भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापार, AI, सेमीकंडक्टर, 6G, इलेक्ट्रिक वाहन और वैश्विक सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है। दोनों पक्ष इस रणनीतिक साझेदारी को भविष्य की आर्थिक और तकनीकी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं।
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (European Union-EU) ने व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई है। ब्रुसेल्स में आयोजित EU–India Trade and Technology Council (TTC) की तीसरी बैठक में दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 6G नेटवर्क, क्वांटम तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), अनुसंधान और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब यूरोपीय संघ अपनी आर्थिक और तकनीकी रणनीति को अधिक विविध बनाना चाहता है और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने के लिए नए साझेदारों की तलाश कर रहा है।
भारत बना अमेरिका के बाद दूसरा प्रमुख रणनीतिक साझेदार
बैठक के बाद दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की भूमिका को और व्यापक बनाया जाएगा। इस स्तर की औपचारिक व्यापार एवं तकनीकी साझेदारी अमेरिका के बाद भारत के साथ स्थापित की गई है, जो दोनों पक्षों के बढ़ते विश्वास और रणनीतिक महत्व को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं बल्कि वैश्विक तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने लिया हिस्सा
ब्रुसेल्स में आयोजित बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भाग लिया। यूरोपीय आयोग की ओर से हेना विर्क्कुनेन, मारोश शेफचोविच और एकातेरिना ज़ाहारिएवा ने प्रतिनिधित्व किया। बैठक में दोनों पक्षों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, तकनीकी सहयोग और नवाचार को लेकर विस्तृत चर्चा की।
किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग?
बैठक में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त पहल पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने Horizon Europe अनुसंधान कार्यक्रम में भारत की संभावित भागीदारी पर बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग तकनीक पर संयुक्त केंद्र स्थापित करने, हाई-टेक स्टार्टअप गठबंधन बनाने तथा सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुपरकंप्यूटिंग, क्वांटम तकनीक और 6G नेटवर्क जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई।
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सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर विशेष जोर
भारत और यूरोपीय संघ ने दवा उद्योग, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाने पर भी सहमति व्यक्त की। हाल के वर्षों में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में आई चुनौतियों ने यह स्पष्ट किया है कि विश्व अर्थव्यवस्था को अधिक विविध और भरोसेमंद साझेदारों की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में भारत को वैश्विक विनिर्माण और सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है।
2022 में हुई थी परिषद की शुरुआत
EU–India Trade and Technology Council की स्थापना वर्ष 2022 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर की गई थी। इस परिषद का उद्देश्य व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नई तकनीकों और आर्थिक सहयोग को संस्थागत रूप देना है। अब दोनों पक्षों ने वर्ष के अंत तक परिषद की भूमिका को और विस्तारित करने पर सहमति जताई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका
यूरोपीय संघ भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक मानता है। भारत की विशाल आबादी, तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल इकोसिस्टम, मजबूत औद्योगिक क्षमता और कुशल मानव संसाधन उसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक तकनीकी उत्पादन, डिजिटल सेवाओं और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है साझेदारी
भारत और यूरोपीय संघ दोनों नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था, सुरक्षित आपूर्ति शृंखला और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के साथ विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है। विश्लेषकों के अनुसार, यही रणनीतिक संतुलन भारत को यूरोप के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बनाता है।
स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
नई साझेदारी के तहत भारत और यूरोपीय संघ हाई-टेक स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी काम करेंगे। इससे अनुसंधान, निवेश, नई तकनीकों के विकास और डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को वैश्विक बाजार में नई संभावनाएं प्रदान करेगा।
भविष्य की दिशा
भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल परिवर्तन, हरित ऊर्जा, अनुसंधान, उन्नत विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक साझेदारी का आधार बनेगा। हालांकि दोनों पक्षों के अपने-अपने आर्थिक और रणनीतिक हित हैं, फिर भी साझा सहयोग के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।









