Gandhari Review: तापसी पन्नू की फिल्म में बच्चियों की तस्करी का खौफनाक सच, दमदार थ्रिलर को कमजोर क्लाइमैक्स ने किया फीका

Gandhari Review: तापसी पन्नू की फिल्म बच्चियों की तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे को थ्रिलर अंदाज में दिखाती है। दमदार अभिनय और रोमांच के बावजूद कमजोर लेखन व

‘महाभारत में गांधारी ने अपने पति के लिए आंखों पर पट्टी बांधी थी, तू अपनी बच्ची के लिए बांधेगी?’ फिल्म ‘गांधारी’ का यह संवाद इसके शीर्षक और कहानी के बीच के संबंध को सामने लाता है।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: तापसी पन्नू की नई फिल्म ‘गांधारी’ ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म बच्चियों की तस्करी और एक मां की अपनी बेटी को तलाशने की जिद के जरिए एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को थ्रिलर अंदाज में पेश करती है। सुरंगों, रहस्यमयी गिरोह और एक खतरनाक अपराध की पृष्ठभूमि कहानी में तनाव पैदा करती है, लेकिन कई तार्किक सवाल और कमजोर क्लाइमैक्स फिल्म के प्रभाव को कम कर देते हैं।

मां और बेटी के रिश्ते से जुड़ा है ‘गांधारी’ नाम

फिल्म का नाम महाभारत की गांधारी से प्रेरित नजर आता है। कहानी में एक संवाद के जरिए यह सवाल उठाया जाता है कि जिस तरह गांधारी ने अपने पति के लिए आंखों पर पट्टी बांधी थी, क्या एक मां अपनी बेटी के लिए वैसा ही त्याग कर सकती है? हालांकि फिल्म की गांधारी और महाभारत के चरित्र के संदर्भ अलग हैं। यहां केंद्र में पति के प्रति समर्पण नहीं, बल्कि अपनी बच्ची को बचाने के लिए एक मां का संघर्ष है।

फिल्म का मुख्य विषय Child Sex Trafficking यानी बाल यौन तस्करी है। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज में पहले भी कई कहानियां बन चुकी हैं। ‘गांधारी’ की कोशिश इसे पारंपरिक तरीकों से अलग सुरंगों और रहस्यमयी नेटवर्क के जरिए दिखाने की है, लेकिन कहानी में पर्याप्त नया विस्तार नहीं मिल पाता।

क्या है ‘गांधारी’ की कहानी?

कहानी बानी (तापसी पन्नू), उसके पति गोकुल (इश्वाक सिंह) और उनकी छोटी बेटी मिष्टी के इर्द-गिर्द घूमती है। ट्रेन यात्रा के दौरान एक छोटी-सी घटना पूरे परिवार की जिंदगी बदल देती है। गोकुल बेटी के लिए कच्चा आम लेने स्टेशन पर उतरता है। इसी बीच मिष्टी रहस्यमय तरीके से गायब हो जाती है। बानी बेटी को बचाने की कोशिश में ट्रेन से उतरती है, लेकिन उसके सिर में गंभीर चोट लग जाती है। 

डॉक्टर बताते हैं कि उसकी आंखों की रोशनी कुछ समय के लिए चली गई है। इसके बावजूद बानी अपनी बेटी की तलाश छोड़ने को तैयार नहीं होती। पुलिस से मदद मांगने के दौरान उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता। इसी दौरान उसकी मुलाकात झुनू (मीता वशिष्ठ) से होती है, जो खुद अपनी पोती के गायब होने की तलाश में जुटी है। दोनों महिलाओं की तलाश उन्हें बच्चों की तस्करी से जुड़े एक खतरनाक नेटवर्क तक ले जाती है।

सुरंगों और तस्करी का एंगल कितना असरदार?

Gandhari Review: तापसी पन्नू की फिल्म में बच्चियों की तस्करी का खौफनाक सच, दमदार थ्रिलर को कमजोर क्लाइमैक्स ने किया फीका

फिल्म की सबसे दिलचस्प बात इसका अंडरग्राउंड नेटवर्क है। बच्चों को सुरंगों के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का विचार कहानी को रहस्य और डर का माहौल देता है। चौमुखी देवी और मगरासुर की लोककथा को भी कथा के साथ जोड़ा गया है। मान्यता में मगरासुर बच्चों को पाताल लोक ले जाता है और चौमुखी देवी उन्हें बचाने के लिए वहां पहुंचती हैं। फिल्म इस प्रसंग को मां की शक्ति और संघर्ष के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करती है।

हालांकि कहानी आगे बढ़ने के साथ कई सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं। बच्चों को लंबे समय तक बेहोश रखने, उन्हें बोरियों में बंद करने, उनकी जगह दूसरी लाशों की व्यवस्था और तस्करी के बाद बच्चों के साथ क्या होता है जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को पर्याप्त विस्तार नहीं दिया गया है।

कमजोर पड़ जाता है विलेन और क्लाइमैक्स

फिल्म में ब्लैकहोल गैंग को बेहद ताकतवर और खतरनाक बताया जाता है, लेकिन उसका असर स्क्रीन पर उतना प्रभावी नहीं दिखाई देता। दादा भाई का किरदार लंबे समय तक रहस्य के रूप में रखा जाता है। उसकी मौजूदगी को लेकर जिस तरह का डर बनाया जाता है, वह उसके सामने आने के बाद उतना प्रभावशाली नहीं रह जाता।

कहानी में कुछ किरदारों के ट्रैक भी अधूरे लगते हैं। गोकुल की भूमिका को पर्याप्त गहराई नहीं मिलती, जबकि पुलिस का पक्ष और अंतिम टकराव भी अपेक्षित असर पैदा नहीं कर पाते। यही वजह है कि फिल्म का क्लाइमैक्स इसकी सबसे कमजोर कड़ियों में शामिल हो जाता है।

तापसी पन्नू ने संभाला मोर्चा

अभिनय की बात करें तो तापसी पन्नू ने बानी के किरदार को मजबूती से निभाया है। फिल्म के एक्शन दृश्यों में उनकी मेहनत साफ नजर आती है। उनका किरदार शारीरिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर संघर्ष करता है और तापसी इसमें प्रभाव छोड़ने में सफल रहती हैं। मीता वशिष्ठ और छाया कदम भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करती हैं। हालांकि तापसी और इश्वाक सिंह के बीच की केमिस्ट्री उतनी प्रभावी नहीं बन पाती और उनके रिश्ते को ज्यादा गहराई से तलाशने की गुंजाइश थी।

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर तनावपूर्ण माहौल बनाने में मदद करता है। छोटे कस्बे की लोकेशन और सिनेमेटोग्राफी भी कहानी के मूड को मजबूत करती है। एक्शन कोरियोग्राफी कुछ दृश्यों में खास प्रभाव छोड़ती है।

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