गोरखपुर में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया, जहां प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चयनित शिक्षक पहुंचे। राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 और मुख्यमंत्री शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चुने गए शिक्षकों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा और शिक्षक की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि भारत आदिकाल से ही ज्ञान का उपासक रहा है।
इस बार राज्य स्तरीय सम्मान के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों का चयन किया गया। इनमें कुल 33 महिला शिक्षक भी शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग से चयनित शिक्षकों में पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री शिक्षक पुरस्कार दिया गया। शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य, स्कूल प्रबंधन, नवाचार और विद्यार्थियों के समग्र विकास में योगदान को ध्यान में रखते हुए उनका चयन किया गया।
समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को केवल सम्मानित ही नहीं किया, बल्कि पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों के लिए कई महत्वपूर्ण सुविधाओं की घोषणा भी की। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु में दो साल की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में जीवनभर हर साल 4,000 किलोमीटर तक मुफ्त यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। इससे सम्मानित शिक्षकों को प्रदेश के भीतर यात्रा करने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पुरस्कार के तहत शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि भी दी जाएगी। सरकार की ओर से यह सम्मान उन शिक्षकों के योगदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिया गया है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करते हुए विद्यार्थियों के विकास और स्कूलों के शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भारत की ज्ञान परंपरा और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता की पहचान ज्ञान, शिक्षा और संस्कारों से रही है। शिक्षक समाज में केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की जिम्मेदारी नहीं निभाते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में शिक्षकों का सम्मान समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने का काम करता है।
गोरखपुर में आयोजित समारोह में प्रदेशभर से पहुंचे शिक्षकों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। चयनित शिक्षकों को समारोह में सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल किया गया। अलग-अलग जिलों से आने वाले शिक्षकों के ठहरने की व्यवस्था भी की गई थी। कार्यक्रम को लेकर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां पहले से की गई थीं।
इस सम्मान समारोह में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की अलग-अलग श्रेणियों से चयन किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग से चयनित 61 शिक्षकों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शामिल हैं, जबकि माध्यमिक शिक्षा विभाग से चयनित 20 शिक्षक माध्यमिक स्तर पर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। शिक्षकों के चयन में उनके कार्य, स्कूल प्रबंधन, शिक्षण में नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में योगदान जैसे पहलुओं को महत्व दिया गया।
सरकार की ओर से पुरस्कार के साथ सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का फैसला सम्मानित शिक्षकों के लिए विशेष महत्व रखता है। इससे उन्हें शिक्षा व्यवस्था में दो वर्ष अतिरिक्त योगदान देने का अवसर मिलेगा। वहीं, जीवनभर हर साल 4 हजार किलोमीटर की मुफ्त बस यात्रा की सुविधा से शिक्षक प्रदेश में अपने व्यक्तिगत या अन्य जरूरी कार्यों के लिए परिवहन का लाभ उठा सकेंगे। यह सुविधा उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस सेवाओं से जुड़ी होगी।
शिक्षक दिवस के मौके पर हुए इस कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के योगदान को पहचान देने का संदेश भी दिया गया। सरकार की ओर से शिक्षकों को प्रोत्साहन देने के लिए पुरस्कार योजना को महत्वपूर्ण बताया गया। उत्कृष्ट काम करने वाले शिक्षकों को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलने से दूसरे शिक्षकों को भी बेहतर काम और नए प्रयोग करने के लिए प्रेरणा मिलने की उम्मीद जताई गई।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को विद्यार्थियों के भविष्य से जोड़ते हुए शिक्षा के व्यापक प्रभाव पर बात की। स्कूल में शिक्षक बच्चों को विषय का ज्ञान देने के साथ-साथ अनुशासन, जिम्मेदारी, संस्कार और समाज के प्रति दायित्व की समझ भी विकसित करते हैं। यही कारण है कि किसी भी शिक्षा व्यवस्था की सफलता में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गोरखपुर में आयोजित समारोह की एक खास बात यह रही कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे शिक्षकों को एक मंच पर सम्मान मिला। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यालयों में काम करने वाले शिक्षकों को पहचान मिली। चयनित शिक्षकों के लिए यह सम्मान उनके वर्षों के काम की सार्वजनिक स्वीकृति के तौर पर देखा जा रहा है।
राज्य शिक्षक पुरस्कार के तहत दी जाने वाली आर्थिक राशि भले ही सीमित हो, लेकिन इसके साथ मिलने वाले प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न शिक्षकों के लिए सम्मान का प्रतीक हैं। वहीं, दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा और हर साल 4 हजार किलोमीटर मुफ्त बस यात्रा जैसी सुविधाएं इसे अन्य सामान्य सम्मान से अलग बनाती हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षक सम्मान के इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले शिक्षकों को सामने लाना और उनके योगदान को पहचान देना है। स्कूलों में नवाचार, बेहतर प्रबंधन और बच्चों के समग्र विकास के लिए काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने से शिक्षा व्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक और सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
गोरखपुर में शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के संबोधन और पुरस्कार वितरण ने शिक्षकों के बीच उत्साह का माहौल बनाया। प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने अपने सम्मान को शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम की उपलब्धि के रूप में देखा। समारोह में शिक्षक दिवस की शुभकामनाओं के साथ शिक्षा के महत्व और समाज निर्माण में शिक्षकों की जिम्मेदारी को रेखांकित किया गया।
कुल मिलाकर, गोरखपुर में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह उत्तर प्रदेश के शिक्षकों के लिए कई मायनों में खास रहा। 81 शिक्षकों को राज्य और मुख्यमंत्री शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया, उन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इसके अलावा सम्मानित शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु दो साल बढ़ाने और यूपी रोडवेज की बसों में हर साल 4,000 किलोमीटर की मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का फैसला किया गया। सरकार की इन घोषणाओं से सम्मानित शिक्षकों को आर्थिक सम्मान के साथ सेवा अवधि और यात्रा से जुड़ी अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलेंगी।










