इस समझौते के बाद वैश्विक तेल बाजार में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और स्थिरता आ सकती है। निवेशक फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
अमेरिका की रणनीति और ट्रम्प का रुख
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि यदि किसी अमेरिकी सैनिक की मौत ईरान से जुड़े हमलों में होती है तो वह सीजफायर समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि, फिलहाल अमेरिका की रणनीति बड़े युद्ध से बचने और क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित रखने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाशिंगटन फिलहाल “कंट्रोल्ड एस्केलेशन” की नीति अपना रहा है।









