पटना में प्रहरी अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार शर्मा ने FCRA संशोधन बिल 2026 पर चर्चा करते हुए विदेशी फंड के दुरुपयोग पर निगरानी को जरूरी बताया। उन्होंने प्रस्तावित प्रावधानों में स्पष्टता की कमी और संस्थाओं पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
पटना: नेशनल यूथ अवार्डी और प्रहरी अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार शर्मा ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने विदेशी फंड के दुरुपयोग पर नियंत्रण को जरूरी बताते हुए कहा कि संशोधन में कुछ प्रावधानों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। उनका कहना है कि इससे धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं के संचालन पर असर से जुड़े सवाल उठते हैं।
FCRA में सख्ती के साथ स्पष्टता भी जरूरी
प्रहरी अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार शर्मा ने FCRA कानून के प्रावधानों और प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा करते हुए कहा कि विदेशी अंशदान के इस्तेमाल को लेकर शुरुआत से ही निगरानी और दुरुपयोग से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। अलग-अलग सरकारों ने समय-समय पर कानून में बदलाव कर पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि विदेशी स्रोतों से मिलने वाली राशि का किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा गलत इस्तेमाल नहीं होता, ऐसा दावा करना मुश्किल है। ऐसे मामलों में सरकार के पास निगरानी और कार्रवाई का अधिकार होना जरूरी है। हालांकि, उनका कहना है कि सख्ती के साथ नियमों में पर्याप्त स्पष्टता भी होनी चाहिए, ताकि वैध गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं को अनावश्यक परेशानी न हो।
धार्मिक और शिक्षण संस्थानों को लेकर उठे सवाल
वीरेंद्र कुमार शर्मा ने FCRA संशोधन विधेयक 2026 के उन प्रावधानों पर सवाल उठाया, जिनके तहत किसी संगठन का FCRA पंजीकरण समाप्त होने, रद्द होने, सरेंडर करने या नवीनीकरण आवेदन खारिज होने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे बनाई गई संपत्तियों को सरकार द्वारा गठित प्राधिकरण के नियंत्रण में लेने का प्रावधान बताया गया है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी धार्मिक स्थल या भवन के निर्माण में विदेशी अंशदान के साथ स्थानीय चंदे का भी इस्तेमाल हुआ है, तो ऐसी संपत्ति के प्रबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इसी तरह यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रस्तावित प्राधिकरण में कौन लोग शामिल होंगे और धार्मिक संस्थानों के संचालन की व्यवस्था किस तरह तय की जाएगी।
शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों को लेकर भी उन्होंने कई सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसी संस्था को सरकारी प्राधिकरण के अधीन किया जाता है तो वहां काम करने वाले कर्मचारियों, शिक्षकों और उन सेवाओं पर निर्भर लोगों के भविष्य को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
विदेशी फंड से जुड़े आंकड़ों का भी किया उल्लेख
वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि FCRA से मिलने वाले विदेशी अंशदान का बड़ा हिस्सा धार्मिक, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों में खर्च होने का दावा किया जाता है। ऐसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आम लोग प्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं। इसलिए कानून में बदलाव से पहले इससे जुड़े सभी पक्षों के सवालों पर पर्याप्त चर्चा जरूरी है।
उन्होंने गृह मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान मिला। उनके अनुसार, इतनी बड़ी राशि को देखते हुए इसके उपयोग और निगरानी की व्यवस्था का मजबूत होना जरूरी है।
बैंक खाते और फंड की निगरानी पहले से सख्त
विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए निर्धारित बैंकिंग व्यवस्था का पालन करना पहले से जरूरी है। सरकार को विदेशी स्रोतों से आने वाले फंड से संबंधित जानकारी उपलब्ध होती है। ऐसे में निगरानी तंत्र को और मजबूत करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो।
वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि विदेशी फंड के दुरुपयोग पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन केवल सख्ती बढ़ाना ही समाधान नहीं होना चाहिए। नियम ऐसे हों जिनसे पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे और वैध सामाजिक, स्वास्थ्य तथा शिक्षा संबंधी गतिविधियां प्रभावित न हों। उनके अनुसार, संशोधन से जुड़े प्रावधानों पर व्यापक विमर्श और स्पष्ट दिशा-निर्देश से संस्थाओं और आम लोगों की शंकाएं दूर की जा सकती हैं।











