दुनिया में 52 सक्रिय सैन्य संघर्षों के बीच, ग्लोबल फायरपावर ने वर्ष 2026 की सैन्य शक्ति रैंकिंग जारी कर दी है। कुल 145 देशों की पारंपरिक युद्ध क्षमता का विश्लेषण करने वाले इस रिपोर्ट में, भारत ने अपनी सैन्य ताकत का एक बार फिर लोहा मनवाया है।
नई दिल्ली: दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और 52 से अधिक सक्रिय सैन्य संघर्षों के बीच ग्लोबल फायरपावर (Global Firepower) इंडेक्स 2026 की ताजा रैंकिंग जारी कर दी गई है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक सैन्य सूचकांक में भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखते हुए दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में जगह बनाई है। वहीं, आर्थिक और सैन्य कमजोरियों के चलते पाकिस्तान 14वें स्थान पर फिसल गया है, जो उसके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
भारत की वैश्विक सैन्य ताकत फिर साबित
ग्लोबल फायरपावर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 0.1346 स्कोर प्राप्त हुआ है। इस इंडेक्स में 0.0000 स्कोर को परफेक्ट माना जाता है, यानी जितना कम स्कोर, उतनी अधिक सैन्य क्षमता। भारत का चौथा स्थान उसकी विशाल सेना, मजबूत रक्षा ढांचे, बढ़ते स्वदेशी रक्षा उत्पादन और बेहतर लॉजिस्टिक क्षमताओं को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की स्थिति इसलिए भी मजबूत बनी हुई है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में देश ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर खास जोर दिया है। स्वदेशी लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणालियां, युद्धपोत और आधुनिक सैन्य तकनीक भारत की सैन्य शक्ति को लगातार नई ऊंचाइयों तक ले जा रही हैं।
अमेरिका, रूस और चीन शीर्ष तीन में
संयुक्त राज्य अमेरिका एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति बना हुआ है। अमेरिका को इस साल 0.0741 स्कोर मिला है, जो उसे पहले स्थान पर बनाए रखता है। अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा बजट, अत्याधुनिक हथियार प्रणाली और वैश्विक स्तर पर फैला सैन्य नेटवर्क है। दूसरे स्थान पर रूस है, जिसे 0.0791 स्कोर मिला है। वहीं चीन 0.0919 स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर कायम है। इन तीनों देशों के पास विशाल मानव संसाधन, उन्नत हथियार तकनीक और मजबूत औद्योगिक आधार है, जो उन्हें शीर्ष पर बनाए रखता है।
इस साल की रैंकिंग में दक्षिण कोरिया ने भी उल्लेखनीय प्रगति की है। अपनी उन्नत सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आधुनिक हथियार प्रणालियों के दम पर दक्षिण कोरिया ने पांचवां स्थान हासिल किया है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक संतुलन को भी दर्शाता है।

पाकिस्तान की रैंकिंग में लगातार गिरावट
पाकिस्तान के लिए 2026 की रैंकिंग निराशाजनक रही है। साल 2024 में 9वें स्थान पर रहा पाकिस्तान, 2025 में 12वें और अब 2026 में 14वें स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। पाकिस्तान लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर उसके रक्षा बजट और सैन्य आधुनिकीकरण पर पड़ा है।
इसके अलावा, सीमित संसाधनों के कारण नई तकनीक और हथियार प्रणालियों में निवेश भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले साल मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के सैन्य ढांचे और साजोसामान को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसने उसकी सैन्य क्षमताओं को और कमजोर किया।
कैसे तय होती है Global Firepower रैंकिंग?
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स केवल हथियारों या सैनिकों की संख्या के आधार पर रैंकिंग तय नहीं करता। यह रैंकिंग 60 से अधिक कारकों के विश्लेषण पर आधारित होती है, जिनमें शामिल हैं:
- थल, जल और वायु सेना की ताकत
- हथियारों और सैन्य तकनीक की गुणवत्ता
- लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षमता
- भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक लाभ
- आर्थिक स्थिरता और रक्षा बजट
इन सभी पहलुओं को मिलाकर हर देश को एक GFP स्कोर दिया जाता है। Global Firepower 2026 की यह रैंकिंग साफ संकेत देती है कि भारत न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में भी लगातार मजबूत हो रहा है। वहीं, पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह रिपोर्ट चेतावनी है कि आर्थिक स्थिरता और आधुनिकरण के बिना सैन्य ताकत को बनाए रखना बेहद मुश्किल है।










