फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन खेले गए सभी चार मुकाबले ड्रॉ रहे। टूर्नामेंट के इतिहास में 68 साल बाद ऐसा हुआ है। स्पेन, बेल्जियम, उरुग्वे और ईरान जैसी दिग्गज टीमें जीत हासिल करने में नाकाम रहीं।
FIFA WORLD CUP 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन फुटबॉल प्रशंसकों को रोमांच, संघर्ष और कई अप्रत्याशित परिणाम देखने को मिले। टूर्नामेंट के इतिहास में 68 वर्षों बाद ऐसा मौका आया जब एक ही दिन खेले गए सभी चार मुकाबले ड्रॉ पर समाप्त हुए। इस दुर्लभ रिकॉर्ड ने न केवल विश्व कप इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा, बल्कि अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली टीमों के शानदार प्रदर्शन को भी दुनिया के सामने रखा।
15 जून को खेले गए मुकाबलों में केप वर्डे ने स्पेन को गोलरहित बराबरी पर रोका, बेल्जियम और मिस्र 1-1 से ड्रॉ रहे, सऊदी अरब ने उरुग्वे को 1-1 से रोका और ईरान तथा न्यूजीलैंड के बीच रोमांचक मुकाबला 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। विश्व कप के इतिहास में इससे पहले ऐसा दृश्य 1958 में देखने को मिला था, जब स्वीडन में आयोजित टूर्नामेंट के दौरान एक ही दिन खेले गए चारों मैच ड्रॉ रहे थे।
68 साल बाद दोहराया गया ऐतिहासिक संयोग
फुटबॉल इतिहास में एक ही दिन चार विश्व कप मुकाबलों का ड्रॉ होना बेहद दुर्लभ माना जाता है। 1958 विश्व कप में स्वीडन बनाम वेल्स, वेस्ट जर्मनी बनाम नॉर्दर्न आयरलैंड, पैराग्वे बनाम यूगोस्लाविया और इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रिया के मुकाबले बराबरी पर समाप्त हुए थे। अब 2026 विश्व कप में 68 साल बाद यह रिकॉर्ड फिर दोहराया गया है।
खास बात यह रही कि इस बार कई अंडरडॉग टीमों ने मजबूत और प्रतिष्ठित फुटबॉल देशों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया।
केप वर्डे ने स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोका
दिन का पहला बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला जब अफ्रीकी टीम केप वर्डे ने यूरोपीय दिग्गज और पूर्व विश्व चैंपियन स्पेन को 0-0 की बराबरी पर रोक दिया। स्पेन ने पूरे मैच में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और कई हमले किए, लेकिन केप वर्डे की संगठित रक्षापंक्ति और गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन के सामने स्पेनिश खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो सके।
यह परिणाम टूर्नामेंट के शुरुआती दौर का सबसे बड़ा आश्चर्य माना जा रहा है। केप वर्डे ने साबित किया कि आधुनिक फुटबॉल में अनुशासित रक्षात्मक रणनीति बड़े-बड़े दिग्गजों को भी रोक सकती है।
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बेल्जियम और मिस्र के बीच मुकाबला 1-1 से बराबर
ग्रुप-जी के मुकाबले में बेल्जियम और मिस्र के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। मैच के 20वें मिनट में मिस्र के मिडफील्डर इमाम अशौर ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई।
पहले हाफ में मिस्र ने बेल्जियम के हमलों को सफलतापूर्वक रोके रखा और बढ़त बनाए रखी। हालांकि दूसरे हाफ में बेल्जियम ने लगातार दबाव बनाया। 66वें मिनट में मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी के आत्मघाती गोल के कारण स्कोर 1-1 हो गया। इसके बाद बेल्जियम ने जीत हासिल करने के लिए कई अवसर बनाए, लेकिन मिस्र की रक्षापंक्ति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले को बराबरी पर समाप्त कराया।
इस परिणाम के बाद मिस्र का विश्व कप इतिहास में पहली जीत हासिल करने का इंतजार अभी भी जारी है, लेकिन टीम के प्रदर्शन ने सकारात्मक संकेत जरूर दिए हैं।
सऊदी अरब ने उरुग्वे को चौंकाया
ग्रुप-एच में सऊदी अरब और उरुग्वे के बीच मुकाबला भी बेहद दिलचस्प रहा। दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल की मजबूत टीम मानी जाने वाली उरुग्वे को सऊदी अरब ने 1-1 की बराबरी पर रोक दिया। पहले हाफ में दोनों टीमों ने संतुलित खेल दिखाया, लेकिन दूसरे हाफ में उरुग्वे ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए लगातार गोल के अवसर बनाए।
इसके बावजूद सऊदी अरब की रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को हार से बचाया। इस ड्रॉ के साथ ग्रुप-एच की सभी टीमें एक-एक अंक के साथ बराबरी पर आ गई हैं, जिससे अगले मुकाबले और अधिक महत्वपूर्ण बन गए हैं।
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ईरान और न्यूजीलैंड के बीच रोमांचक 2-2 ड्रॉ
दिन का सबसे रोमांचक मुकाबला ग्रुप-जी में ईरान और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। लॉस एंजिल्स में हुए इस मैच में दोनों टीमों ने आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया और कुल चार गोल देखने को मिले।
न्यूजीलैंड ने मैच की शुरुआत से ही आत्मविश्वास दिखाया। सातवें मिनट में इलिजाह जस्ट ने गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद ईरान ने वापसी करते हुए 33वें मिनट में रामिन रेजाइयन के गोल से स्कोर 1-1 कर दिया। दूसरे हाफ में इलिजाह जस्ट ने अपना दूसरा गोल दागकर न्यूजीलैंड को फिर बढ़त दिलाई।
हालांकि ईरान ने हार नहीं मानी और 64वें मिनट में मोहम्मद मोहेबी ने शानदार गोल कर स्कोर 2-2 कर दिया। अंतिम मिनटों में दोनों टीमों ने जीत के लिए प्रयास किए, लेकिन कोई भी निर्णायक गोल नहीं कर सका और मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ।
दक्षिण अमेरिकी टीमों की निराशाजनक शुरुआत
वर्ल्ड कप 2026 में अब तक मैदान पर उतरी सभी दक्षिण अमेरिकी टीमों के लिए शुरुआती दौर चुनौतीपूर्ण रहा है। उरुग्वे के ड्रॉ के बाद यह साफ हो गया कि अब तक खेलने वाली चारों दक्षिण अमेरिकी टीमें अपना पहला मुकाबला जीतने में असफल रही हैं। आमतौर पर विश्व फुटबॉल में मजबूत मानी जाने वाली इस क्षेत्र की टीमों के लिए यह आंकड़ा चिंता का विषय माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बार अन्य महाद्वीपों की टीमें बेहतर तैयारी और रणनीति के साथ मैदान पर उतरी हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में कहीं अधिक संतुलित हो गई है।
एशियाई टीमों का शानदार प्रदर्शन
विश्व कप 2026 में एशियाई देशों का प्रदर्शन अब तक प्रभावशाली रहा है। एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) की नौ टीमों में से छह टीमें अब तक अपना पहला मैच खेल चुकी हैं और इनमें से किसी को हार का सामना नहीं करना पड़ा है।
इन छह मुकाबलों में एशियाई टीमों ने दो जीत दर्ज की हैं, जबकि चार मैच ड्रॉ रहे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि एशियाई फुटबॉल लगातार मजबूत हो रहा है और अब विश्व मंच पर बड़ी टीमों को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच चुका है।









