ईरान संकट के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव, विकल्प खोज रहे कई देश

ऊर्जा संकट के बीच एशिया-अफ्रीका परमाणु ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं। अमेरिका-रूस प्रतिस्पर्धा तेज, विशेषज्ञ इसे जोखिमपूर्ण और दीर्घकालिक विकल्प मानते हैं।

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच कई देश अब परमाणु ऊर्जा को वैकल्पिक समाधान के रूप में तेजी से अपनाने पर विचार कर रहे हैं। एशिया और अफ्रीका में नई परमाणु योजनाएं तेज हुई हैं, जबकि अमेरिका और रूस के बीच इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है। हालांकि विशेषज्ञ इसे दीर्घकालिक और जोखिमपूर्ण विकल्प मान रहे हैं।

परमाणु ऊर्जा वैश्विक बदलाव: ईरान युद्ध के बाद पैदा हुए ऊर्जा संकट के चलते एशिया और अफ्रीका के कई देश वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यह स्थिति 2026 में वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अस्थिरता के बीच देखी जा रही है, जहां दक्षिण कोरिया, ताइवान, केन्या और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश परमाणु ऊर्जा योजनाओं को मजबूत कर रहे हैं। अमेरिका और रूस भी अफ्रीका में परियोजनाओं के जरिए प्रभाव बढ़ा रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे दीर्घकालिक लेकिन जोखिमपूर्ण समाधान मान रहे हैं।

ऊर्जा संकट से बढ़ी परमाणु ऊर्जा की मांग

ईरान जंग के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका सबसे अधिक असर एशिया और अफ्रीका पर पड़ा है। इन क्षेत्रों के कई देश अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश में परमाणु ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया जैसे देश उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं, जबकि ताइवान अपने बंद पड़े रिएक्टरों को फिर से शुरू करने की योजना पर विचार कर रहा है। अफ्रीका में केन्या, रवांडा और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भी परमाणु ऊर्जा योजनाओं को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।

ईरान संकट के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव, विकल्प खोज रहे कई देश

वैश्विक स्तर पर बढ़ी परमाणु योजनाएं और प्रतिस्पर्धा

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, दुनिया के 31 देश पहले से परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं, जो वैश्विक बिजली उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं 40 से अधिक देश इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

रूस और अमेरिका के बीच अफ्रीका में परमाणु परियोजनाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है। रूस कई देशों के साथ बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जबकि अमेरिका भी मॉड्यूलर रिएक्टर और सहयोग कार्यक्रमों के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।

दीर्घकालिक समाधान या नया जोखिम?

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु ऊर्जा तत्काल समाधान नहीं है, क्योंकि इसमें वर्षों लग सकते हैं। इसके बावजूद कई देश इसे ऊर्जा सुरक्षा के स्थायी विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ और पर्यावरण समूह इसे जोखिम भरा भी मानते हैं। उनका कहना है कि यह यूरेनियम पर निर्भरता बढ़ाता है और युद्ध या संघर्ष की स्थिति में परमाणु संयंत्र खतरे में आ सकते हैं, जैसा कि अतीत में देखा गया है।

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