गुवाहाटी में छात्रों और युवा संगठनों ने राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधारों की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
गुवाहाटी: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच गुरुवार को असम की राजधानी गुवाहाटी में भी छात्रों और युवा संगठनों ने सत्याग्रह आयोजित किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई। यह प्रदर्शन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) असम की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए छात्र और युवा शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और प्रतिभागियों ने नारेबाजी, तख्तियां और पोस्टरों के माध्यम से अपनी मांगें रखीं।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने केंद्र सरकार से ऐसी व्यवस्था विकसित करने की अपील की जिससे परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाई जा सके। उनका मानना है कि तकनीकी सुधार, मजबूत निगरानी और समयबद्ध जांच से भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम की जा सकती है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राष्ट्रीय परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से विभिन्न मामलों में जांच और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही जाती रही है। इस बीच विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लगातार उठाया है।
दिल्ली के प्रदर्शनकारियों के प्रति जताई एकजुटता
गुवाहाटी के प्रदर्शन में शामिल लोगों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में भी आवाज उठाई और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने उन छात्रों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की जो हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान घायल होने की खबरों में सामने आए। उन्होंने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालने की अपील की।
शांतिपूर्ण रहा पूरा आंदोलन
प्रदर्शन के दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्वक मार्च किया और नारे लगाए। आयोजन के दौरान किसी प्रकार की हिंसा या कानून-व्यवस्था संबंधी गंभीर घटना की सूचना नहीं मिली। आयोजकों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल छात्रों की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाना और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग करना है। उन्होंने युवाओं से भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने की अपील की।
देशभर में जारी हैं विरोध प्रदर्शन
हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। कई छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में गुवाहाटी का यह सत्याग्रह भी राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा माना जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में छात्र संगठन अपनी-अपनी मांगों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता क्यों महत्वपूर्ण है
भारत में हर वर्ष करोड़ों छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेते हैं। इन परीक्षाओं के आधार पर चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रशासनिक सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में प्रवेश एवं नियुक्तियां होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा कमजोर होता है तो इसका सीधा प्रभाव शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के मनोबल पर पड़ता है। इसलिए परीक्षा संचालन में तकनीकी सुरक्षा, डेटा संरक्षण, निगरानी और समयबद्ध जांच अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
सुधारों की मांग पर जोर
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है। डिजिटल निगरानी, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र वितरण, मजबूत सत्यापन प्रणाली और पारदर्शी जांच तंत्र जैसे उपाय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही किसी भी विवाद की स्थिति में त्वरित और निष्पक्ष जांच छात्रों का विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
संवाद से समाधान की उम्मीद
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से छात्रों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत बनाने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर लगातार चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दों का समाधान संवाद, पारदर्शिता और संस्थागत सुधारों के माध्यम से ही संभव है।








