Fire Fridge: यूट्यूबर ने बनाया आग से चलने वाला फ्रिज, बिना कंप्रेसर 5°C तक पहुंचा तापमान

Fire Fridge: यूट्यूबर ने आग, पानी और कैल्शियम क्लोराइड से चलने वाला फ्रिज बनाया। यह बिना कंप्रेसर तापमान 5°C तक लाता है और 30-50 वॉट बिजली लेता है।

ग्रीनहिल फोर्ज नाम के यूट्यूबर ने आग, पानी और कैल्शियम क्लोराइड की मदद से चलने वाला फ्रिज तैयार किया है। इसका प्रोटोटाइप बिना कंप्रेसर के तापमान 5°C तक लाने में सफल रहा, जबकि सिस्टम को कुछ बिजली की जरूरत होती है।

Fire Fridge: आमतौर पर फ्रिज में ठंडक पैदा करने के लिए बिजली से चलने वाले कंप्रेसर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ग्रीनहिल फोर्ज नाम के यूट्यूबर ने एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया है, जो आग की गर्मी से कूलिंग करता है। यह सिस्टम एब्जॉर्प्शन रेफ्रिजरेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिसमें कैल्शियम क्लोराइड और पानी की मदद से तापमान कम किया जाता है।

आग की गर्मी से ठंडक पैदा करता है Fire Fridge

ग्रीनहिल फोर्ज नाम के यूट्यूबर ने एक अनोखा रेफ्रिजरेटर तैयार किया है, जो पारंपरिक फ्रिज की तरह कंप्रेसर पर निर्भर नहीं करता। इस प्रोटोटाइप में लकड़ी या चूल्हे की आग से मिलने वाली गर्मी का इस्तेमाल कूलिंग प्रक्रिया के लिए किया जाता है। यूट्यूबर के मुताबिक, उनका बनाया सिस्टम तापमान को 5 डिग्री सेल्सियस तक लाने में सफल रहा।

Fire Fridge: यूट्यूबर ने बनाया आग से चलने वाला फ्रिज, बिना कंप्रेसर 5°C तक पहुंचा तापमान

इस तरह का फ्रिज उन जगहों पर उपयोगी साबित हो सकता है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है। हालांकि, इसे पूरी तरह बिजली से मुक्त सिस्टम नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इसमें कुछ सहायक उपकरणों को चलाने के लिए बिजली की जरूरत होती है।

कैल्शियम क्लोराइड और पानी से कैसे बनती है ठंडक?

इस फ्रिज में एब्जॉर्प्शन रेफ्रिजरेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह कूलिंग की एक पुरानी तकनीक है, जिसमें सामान्य कंप्रेसर की जगह गर्मी और एक ऐसे पदार्थ का उपयोग होता है, जो पानी की भाप को सोख सकता है।

इस प्रक्रिया में सबसे पहले जनरेटर में कैल्शियम क्लोराइड और पानी से जुड़े सिस्टम को गर्म किया जाता है। गर्मी मिलने पर पानी भाप बनकर कंडेनसर तक पहुंचता है, जहां ठंडा होकर दोबारा तरल में बदल जाता है।

इसके बाद पानी कम दबाव वाले इवेपोरेटर में पहुंचता है। यहां कम दबाव के कारण पानी कम तापमान पर वाष्पित होने लगता है। वाष्पीकरण के दौरान पानी आसपास की गर्मी सोखता है, जिससे कूलिंग पैदा होती है।

इसके बाद कैल्शियम क्लोराइड का गाढ़ा घोल पानी की भाप को सोख लेता है। इससे सिस्टम में कम दबाव बनाए रखने में मदद मिलती है और कूलिंग प्रक्रिया दोबारा चल सकती है। आसान शब्दों में कहें तो आग इस प्रक्रिया के लिए जरूरी गर्मी देती है, जबकि पानी के वाष्पीकरण से ठंडक पैदा होती है।

यूट्यूबर ने खुद तैयार किया पूरा प्रोटोटाइप

ग्रीनहिल फोर्ज ने इस सिस्टम को खुद तैयार किया है। इसके निर्माण में स्टेनलेस स्टील की शीट, पाइप और सिल्वर ब्रेजिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। कूलिंग कॉइल को आकार देते समय पाइप के अंदर पानी जमाकर उसे मोड़ा गया, ताकि मोड़ने के दौरान पाइप दबकर खराब न हो।

सिस्टम में लीकेज की जांच के लिए वैक्यूम पंप का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, तापमान और दबाव की निगरानी के लिए Arduino कंट्रोलर लगाया गया है। यह सिस्टम के कामकाज पर नजर रखने के साथ पंप की स्पीड को नियंत्रित करने और खतरे की स्थिति में अलर्ट देने में भी मदद करता है।

बिजली की बचत के साथ क्या हैं इसकी सीमाएं?

सामान्य फ्रिज में कंप्रेसर बिजली की खपत का एक प्रमुख हिस्सा होता है। इसके विपरीत, एब्जॉर्प्शन आधारित इस प्रोटोटाइप में कूलिंग के लिए मुख्य ऊर्जा लकड़ी या चूल्हे की आग से मिलती है। इससे बिजली पर निर्भरता कम करने की संभावना बनती है।

हालांकि, इसमें इस्तेमाल होने वाले सर्कुलेशन पंप और कूलिंग फैन को चलाने के लिए लगभग 30 से 50 वॉट बिजली की जरूरत बताई गई है। इस तरह की खपत को उपयुक्त छोटे सोलर सिस्टम से पूरा करना संभव हो सकता है।

यह तकनीक फार्महाउस, वर्कशॉप और उन दूरदराज के इलाकों के लिए संभावित विकल्प बन सकती है, जहां बिजली सीमित है लेकिन ईंधन उपलब्ध है। फिर भी, इसे घरेलू फ्रिज के व्यावहारिक विकल्प के रूप में अपनाने से पहले इसकी लगातार कूलिंग क्षमता, सुरक्षा, लागत और लंबे समय तक काम करने की क्षमता का परीक्षण जरूरी होगा।

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