ग्वालियर में 21.05 करोड़ की साइबर ठगी, क्रिप्टो निवेश के नाम पर वरिष्ठ CA बने शिकार

ग्वालियर में 70 वर्षीय CA से क्रिप्टो निवेश के नाम पर 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई। जांच में हजारों बैंक खातों का नेटवर्क सामने आया।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का झांसा देकर 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई। मामले की जांच में देशभर में फैले हजारों बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अब तक के सबसे बड़े साइबर ठगी के मामलों में से एक सामने आया है। वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर 21.05 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। राज्य साइबर सेल की जांच में देश के कई राज्यों में फैले बैंक खातों के नेटवर्क और संगठित साइबर गिरोह की गतिविधियों का खुलासा हुआ है।

क्रिप्टो निवेश के नाम पर सात महीने तक चलता रहा ठगी का खेल

ग्वालियर के 70 वर्षीय वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को दिसंबर 2025 में एक महिला का व्हाट्सएप कॉल आया, जिसने खुद को क्रिप्टो निवेश सलाहकार बताया। शुरुआत में उन्हें एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश कराया गया और फर्जी मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास जीता गया। इसके बाद अलग-अलग किस्तों में करीब सात महीने तक उनसे कुल 21.05 करोड़ रुपये निवेश के नाम पर जमा कराए गए।

जब उन्होंने अपने निवेश और मुनाफे के रूप में लगभग 33.2 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की, तो प्लेटफॉर्म ने लेनदेन को "हाई रिस्क" बताकर रोक दिया। इसके बाद अतिरिक्त सुरक्षा राशि जमा करने की मांग की गई, जिससे उन्हें ठगी का एहसास हुआ।

देशभर में फैले बैंक खातों का मिला नेटवर्क

10 जुलाई को मामला दर्ज होने के बाद राज्य साइबर सेल ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को अलग-अलग राज्यों में मौजूद 20,507 से अधिक करंट और म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजा गया। इन खातों का संबंध तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से बताया जा रहा है।

साइबर पुलिस अब तक लेनदेन की 12 परतों का पता लगा चुकी है और करीब 1.92 करोड़ रुपये फ्रीज भी कराए गए हैं। मामले की जांच जारी है और अन्य खातों की भी पड़ताल की जा रही है।

पीड़ित खुद लड़ चुके हैं वित्तीय धोखाधड़ी के मामले

इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अशोक विजयवर्गीय स्वयं लंबे समय से वित्तीय अपराध और ऑनलाइन ठगी से जुड़े मामलों में पीड़ितों की मदद करते रहे हैं। वह ग्वालियर चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य चुनाव अधिकारी भी हैं और कई चर्चित आर्थिक मामलों से जुड़े रहे हैं। इसके बावजूद संगठित साइबर गिरोह ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधी अब बेहद पेशेवर तरीके से लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें निवेश के लिए प्रेरित करते हैं। यही वजह है कि वित्तीय मामलों की समझ रखने वाले लोग भी इनके झांसे में आ सकते हैं।

जांच के साथ बैंकिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद हजारों बैंक खातों के इस्तेमाल को लेकर बैंकिंग व्यवस्था और केवाईसी प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने बड़े पैमाने पर बैंक खाते किस तरह खोले गए और उनका उपयोग साइबर ठगी के लिए कैसे किया गया।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से जुड़े किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। यदि कोई प्लेटफॉर्म अत्यधिक मुनाफे का दावा करे या निकासी के समय अतिरिक्त शुल्क या सुरक्षा राशि मांगे, तो तुरंत सतर्क होकर संबंधित एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए।

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