देश में इस वर्ष मानसून को लेकर चिंता बढ़ गई है। India Meteorological Department (IMD) ने अनुमान जताया है कि जून महीने में सामान्य से लगभग 43% कम वर्षा हो सकती है, जिससे कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है। कम बारिश का असर कृषि, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
नई दिल्ली: भारत में संभावित कम मानसूनी वर्षा और अल नीनो (El Niño) प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जिससे कृषि क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने देश के 315 संवेदनशील जिलों को निगरानी सूची में शामिल किया है, जिनमें से 111 जिलों को “उच्च जोखिम” वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
कम बारिश और सूखे का खतरा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के शुरुआती आकलन के अनुसार, इस मानसून सीजन में वर्षा सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम रह सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं। अल नीनो प्रभाव के कारण समुद्री सतह के तापमान में बदलाव होता है, जिसका सीधा असर वैश्विक मौसम पैटर्न और विशेष रूप से भारतीय मानसून पर पड़ता है।
315 जिलों पर विशेष निगरानी
केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 315 जिलों को विशेष निगरानी सूची में रखा है। इनमें से:
- 111 जिले उच्च जोखिम श्रेणी में (जहां सिंचाई सुविधा 25% से कम है)
- 76 जिले मध्यम जोखिम श्रेणी में (25% से 50% सिंचाई सुविधा)
- 128 जिले अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्र (बेहतर सिंचाई ढांचे के साथ)
इन जिलों में कृषि गतिविधियों, बुवाई और जल संसाधनों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
निगरानी और आपात व्यवस्था के लिए विशेष तंत्र
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सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए दो प्रमुख संस्थागत तंत्र बनाए हैं—
- El Niño Monitoring Cell (अल नीनो मॉनिटरिंग सेल)
- Crop Weather Watch Group (क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप)
इनका उद्देश्य मौसम की स्थिति, बुवाई के पैटर्न और जल उपलब्धता पर रियल-टाइम निगरानी करना है। कृषि मंत्रालय ने सभी प्रभावित जिलों के लिए जिला कृषि आपातकालीन योजनाएं (District Agriculture Contingency Plans – DACP) तैयार की हैं। इन योजनाओं में वैकल्पिक फसलों, जल संरक्षण तकनीकों, सिंचाई प्रबंधन और किसानों की आय सुरक्षा से जुड़े उपाय शामिल हैं।
राज्यों में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उच्च जोखिम वाले जिले मुख्य रूप से 12 राज्यों में स्थित हैं: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा। इन राज्यों में कृषि पर निर्भर आबादी बड़ी है, जिससे कम वर्षा की स्थिति में आर्थिक प्रभाव और अधिक व्यापक हो सकता है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में मौजूदा हालात, संभावित जोखिम और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे स्थानीय स्तर पर तैयारियों को तेज करें और जिला आपातकालीन योजनाओं (DACP) को तुरंत प्रभावी रूप से लागू करें।
“चुनौती को अवसर में बदलने” का दृष्टिकोण
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह समय सामूहिक तैयारी और समन्वय का है। उन्होंने जोर दिया कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान, जिला प्रशासन और किसान मिलकर काम करें, तो अल नीनो की चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उनके अनुसार, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, तकनीकी सलाह और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं मिलकर किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर सकती हैं।








